ठाणे 23 फरवरी। महाराष्ट्र के ठाणे जिले में पुलिस ने अंडाणु दान से जुड़े रैकेट का भंडाफोड़ किया है, जिसमें करोड़ों रुपये की धोखाधड़ी की आशंका जताई जा रही है। पीड़ितों को हर मासिक चक्र के लिए 25 हजार से 30 हजार रुपये तक का लालच दिया जाता था और उन्हें बार-बार अंडाणु दान के लिए इस्तेमाल किया जाता था, जिससे उनका शारीरिक शोषण होता था। इस मामले में तीन महिलाओं को गिरफ्तार किया गया है. यह रैकेट बदलापुर पूर्व के जोवेली इलाके में एक आवासीय अपार्टमेंट और सोनोग्राफी सेंटर से संचालित हो रहा था. गिरफ्तार आरोपियों की पहचान सुलक्षणा गाडेकर(44), अश्विनी चाबुकस्वर (29) और मंजुषा वानखेड़े (46) के रूप में हुई है.
अधिकारियों के अनुसार, महिलाओं को आईवीएफ (इन विट्रो फर्टिलाइजेशन) केंद्रों में ले जाया जाता था, जहां सर्जरी के जरिये अंडाणु निकाले जाते थे और बाद में उन्हें लाखों रुपये में बेचा जाता था। आशंका है कि अब तक करीब 20 महिलाएं इस रैकेट की शिकार बनी हैं।
पुलिस के अनुसार एक पीड़िता ने ठाणे की उप-जिला अस्पताल की मुख्य चिकित्सा अधिकारी डा. ज्योत्स्ना सावंत को इस मामले की सूचना दी थी। इसके बाद हाल ही में सुलक्षणा के नैनो सिटी बिल्डिंग स्थित आवास पर छापेमारी की गई। आरोपितों के मोबाइल फोन से सोनोग्राफी रिपोर्ट, गर्भधारण में इस्तेमाल किए जाने वाले इंजेक्शनों की तस्वीरें, फर्जी नामों से बनाए गए हलफनामे, नकली दस्तावेज और वित्तीय लेन-देन के साक्ष्य बरामद किए गए हैं।
उल्हासनगर के पुलिस उपायुक्त सचिन गोरे ने बताया कि 20 से अधिक महिलाएं इस रैकेट का शिकार हो सकती हैं। आईवीएफ केंद्रों, डाक्टरों और अस्पतालों की संलिप्तता की जांच कर रहे हैं। इस मामले में कई बड़े नामों के सामने आने की संभावना है। सहायक प्रजनन प्रौद्योगिकी कानून और भारतीय न्याय संहिता के तहत मामला दर्ज किया गया है।
उल्हासनगर के डीसीपी सचिन गोरे ने बताया कि आरोपियों द्वारा गरीब महिलाओं को प्रति चक्र 25,000 से 30,000 रुपये दिए जाते थे. उन्हें हार्मोनल इंजेक्शन देकर अंडाणु उत्पादन बढ़ाया जाता और बाद में आईवीएफ केंद्रों में सर्जरी के जरिए अंडाणु निकालकर लाखों रुपये में बेचा जाता था.
पुलिस अब आईवीएफ केंद्रों, डॉक्टरों और अस्पतालों की संभावित संलिप्तता की जांच कर रही है. इस मामले में भारतीय न्याय संहिता और सहायक प्रजनन प्रौद्योगिकी (रेगुलेशन) अधिनियम के तहत केस दर्ज किया गया है. गिरफ्तार आरोपियों को स्थानीय अदालत में पेश किया गया, जहां से उन्हें पुलिस हिरासत में भेज दिया गया.

