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    Home»देश»भारतीय ज्ञान परंपरा की विदुषी नारियां
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    भारतीय ज्ञान परंपरा की विदुषी नारियां

    adminBy adminMarch 7, 2026No Comments3 Views
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    नई दिल्ली, 07 मार्च (दि)। नारी सम्मान की इसी भारतीय परंपरा में बहुत सी ऐसी विदुषी नारियां हुई हैं, जो आज भी महिलाओं के लिए एक श्रेष्ठ आदर्श के रूप में प्रेरित करती हैं। इन्होंने धर्म, दर्शन, विज्ञान और कला समेत हर क्षेत्र में अपनी प्रतिभा के उच्च मापदंड प्रस्तुत किए। 8 मार्च को हर वर्ष अंतराष्ट्रीय महिला दिवस मनाया जाता है।
    भारतीय संस्कृति में प्राचीन काल से ही नारी का स्थान सम्माननीय रहा है। हजारों वर्ष पहले जब वेदों का बोलबाला था, भारतीय समाज में स्त्री-पुरुष के बीच भेदभाव नहीं बरता जाता था। फलस्वरूप समाज के सभी कार्यकलापों में दोनों की समान भागीदारी होती थी। नारी सम्मान की इसी भारतीय परंपरा में बहुत सी ऐसी विदुषी नारियां हुई हैं, जो आज भी महिलाओं के लिए एक श्रेष्ठ आदर्श के रूप में प्रेरित करती हैं। इन्होंने धर्म, दर्शन, विज्ञान और कला समेत हर क्षेत्र में अपनी प्रतिभा के उच्च मापदंड प्रस्तुत किए। 8 मार्च को हर वर्ष अंतराष्ट्रीय महिला दिवस मनाया जाता है। ऐसे में भारतीय ज्ञान परंपरा की प्रतिनिधि विदुषी नारियों के बारे में जानना आवश्यक है। इनमें पहला नाम आता है देवमाता अदिति का। शिवपुराण के अनुसार, देवमाता अदिति प्रजापति दक्ष की पुत्री और महर्षि कश्यप की पत्नी थीं। देवी अदिति समस्त देवताओं की माता हैं और उन्हें वेदों का गहरा ज्ञान है।
    ऋग्वेद के दशम मंडल के 72वें सूक्त के सभी नौ (9) मंत्रों का साक्षात्कार भी अदिति द्वारा ही किया गया। इससे सिद्ध होता है कि अदिति एक मंत्रद्रष्टा नारी हैं। इस सूक्त के चतुर्थ, पंचम, अष्टम् तथा नवम मंत्र में ‘अदिति’ नाम का भी उल्लेख है। नारी विद्वता की इस परंपरा में दूसरा नाम विदुषी गार्गी का आता है। गार्गी ने अपनी बाल्यावस्था में ही वैदिक-शास्त्र, दर्शन शास्त्र, वेदों और उपनिषदों में महारत हासिल कर ली थी। विदुषी गार्गी का वेदों की रचना में भी महत्त्वपूर्ण योगदान था। गार्गी गर्गवंश में वचक्नु नामक महर्षि की पुत्री थीं, उनका पूरा नाम ‘वाचकन्वी गार्गी’ है। रामायण काल में राजा जनक के दरबार में शास्त्रार्थ का आयोजन हुआ, जिसमें ऋषि याज्ञवल्क्य और गार्गी के बीच प्रश्न-उत्तर किए गए। आज भी विदुषी गार्गी और याज्ञवल्क्य के मध्य हुए शास्त्रार्थ को लोग बड़ी संजीदगी से स्मरण करते हैं। इन्हीं प्रश्नोत्तर पर ‘बृहदारण्यक उपनिषद’ का निर्माण हुआ। ऋषि याज्ञवल्क्य की दूसरी पत्नी मैत्रेयी भी वेदों का गहरा ज्ञान रखती थीं। आत्मज्ञान की प्राप्ति के लिए वह ऋषि याज्ञवल्क्य के साथ वन में रहीं। पुराणों के अनुसार, जनक की राजसभा में महापंडित याज्ञवल्क्य और मैत्रेयी नामक विदुषी के बीच अध्यात्म विषय पर कई दिनों तक चले शास्त्रार्थ का उल्लेख है। याज्ञवल्क्य द्वारा उठाए गए दार्शनिक प्रश्नों का उत्तर देने में विदुषी मैत्रेयी समर्थ हुई। लेकिन जीवन के कुछ बारीक मसलों को लेकर मैत्रेयी द्वारा पूछे गए प्रश्नों का उत्तर देने में असमर्थ होकर याज्ञवल्क्य डगमगाए। अंत में उन्हें हार माननी पड़ी। स्पष्ट है कि नारियों की महिमा उस युग में इतनी उन्नत दशा में थी। अरुंधति ऋषि वशिष्ठ की पत्नी और तपस्विनी थीं। आकाश में स्थित सप्तऋषि मंडल में एक ऋषि वशिष्ठ भी हैं। यह सातों ऋषि सदा एक मंडल के रूप में आकाश का फेरा लिया करते हैं। अरुंधति भी तारामंडल के साथ होती है। अरुंधति आज भी पति के प्रति निष्ठा का प्रतीक है। ऋषि अगस्त्य की पत्नी लोपामुद्रा बुद्धिमान, दार्शनिक और शास्त्रों की ज्ञाता थीं। ये विदर्भ देश के राजा की बेटी थी। राजकुल में जन्म लेकर भी ये सादा जीवन उच्च विचार की समर्थक थी, तभी तो इनके पति ने इन्हें कहा था- तुष्टोऽअहमस्मि कल्याणि तव वृत्तेन शोभने, अर्थात् कल्याणी तुम्हारे सदाचार से मैं तुम पर बहुत संतुष्ट हूं। ये इतनी महान विदुषी थी कि एक बार इन्होंने अपने आश्रम में राम, सीता एवं लक्ष्मण को ज्ञान की बहुत सी बातों की शिक्षा दी थी।
    भारतीय ज्ञान परंपरा में ऐसी अनेक विदुषियों का उल्लेख मिलता है। भारतीय जीवन एवं दर्शन को समृद्ध बनाने में इनका योगदान अमूल्य है। ऐसे आदर्श और उनका जीवन समाज के लिए एक बड़ी प्रेरणा बनने का सामर्थ्य रखते हैं। अतः, महिला दिवस के उपलक्ष्य में भारतीय समाज, विशेषकर महिलाओं को इस समृद्ध परंपरा का अध्ययन करके इन महिलाओं के जीवन वृत्तांत एवं जीवन मूल्यों को सार्वजनिक विमर्श का हिस्सा बनाना चाहिए। महिला दिवस अगर इस प्रयोजन का हेतु बन जाए, तो यही इसकी सबसे बड़ी सार्थकता होगी।

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