लखनऊ 14 मार्च। प्रदेश में ओला व उबर जैसी एप आधारित टैक्सी सेवाओं को सरकारी नियमों दायरे में लाया जा रहा है। सरकार ने इनके लिए पंजीकरण और लाइसेंस लेना अनिवार्य करने का निर्णय किया है। बिना रजिस्ट्रेशन, वाहन फिटनेस, चालक के मेडिकल परीक्षण ष्और पुलिस सत्यापन के कोई भी टैक्स सेवा संचालित नहीं हो सकेगी। कैबिनेट ने इस उद्देश्य से उत्तर प्रदेश अधिसूचित करते हुए इस पर 30 मोटरयान नियमावली 1998 में दिनों के भीतर आपत्तियां और सुझाव संशोधन करते हुए मोटरवान समूहक मांगे हैं। नियमावली में प्रविधान है कि व वितरण सेवा प्रदाता नियमावली- यदि बुकिंग स्वीकार करने के बाद 2026 को स्वीकृति दी थी। शासन ने बिना वैष कारण के रद की जाती है संशोधित नियमावली के ड्राफ्ट को प्रस्तावित नियमों पर 30 दिन के भीतर आपत्तियां और सुझाव दिए जा सकेंगे। नियमावली में प्रावधान है कि यदि बुकिंग स्वीकार करने के बाद बिना किसी वैध कारण के बुकिंग रद की जाती है तो चालक पर किराए का 10 प्रतिशत या अधिकतम 100 रुपये का जुर्माना लगाया जाएगा और अगली बुकिंग में यात्री को किराए में रियायत दी जाएगी।
नियमावली को मंगलवार को कैबिनेट की स्वीकृति मिली थी। नियम के अनुसार सेवा प्रदाताओं को राशि भी जमा करनी होगी। चालकों के लिए 40 घंटे का प्रशिक्षण कार्यक्रम अनिवार्य रहेगा। इसमें एप का उपयोग, मोटरयान नियम, सड़क दुर्घटना की स्थिति में आपात सहायता सुरक्षित ड्राइविंग, व्यवहार और मार्ग की जानकारी शामिल होगी। जिन चालकों की रेटिंग पांच प्रतिशत से कम होगी, उन्हें हर तिमाही प्रशिक्षण लेना होगा। चालक के पास कम से कम दो वर्ष का ड्राइविंग अनुभव होना चाहिए। वह पिछले तीन वर्षों में किसी अपराध में दोषसिद्ध नहीं होना चाहिए। पुलिस द्वारा उनका चरित्र सत्यापन किया जाएगा। चालकों के लिए कम से कम पांच लाख रुपये का स्वास्थ्य बीमा और 10 लाख रुपये का दुर्घटना बीमा भी अनिवार्य होगा।
महिलाओं की सुरक्षा के लिए एप में महिला चालक का विकल्प दिया जाएगा। यात्रा के दौरान यात्री अपनी लाइव लोकेशन साझा कर सकेंगे और सभी वाहनों में ट्रैकिंग उपकरण सक्रिय रहेंगे। यदि चालक तय मार्ग से हटता है तो नियंत्रण कक्ष को अलर्ट जाएगा। यदि बुकिंग स्वीकार करने के बाद बिना वैध कारण के रद की जाती है तो चालक पर किराए का 10 प्रतिशत या अधिकतम 100 रुपये का जुर्माना लगाया जाएगा और अगली बुकिंग यात्री को किराए में रियायत दी जाएगी। एनसीआर क्षेत्र में प्रदूषण कम करने के लिए नई फ्लीट में केवल सीएनजी या इलेक्ट्रिक आटो रिक्शा जोड़े जा सकेंगे। चार पहिया एलसीबी (हल्का वर्णिज्यक वाहन) एलजीवी (हल्का मालवाहक वाहन) और दोपहिया श्रेणी में पेट्रोल या डीजल से चलने वाले नए वाहन शामिल नहीं किए जाएंगे।

