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    Home»देश»एसआईआर फार्म की जांच से पैन और आधार कार्ड को क्यों रखा गया अलग, ऑन लाइन सुनवाई होती तो अच्छा था, बुजुर्ग नागरिक और महिलाओं की जांच बीएलओ को घर भेज!
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    एसआईआर फार्म की जांच से पैन और आधार कार्ड को क्यों रखा गया अलग, ऑन लाइन सुनवाई होती तो अच्छा था, बुजुर्ग नागरिक और महिलाओं की जांच बीएलओ को घर भेज!

    adminBy adminFebruary 4, 2026No Comments10 Views
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    फर्जी मतदाताओं की छटाई आदि मुद्दों को लेकर जब से एसआईआर पर काम शुरू हुआ है तब से ही इसको लेकर अलग अलग दावे होते और विवाद खड़े हो रहे हैं। उप्र के पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव सपा प्रमुख का कहना है कि भाजपा एक करोड़ वोट काटने की साजिश में जुटी है। एआईएस बीएलओ को धमका रहा हैं। सपा मुखिया ने कहा कि अब तक जमा सभी सात फार्म रद्द किए जाए तो भाजपा प्रदेश अध्यक्ष पंकज चौधरी कह रहे कि एसआईआर की प्रक्रिया चुनाव आयोग करवा रहा है। सपा अध्यक्ष को कोई दिक्कत है तो चुनाव आयोग जाए। तो उप्र के मुख्य निर्वाचन अधिकारी नवदीप रिणवा का कथन है कि पारदर्शी ढंग से सुनवाई के बाद ही कटेंगे नाम। यूपी में 1.15 लाख में से दलों ने सिर्फ भरे 234 फार्म 7 इस मुद्दे को लेकर शुरू से ही आरोप प्रतिआरोप होते रहे है लेकिन एसआईआर का कार्य बिना रूके चल रहा है। और अब लगभग पूरा होने की ओर ही सक्रिय है। सही मायनों में देखें तो इस मुद्दे को लेकर किसी को विशेष परेशानी नहीं है। मगर इस पूरे प्रकरण में कुछ विशेष बात जो उभरकर आ रही है और नागरिकों को चुभ भी रही है।
    पैन और आधार कार्ड को क्यों रखा गया अलग
    अगर ध्यान से देखें तो हर व्यक्ति को आधार कार्ड बनवाने के लिए प्रेरित किया जा रहा है तो पैन कार्ड का भी महत्व उभरकर आया है। मगर ताज्जुब की बात है कि बैंक लोन लेना हो तो आधार कार्ड चाहिए और कोई सरकारी काम कराना है तो उसमें भी पैन कार्ड और आधार कार्ड चाहिए। तो फिर सवाल यह उठता है कि एसआईआर फार्म भरने की जो प्रक्रिया है उससे आधार और पैन कार्ड को उससे अलग क्यों रखा गया जबकि यही सबसे ज्यादा प्रचलन में सरकारी कार्यों में काम आ रहे इसलिए हर आदमी पर मौजूद भी रहते है लेकिन जो पत्रवाली मांगी जा रही है उन्हें जुटाने में प्रयास करना पड़ रहा है।
    ऑन लाइन क्यों नहीं कराया गया यह काम
    एक तरफ हम एआई का सहारा कई मामलों में ले रहे है तो कुछ महत्वपूर्ण मुद्दो पर ऐप जानकारी भी प्राप्त की जा रही है और उपयोग हो रहा है अपने देश में। बताते है कि 2030 तक एआई वीडियो का बाजार 903 अरब डालर तक पहुंच जाएगा तो फिर एसआईआर में नई तकनीकि और एआई का सहारा लेकर जो जानकारियां मांगी जा रही है उन्हें ऑन लाइन क्यों नहीं मांगा गया और नई तकनीकि का उपयोग इस मामले में क्यों नहीं किया जा रहा यह नागरिकों में विशेष चर्चा का विषय हैं।
    सुनवाई के लिए बढ़ेंगे सुनवाई केन्द्र
    जनपद मेरठ में तीन विधान सभा क्षेत्रों के एसआईआर नोटिसों की सुनवाई तहसील मेरठ में शुरू हुई थी। और इसके कारण बुजुर्ग मतदाताओं आदि को जो परेशानियां हो रही थी उन्हें ध्यान में रखते हुए मेरठ के जिला निर्वाचन अधिकारी द्वारा कहा गया कि एसआईआर नोटिसों की सुनवाई के लिए बढ़ेंगे सुनवाई केन्द्र। सुनवाई का यह कार्य 20 फरवरी तक पूरा किया जाएगा। अंतिम मतदाता सूची 6 मार्च को प्रकाशित होगी।
    सीनियर सिटीजन को क्यों नहीं दी जा रही सुविधा
    सरकार द्वारा अपने सरकारी विभागों से संबंध हर काम में सीनियर सिटीजन और महिलाओं की सुविधा के लिए अलग से व्यवस्था की जाती है तो फिर एसआईआर नोटिसों की सुनवाई बुजुर्ग और महिला मतदाताओं के घर भेजकर बीएलओ आदि से क्यों नहीं कराई जा रही इस विषय को लेकर हर वर्ग के नागरिकों में चर्चा है। इनका मानना है कि वरिष्ठ नागरिक और महिलाओं के लिए बीएलओ को घर भेजकर सुनवाई कराई जाए।
    27 फरवरी तक सभी बूथों पर 2 घंटे मौजूद रहेंगे बीएलओ
    प्रदेश के मुख्य निर्वाचन अधिकारी नवदीप रिणवा के हवाले से छपी एक खबर के अनुसार मतदाता सूची के विशेष पुनरीक्षण के लिए 27 फरवरी तक सभी बूथों पर सुबह 10 से दोपहर 12 बजे तक मौजूद रहेंगे बीएलओ। इनके पास फार्म 6,7,8 के साथ ही काटे गये नामों की सूची के साथ ही वर्ष 2003 के मतदाताओं की सूची उपलब्ध रहेगी।
    मतदाता सूची और आपत्ति दावों के लिए बचे तीन दिन
    प्रदेश के मुख्य निर्वाचन अधिकारी नवदीप रिणवा के अनुसार प्रदेश में मतदाता सूची पुनरीक्षण एसआईआर अभियान के तहत दावे व आपत्तियों के लिए 6 फरवरी तक का समय है। जिनके फार्म 6 फरवरी तक जमा हो जाएंगे उन्हीं के नाम सूची में जुड़ पाएंगे।
    अगर नई तकनीकि आधार और पैन कार्ड का उपयोग होता तो नागरिक बच सकते थे कई समस्याओं से। बीएलओ पर जो काम का दबाव बढ़ा उससे भी मिलता छूटकारा।
    (प्रस्तुतिः- अंकित बिश्नोई राष्ट्रीय महामंत्री सोशल मीडिया एसोसिएशन एसएमए व पूर्व सदस्य मजीठिया बोर्ड यूपी संपादक पत्रकार)

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