इंदौर, 23 फरवरी। मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव ने रविवार को घोषणा की कि धार्मिक पर्यटन को बढ़ावा देकर अर्थव्यवस्था को गति प्रदान करने के लिए राज्य के विश्वविद्यालयों में मंदिर प्रबंधन को विषय के तौर पर पढ़ाया जाएगा।
यादव ने इंदौर में संवाददाताओं से कहा कि हमने मंदिर प्रबंधन विषय पर अकादमिक पाठ्यक्रम संचालित करने का निर्णय किया है। उन्होंने बताया कि इन पाठ्यक्रमों में धार्मिक पर्यटन के साथ ही मंदिरों की वित्तीय व प्रशासनिक व्यवस्था, सुरक्षा आदि की पढ़ाई कराई जाएगी। यादव ने बताया कि इस सिलसिले में उज्जैन के सम्राट विक्रमादित्य विश्वविद्यालय ने पहल करते हुए मंदिर प्रबंधन विषय पर डिप्लोमा और स्नातकोत्तर पाठ्यक्रम पेश किए हैं, जिनके जरिये विद्यार्थियों को विद्वानों के जरिये सैद्धांतिक और व्यवहारिक प्रशिक्षण दिया जाएगा। मुख्यमंत्री ने कहा कि मंदिर हमेशा से हमारे लिए आस्था, श्रद्धा और विश्वास के केंद्र रहे हैं। हम कोशिश कर रहे हैं कि मंदिरों के उचित प्रबंधन के जरिये किस तरह अर्थव्यवस्था को गति दी जा सकती है।
13 तीर्थस्थलों पर धार्मिक गलियारे बनेंगे
यादव ने कहा कि उज्जैन के ‘श्री महाकाल महालोक’ की तर्ज पर राज्य के 13 तीर्थस्थलों पर धार्मिक गलियारे बनाए जा रहे हैं। राज्य सरकार ने ‘श्री महाकाल महालोक’ परिसर से फाइबर की मूर्तियां हटाकर वहां पत्थरों और धातुओं की प्रतिमाएं लगाने का फैसला किया है। मुख्यमंत्री ने बताया कि देश की प्राचीन स्थापत्य कला पर आधारित ये प्रतिमाएं उज्जैन में ही गढ़ी जा रही हैं। इससे स्थानीय लोगों को भी रोजगार मिल रहा है।
सीएम ने कहा- साल 2022 में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की यात्रा के बाद उज्जैन धार्मिक पर्यटन का केंद्र बन गया है। अब मध्य प्रदेश में महाकाल लोक की तर्ज पर ओंकारेश्वर, मैहर की माताजी, राजाराम लोक ओरछा और सलकनपुर जैसे धार्मिक स्थलों को भी विकसित किया जा रहा है। सीएम ने कहा कि, मंदिर हमेशा से आस्था और श्रद्धा के केंद्र रहे हैं, लेकिन उनसे जुड़े वित्तीय और प्रबंधन पक्ष भी रोजगार सृजन में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं, इसीलिए मंदिर प्रबंधन के कोर्स शुरू करके मंदिरों की वित्तीय व्यवस्था, प्रशासन, सुरक्षा, धार्मिक अनुष्ठान, कला और ललित कला को प्रोत्साहन दिया जाएगा।

