होली का त्योहार लगभग आ ही चुका है और इसके हुड़दंग में कुछ लोग कितनी गंदगी मचाते हैं वह भी किसी से छुपा नहीं है कई जगहों पर तो आने जाने वाले लोगों पर नाली की कीचड़ और गंदगी से युक्त खाली बोरी या टाट फेंककर बदतमीजी की जाती है यह पता होने के बावजूद भी शहर में जहां देखों वहां ज्यादातर इलाकों में पहले तो नाले नालियो की सफाई ही नहीं होती अगर कहीं हो भी गयी तो समय रहते गंदगी जो उनसे निकलती है उसे उठाने की व्यवस्था नहीं हो पाती ऐसा शहर के नागरिकों का स्पष्ट रूप से कहना है और इस बात को जगह सड़ते नाले नालियों और कुछ में सफाई हुई तो उनसे निकली गंदगी को देखा जा सकता है। मजे की बात यह है कि नागरिकों के अनुसार यदि कहीं से गंदगी उठाई भी गयी तो उसके बाद भी हाथों हाथ सफाई न होने के चलते या तो वह पुनः नालियों में चली जाती है अथवा आने जाने वालों के फेंफड़ों में हवा के साथ पहुंचती है या सड़क पर फैलकर दुर्घटनाओं का कारण बनती है।
रमजान माह चल रहा है एक वर्ग के पवित्र रोजे रख रहे हैं तो दूसरे होली की तैयारी में लगे हैं ऐसे मंे कुछ शांति प्रिय नागरिक प्रशासन से मिलकर या शांति समितियों की बैठकों में सफाई और सुरक्षा का मुद्दा जोरशोर से उठा रहे हैं लेकिन भारी बजट होने और माननीय मुख्यमंत्री जी के स्पष्ट निर्देश स्वच्छता कायम की जाये पर्यावरण प्रदूषण ना फैले नागरिकों को साफ सुथरा माहौल उपलब्ध हो के बाद भी बडे बड़े दावे करने वाले इससे संबंधित विभाग के लोग आज तक तो अपने क्षेत्र के नागरिकों को स्वच्छता के माहौल में सांस लेने का मौका उपलब्ध करा रहे है अगर ऐसा ही रहा तो होली पर सभ्य नागरिक किसी भी रूप में ना तो खुद होली खेलने का लुत्फ उठायेंगे और ना ही अपने बच्चों को जाने देंगे क्योंकि वर्तमान समय में निचली और मलिन बस्तियां ही नहीं शहर के प्रमुख पॉश ईलाकों जैन नगर आदि के साथ ही महानगर को जोड़ने वाले ज्यादातर मार्गों पर अतिथियों का स्वागत सड़क के दोनों ओर फैली गंदगी ही करते हुए स्पष्ट अहसास करा रही है कि इसके लिए जिम्मेदार कुछ नहीं कर पा रहे हैं सरकार के नियमों और नीतियों के तहत।
प्रस्तुतिः- अंकित बिश्नोई मजीठियां बोर्ड यूपी के पूर्व सदस्य सोशल मीडिया एसोसिएशन एसएमए के राष्ट्रीय महामंत्री, संपादक व पत्रकार


