प्रयागराज, 24 फरवरी। इलाहाबाद हाईकोर्ट ने शादी का झूठा वादा कर एक महिला के साथ शारीरिक संबंध बनाने के आरोपी व्यक्ति के खिलाफ चल रही आपराधिक कार्यवाही और चार्जशीट को रद्द करने से इनकार कर दिया है। कोर्ट ने टिप्पणी की कि यदि आरोपी पहले से ही शादीशुदा है, तो शादी का वादा शुरुआत से ही कपटपूर्ण माना जाएगा। यह आदेश न्यायमूर्ति अवनीश सक्सेना ने विपिन कुमार और तीन की याचिका खारिज करते हुए दिया है।
याचियों के खिलाफ सहारनपुर के देवबंद स्थित अपर मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट की अदालत में मुकदमा लंबित है। मामले के तथ्यों के अनुसार पीड़िता ने 22 मई 2025 को विपिन कुमार, उसकी पत्नी, बहन और जीजा के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराई थी। पीड़िता का आरोप था कि 2018 में फेसबुक से वह विपिन के संपर्क में आई थी, जिसने शादी का झांसा देकर उसके साथ लगातार यौन संबंध बनाए। एफआईआर के अनुसार पीड़िता पांच बार गर्भवती हुई, जिनमें चार बार उसे गर्भपात के लिए मजबूर किया गया। बयान दर्ज कराते समय वह छह महीने की गर्भवती थी और बाद में उसने एक बच्ची को जन्म दिया।
पीड़िता ने यह भी आरोप लगाया कि आरोपी ने उसकी आपत्तिजनक तस्वीरें और वीडियो बनाए थे, जिनका इस्तेमाल वह उसे ब्लैकमेल करने के लिए करता था। अन्य आरोपियों पर पीड़िता के परिवार को डराने-धमकाने और समझौते के लिए दबाव बनाने का आरोप लगाया गया।
याचियों की ओर से तर्क दिया गया कि संबंध आपसी सहमति से बना था और इसमें किसी कपटपूर्ण तरीके का इस्तेमाल नहीं किया गया। यह भी कहा गया कि पीड़िता शिक्षित है और उसे पता था कि आरोपी शादीशुदा है क्योंकि वह 2016 में उसकी शादी में शामिल हुई थी।
लंबे संबंध के बाद शादी का वादा पूरा न करना अपराध नहीं
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने एक आदेश में कहा है कि पढ़े-लिखे दो बालिगों के बीच लंबे समय तक कायम शारीरिक संबंध, शादी का वादा पूरा न करने का अपराध नहीं है। ऐसे में आपराधिक केस जारी रखना कानूनी प्रक्रिया का दुरुपयोग है। यह आदेश न्यायमूर्ति अवनीश सक्सेना ने बस्ती कोतवाली के श्याम बहादुर यादव की याचिका को स्वीकार करते हुए दिया है। कोर्ट ने याची के खिलाफ आपराधिक मुकदमे की कार्यवाही, चार्जशीट व सम्मन आदेश रद्द कर दिया है। अधिवक्ता आदित्य गुप्ता व वरिष्ठ अधिवक्ता ने बहस की। कोर्ट ने कहा कि स्वीकृत तथ्य है कि पीड़िता व आरोपी दोनों 2016 से एक-दूसरे को जानते हैं। 2019 से शादी के वादे पर शारीरिक संबंध बनाए। संबंध 2019 से 2025 तक संबंध कायम रहा। 2020 में दो बार गर्भपात भी कराया गया। कोर्ट ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि लंबे समय तक शारीरिक संबंध कायम रखा है तो अवधारणा सहमति की होगी।

