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    Home»न्यूज़»1.08 लाख लोगों को क्यों नहीं ढूंढ पाए हाईकोर्ट ने एसीएस गृह और डीजीपी से पूछा
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    1.08 लाख लोगों को क्यों नहीं ढूंढ पाए हाईकोर्ट ने एसीएस गृह और डीजीपी से पूछा

    websitemarketing2019@gmail.comBy websitemarketing2019@gmail.comFebruary 6, 2026No Comments2 Views
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    लखनऊ, 06 फरवरी। उत्तर प्रदेश में कानून व्यवस्था और नागरिकों की सुरक्षा पर एक बार फिर गंभीर सवाल उठे हैं। इलाहाबाद हाई कोर्ट ने राज्य में लापता लोगों के बढ़ते मामलों और पुलिस की धीमी कार्यशैली पर कड़ा रुख अपनाया है। हाल ही में सुनवाई के दौरान, कोर्ट ने खुलासा किया कि बीते दो सालों (2024-2026) में प्रदेश से एक लाख से ज़्यादा लोग गुमशुदा हुए हैं, लेकिन इनमें से 90 प्रतिशत से अधिक मामलों में पुलिस ने कोई ठोस कार्रवाई नहीं की है। अदालत ने इसे ‘सिस्टम की बड़ी विफलता’ करार दिया है।
    इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ खंडपीठ ने प्रदेश में गुमशुदा व्यक्तियों के संबंध में दर्ज स्वतः संज्ञान याचिका पर गत दिवस सुनवाई की। न्यायालय ने राज्य सरकार के संबंधित विभागों से सभी आंकड़े और रिकॉर्ड तलब किए हैं।
    मामले की अगली सुनवाई 23 मार्च को तय की गई है। कोर्ट ने अपर मुख्य सचिव गृह और पुलिस महानिदेशक को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से सुनवाई के समय उपस्थित रहने का आदेश दिया है।यह आदेश न्यायमूर्ति राजन राय और न्यायमूर्ति एके चौधरी की खंडपीठ ने पारित किया।
    यह पूरा मामला लखनऊ निवासी विक्रमा प्रसाद की याचिका से सामने आया, जिनका 32 वर्षीय बेटा जुलाई 2024 से लापता है। उनके मामले में पुलिस ने 17 महीने बाद जाकर एफआईआर दर्ज की, जिसके बाद परिवार को हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाना पड़ा। कोर्ट द्वारा गृह विभाग के अपर मुख्य सचिव से हलफनामा मांगे जाने पर चौंकाने वाले आंकड़े सामने आए।
    सरकारी आंकड़ों के अनुसार, 1 जनवरी 2024 से 18 जनवरी 2026 तक उत्तर प्रदेश में कुल 1,08,300 लोग लापता हुए। इनमें से लगभग 9,700 मामलों में ही तलाश या कार्रवाई दर्ज की गई। यानी, प्रतिदिन औसतन 150 से अधिक लापता शिकायतें दर्ज हो रही हैं, लेकिन बाकी मामलों में कोई प्रगति नहीं हुई।
    न्यायमूर्ति अब्दुल मुईन और न्यायमूर्ति बबीता रानी की बेंच ने इस स्थिति पर गहरी चिंता व्यक्त की। कोर्ट ने टिप्पणी करते हुए कहा कि देरी के कारण कई बार अहम सीसीटीवी फुटेज और अन्य सबूत मिट जाते हैं, जिससे जांच असंभव हो जाती है। मामले की गंभीरता को देखते हुए हाई कोर्ट ने इस मुद्दे पर स्वतः संज्ञान लिया और इसे जनहित याचिका के रूप में दर्ज कर लिया है।
    लापता मामलों की यह समस्या केवल उत्तर प्रदेश तक सीमित नहीं है। विशेषज्ञों के अनुसार, महिलाएं और बच्चे सबसे ज्यादा प्रभावित होते हैं, जिन्हें मानव तस्करी और शोषण का खतरा होता है। राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में भी स्थिति चिंताजनक है, जहां जनवरी 2026 के पहले 15 दिनों में 807 लोग लापता हुए, जिनमें 509 महिलाएं और लड़कियां थीं। दोनों राज्यों में त्वरित कार्रवाई और कमजोर निगरानी व्यवस्था एक बड़ी चुनौती बनी हुई है।
    न्यायिक हस्तक्षेप के बाद प्रशासन से निम्नलिखित सुधारों की उम्मीद की जा रही हैरू- लापता होने की शिकायत पर तुरंत एफआईआर दर्ज करना शुरुआती 24 घंटों में अहम सीसीटीवी फुटेज की जांच करना। विशेष लापता सेल का गठन।तकनीकी डेटाबेस और सोशल मीडिया अलर्ट सिस्टम को मजबूत करना।

    Court Order lucknow tazza khabar tazza khabar in hindi Uttar Pradesh
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