लखनऊ, 26 फरवरी। राजधानी एक ऐतिहासिक आध्यात्मिक आयोजन का साक्षी बनने जा रहा है। योगी, आध्यात्मिक गुरु और ईशा फाउंडेशन के संस्थापक सद्गुरु पहली बार एक मार्च को मान्यवर कांशीराम स्मृति उपवन में भव्य महा-सत्संग का संचालन करेंगे। इस विशेष सत्संग में आठ हजार से अधिक साधकों के शामिल होने की उम्मीद है। यह विशेष कार्यक्रम उन साधकों के लिए है जिन्होंने इनर इंजीनियरिंग कार्यक्रम को सफलतापूर्वक पूरा करने के साथ शांभवी महामुद्रा क्रिया में दीक्षा प्राप्त की है। इसे प्रदेश में सद्गुरु के साथ होने वाले सबसे बड़े आध्यात्मिक आयोजनों में गिना जा रहा है।
इस विशाल सत्संग की तैयारियां कई महीनों से चल रही हैं। ईशा फाउंडेशन के स्वयंसेवक और साधक पूरे समर्पण के साथ व्यवस्था में जुटे हैं। कार्यक्रम से पूर्व ‘शांभवी महामुद्रा दीक्षा’ के कई सत्र हुए ताकि ज्यादा लोग इस आध्यात्मिक अवसर का लाभ उठा सकें। शाम 5 बजे से 8 बजे तक चलने वाले इस सत्संग में सद्गुरु ध्यान, आंतरिक शांति और आत्म-विकास के गहरे आयामों पर मार्गदर्शन देंगे। आयोजकों के अनुसार, बड़ी संख्या में लोग लखनऊ पहुंच रहे हैं।
सद्गुरु की ओर से विकसित इनर इंजीनियरिंग कार्यक्रम जीवन को संतुलित और जागरूक ढंग से जीने की योगिक विधा है। इसमें सरल अभ्यासों और जीवन-दृष्टि के जरिये शारीरिक स्वास्थ्य, मानसिक स्पष्टता और भावनात्मक स्थिरता को सुदृढ़ करने पर बल दिया जाता है। इसका मुख्य अभ्यास 21 मिनट की शांभवी महामुद्रा क्रिया है जिसे शरीर, मन और ऊर्जा प्रणाली में सामंजस्य स्थापित करने का प्रभावी माध्यम माना जाता है। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर हुए अध्ययनों में इससे तनाव, चिंता और अवसाद में कमी जैसे सकारात्मक परिणाम सामने आए हैं।
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