एक तरफ इलाहाबाद हाईकोर्ट ने निर्णय दिया कि अंतर धार्मिक लिव इन में रहने वालों को भी संरक्षण का अधिकार है। यह आदेश दर्जनों जोड़ों की याचिका पर एक साथ दिया गया। देश के यशस्वी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत तथा यूपी के सीएम योगी आदित्यनाथ आदि के कटटरवादिता के विरोध होने के बावजूद सांपद्रायिक सौहार्द और भाईचारे को मजबूत करने के साथ ही कह रहे हैं कि जो यहां रह रहा है वो सब भारतीय है। सांप्रदायिक सौहार्द में विश्वास रखने वाले हिंदू मुस्लिमों की एकता के भी प्रयास हो रहे हैं। ऐसे मेें धर्म पूछकर सब्जी विक्रेता को पीटना और मुस्लिम महिला को दिया गया कंबल छीन लेना कैसे सही कहा जा सकता है। क्येांकि ऐसा तो कोई भी नहीं सोच रहा। लेकिन राजस्थान के टॉंक के पूर्व भाजपा सांसद सुखबीर सिंह जौनपुरिया ने सीताराम जी मंदिर में कंबल बांटते समय निवाई क्षेत्र के करेड़ा बुजुर्ग बांगर गांव में महिला सकुरान खान से यह कहते हुए दिया गया कंबल वापस ले लिया गया कि जो मोदी को गाली देगा उसे कंबल क्यों दूं। उन्होंने कहा कि यह सरकार का नहीं मेरा कार्यक्रम है। मैं जिसे चाहूं कंबल बांटूं या नहीं इसमें बहस की जरुरत नहीं है। सवाल यह उठता है कि उस समय महिला ना तो सरकार को कोस रही थी ना मोदी के बारे में कुछ कह रही थी। तो फिर पूर्व सांसद ने ऐसा क्यों किया जबकि पार्टी हाईकमान मुस्लिमों को भी प्रतिनिधित्व दे रहा है। और जितनी सुविधाएं सरकार की हैं उनका लाभ सभी धर्मों के लोगों को दिया जा रहा है। ऐसे में सुखबीर सिंह जौनपुरिया तथा यूपी के मेरठ में कस्बा किठौर के सादुल्लापुर गांव में में सब्जी विक्रेता अब्दुल बासिद अली से नाम पूछकर मारपीट की गई और उसका सब्जी का ठेला नाले में गिरा दिया। जिसकी रिपोर्ट उसने थाने में लिखाई है। मुझे लगता है कि भाजपा हाईकमान और प्रमुख नेताओं को पार्टी की नीति के खिलाफ जो यह कार्य किए जा रहे हैं इन पर रोक लगानी चाहिए। क्योंकि निष्पक्ष रूप से सबको समान समझ रही सरकार और भाजपा आरएसएस की नीतियों को नजरअंदाज कर कुछ लोगों द्वारा बदनाम करने की कोशिश पर रोक लगाई जाए और मेरा मानना है कि सुखबीर सिंह जौनपुरिया और धर्म पूछकर सब्जी विक्रेता को पीटने वालों के खिलाफ कार्रवाई होनी चाहिए। पार्टी में भी इन्हें दूर रखा जाए क्योंकि जो यह कार्रवाई हुई वो किसी भी पार्टी की नीति का हिस्सा नहीं कही जा सकती। और ना ही सर्वधर्म सदभाव की भावना को बढ़ावा देने वाले देश में इसे उचित कहा जा सकता है।
(प्रस्तुतिः- रवि कुमार बिश्नोई संपादक दैनिक केसर खुशबू टाइम्स मेरठ)
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