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    शांति और कानून व्यवस्था बनाने में दें सहयोग, सभी को पावन पर्व की बधाई! विश्व कुटुंब और उबंटू की मिलकर चलो की भावना को ध्यान में रखकर आओ जमकर मनाएं होली

    adminBy adminMarch 2, 2026No Comments1 Views
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    भले ही इस बार जल्दी आ गई होली मगर चल रही ठंडी बयारों के बाद भी बुराई पर अच्छाई की प्रतीक होली के रंग गुलाल का सुरुर बच्चों से लेकर बड़ों तक खूब छाने लगा है। अपनी याद में पहली बार ऐसा हो रहा है कि जलने के एक दिन को छोड़कर दुल्हेंडी मनाई जाएगी। जो भी हो होलिका का मजा तो अपार है। इस बार हम ब्रज की बरसाने की होली के साथ ही नेताओं द्वारा बदले जा रहे बयान और एआई का जो रंग चढ़ रहा है उसमें नए रंग लेकर आई होली मनाने जा रहे हैं। जो मस्ती होली देती है उन्हें छोड़ अब दुनिया में जो खून की होली हो रही है वो दुखद भी और सोचने की भी। यह स्थिति हमें इस हाल में सोचने के लिए मजबूर करती है कि रंग खेलें लेकिन ऐसा काम ना करे कि हम आपस में एक दूसरे से उलझकर त्योहार का मजा भूल जाएं।
    एक जमाना था जब होली के हुरियारे प्रेमिका के मन को छूकर गुलाल लगाकर रंग उड़ाता था तो फिल्मी रंगबाजों की होली का मजा कुछ और था। हीरो हिराईन नाचते गाते रंग उड़ाते थे और उसकी यादें सालों तक बनी रहती थी। ब्रज में भगवान श्रीकृष्ण और राधा की प्रेम की होली में रंगे लोग और लठमार होली खेली जाती थी लेकिन आज वो मजा नहीं आता लेकिन फिर भी वृंदावन बरसाना की होली आज भी प्रसिद्ध है।
    हर व्यक्ति के लिए रंगों का यह त्योहार खुशियों से भरा और ऐसी यादें बनें कि हम कोई चर्चा करें तो होली की खुशियों पर जरुर नाती पोतों से विचारों का आदान प्रदान करें और देश में गरीब अमीर किस तरह मिलकर होली मनाते थे लेकिन होली की यादें बनी रहें इसके लिए जरुरी है कि हम जहां भी रहते हैं वहां पुलिस प्रशासन द्वारा जो कानून व्यवस्था बनाए रखने के लिए किए गए इंतजामों के साथ हर उस बात का ध्यान रखे जिससे हमारी होली सतरंगी बन जाए।
    जब हम छोटे थे तो बांस में कपड़ा ठूंसकर पिचकारी बना लेते थे और टेसू के फूलों व रंगों से त्योहार मनाते थे बाकी सब नालियों की कीचड़ एक दूसरे पर डालते थे और नालियों में डालकर होली मनाते थे। कुछ घंटों बाद जब नहाकर निकलते थे तो सबकुछ भूल एक दूसरे के गले लगकर उसकी जीवन की खुशहाली की कामना किया करते थे। वर्तमान में साधन और सुविधाएं बढ़ी और कुछ लोगों पर भगवान की इतनी मेहरबानी हुई कि बाजार में बीस रुपये से लेकर हजारों रुपये तक की पिचकारी और महंगी मिठाईयां गुजिया खरीद रहे हैं जिससे बाजारों में छाया होली का त्योहार दुकानदारों के लिए खुशियां लेकर आया है और उपभोक्ता खरीददारी का सुख भोग रहा है तो भाईयों इन उपलब्धियों के साथ मिलकर मनाएं होली और बिखरें खुशियों के रंग।
    इस खुशियों के मौके पर हम कुछ मिलावटखोरों की पैसे कमाने की अंधी दोैड़ का शिकार ना हो इसके लिए खतरनाक रंग और मिलावटी मिठाईयों व व्यंजनों को खरीदते समय शुद्धता का ध्यान रखें क्योंकि जब गांवों में नकली मावा पनीर मिलने के साथ ही नामचीन कंपनी हल्दीराम के गोदाम में एक्सपायरी डेट की मिठाई मिल सकती है तो कोई भी आपको मिलावटी सामान देकर आपकी होली का मजा किरकिरा कर सकता है।
    इस बार शहर में मूर्खधिराज की उपाधि देने से हमें एक दिन का इंतजार और करना पड़ेगा। क्येांकि रंग के बाद होली मिलन के अवसर पर दी जाती है लेकिन रंगों व फूलों से होली खेलें और इस साल बाजार में आई पिचकारी स्टाइलिश चश्मों टोपियों कपड़ों का मजा लें लेकिन इस बात का ध्यान जरुर रंगों की आपकी लापरवाही चेहरा व आंखों की रोशनी खराब ना कर दें इसके लिए शुद्धता का ध्यान रखे।
    अर्थ से परमार्थ और अर्श से फर्श तक होली का मजा तभी है जब हम भक्त प्रहलाद की तरह भगवान पर विश्वास और अपनों से प्रेम कर जिस प्रकार होलिका जलकर राख हो गई थी लेकिन प्रहलाद को कुछ नहीं हुआ उसी प्रकार हम अगले साल होली का इंतजार करें।
    पर्यावरण संतुलन और हरियाली बनी रहे इसे ध्यान रख जो पेड़ों को काटकर हम होली जलाते थे वो अभी व्यवस्था पूरी समाप्त नहीं हुई है लेकिन देश भर में लाखों होली जलेगी उनमें गाय के गोबर के उपलों का प्रयोग किया जा रहा है जो हमारे जीवन के लिए महत्वपूर्ण है और हमें इस व्यवस्था को बढ़ाना चाहिए।
    इस बार शुभ संयोग में होली का दहन ६.२2 से ८.५३ बजे तक रहेगा। होली में सूखा नारियल, कपूर अक्षत नीम के पत्ते अर्पित करेंगे। मेरा मत है कि विश्व कुटुंब की भावना को ध्यान में रखते हुए दक्षिण अफ्रीका के प्राचीन दर्शन उबंटू यानी सबको साथ लेकर आगे बढ़ने और सब रहें सुखी की भावना के साथ होली का त्योहार मनाएं और अपनों की खुशहाली की कामना करें यही होली का मूलमंत्र होगा।
    दोस्तों अपना देश आपसी सदभाव भाईचारे के साथ ही एक दूसरे के धर्मों और उनकी इच्छाओं और पूजा के तरीकों का पूर्ण सम्मान करता है। सदियों से यही परंपरा चली आ रही है कि हम मुस्लिमों के साथ ईद और वह हमारे साथ होली मनाते चले आ रहे हैं इसलिए पवित्र रमजान और होली साथ साथ है। इसलिए हमें रंग डालते समय ध्यान रखना चाहिए कि उससे किसी को कष्ट ना हो। इसी भावना और प्रेम भरे आग्रह के साथ सभी नागरिकों को होली की बधाई और शुभकामनाएं देते हुए खुशहाली की कामना करते हैं।
    (प्रस्तुतिः- रवि कुमार बिश्नोई संपादक दैनिक केसर खुशबू टाइम्स मेरठ)

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