पिछले कुछ सालों से बच्चों से लेकर बड़ों तक मोटा मुनाफा कमाने का सपना दिखाकर उन्हें आत्महत्या और परिवार को आर्थिक रूप से बर्बाद करने का जो मार्ग विभिन्न गेमों के माध्यम से कभी टीवी पर क्रिकेटरों व अभिनेताओं द्वारा दिखाया जा रहा है उससे अब कोई भी अनभिज्ञ नहीं है। अभी पिछले दिनों गेमिंग के चक्कर में कोरियन बैंड की दीवानी तीन छात्राओं ने आत्महत्या कर ली और एक खबर अनुसार मन कक्ष में आ रहे चौकाने वाले मामले भी सामने आए हैं। छोटे बच्चे इसका शिकार हो रहे हैं। चार साल के बालक की काउंसिलिंग के दौरान मोबाइल की लत और गेमिंग का चक्सा चौंकाने वाला मिला। मेरठ के खैनगर कीं गूलर वाली गली निवासी प्रॉपटी डीलर फारूक के २२ साल के इकलौते बेटे मोहम्मद कैफ के दिमाग की नस पबजी खेलते समय फट गई। इससे पता चलता है कि इसमें कोई एक उम्र व जाति के लोग नहीं जिसको इसका चस्का लगा वो इसे छोड़ने को तैयार नहीं होता। हम जमाने भर की बातों पर रोक लगाने के दावों और घोषणाओं की बात कर रहे हैँ लेकिन इन गेमिंग संचालकों पर लगाम क्यों नहीं लगाई जा रही है। इस पर शोध हो जो पता चलेगा कि हजारों लोग अपनी जान से हाथ धो बैंठे हैं और लाखों करोड़ों लोग इसकी ओर आकर्षित हो रहे हैं। अब देश में छोटे बच्चों के लिए शहरों में गेमिंग पार्क या क्लब शुरु किए जा रहे हैं जिनमें बार जैसी सुविधाएं भी उपलब्ध कराई जा रही है। कोई भी व्यक्ति अंदाजा लगा सकता है कि जहां एक साथ बार और गेमिंग की सुविधा हो और दारु के नाम पर तरल पदार्थ पिलाए जा रहे हो ऐसे में हमारे बच्चों का भविष्य क्या होगा इस बारे में सोचने की आवश्यकता गेमिंग या जुआ खेलने वालों की संभावानाओं की सोचने वालों को इन गेमिंग व्यवस्थाओं से बच्चों को थोड़ा दूर रखने के लिए नीति बनानी होगी वरना या कोरियन बैंड या पबजी जैसे घातक खेल परिवार से अपनों को दूर करने की जो श्रृंखला शुरु हुई है वो बढ़ती ही जाएगी। मेरा मानना है कि इन्हें प्रोत्साहन देने वाला खिलाड़ी हो या अभिनेता उसके साथ ही अपनी तिजोरिया भरने वाले जो बच्चों को खेलों के नाम पर बढ़ावा देने के नाम पर बार और गेमिंग की व्यवस्था देने में आगे बढ़ रहे हैं सरकार को उन पर लगाने के साथ सरकार को ऐसी नीति बनानी होगी जिससे यह कहीं खुल ही ना पाए। खबरों के अनुसार इनकी आड़ में क्या क्या हो सकता है यह किसी को बताने की जरुरत नहीं है। मान्य प्रधानमंत्री को इस मामले में शीघ्र निर्णय लेकर लगानी चाहिए।
(प्रस्तुतिः- रवि कुमार बिश्नोई संपादक दैनिक केसर खुशबू टाइम्स मेरठ)
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