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    Home»देश»एक ही मोबाइल के आधार पर 22 पासपोर्ट जारी करने वालों को दी जाए समय से पूर्व सेवानिव़ृति
    देश

    एक ही मोबाइल के आधार पर 22 पासपोर्ट जारी करने वालों को दी जाए समय से पूर्व सेवानिव़ृति

    adminBy adminFebruary 2, 2026No Comments14 Views
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    आम आदमी को एक पासपोर्ट बनवाने में ही नानी याद आ जाती है। अगर कहीं थोड़ी गलती रह जाए तो सुधार कराने में जेब खाली हो जाती है और जूते घिस जाते हैं लेकिन मिलीभगत से गलत पासपोर्ट बनने की बात कोई नई नहीं है। मीडिया में इस बारे में खबरें मिल ही जाती हैं। नया मामला गाजियाबाद के मोदीनगर के ब्लॉक भोजपुर में एक ही मोबाइल नंबर के आधार पर २२ पासपोर्ट जारी कर दिए गए। मामला खुलने पर अब पुलिस ने २५ लोगों के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज की है। इलाके के पोस्टमेन और एक महिला को गिरफ्तार कर पूछताछ की जा रही है। अब दिल्ली स्थित क्षेत्रीय पासपोर्ट कार्यालय से भेजी गई जांच के बाद डीसीपी सुरेंद्रनाथ तिवारी का कहना है कि ११ दिसंबर को २०२५ को पासपोर्ट कार्यालय ने भोजपुर थाने को पत्र भेजकर इस मामले में सूचित किया था और पतों की जांच की बात कही थी। ११ दिसंबर को अब लगभग दो माह होने जा रहे हैं। इतने दिनों तक थाना पुलिस क्या कर रही थी यह सोचने का विषय है। मेरा मानना है कि प्रकरण में शामिल जांच करने वाले पुलिस अधिकारी सुनवाई करने वाले पासपोर्ट अफसर और दलालों के खिलाफ सरकार कुछ ऐसा करे जो भविष्य में इस प्रकार से पासपोर्ट किसी का जारी ना हो पाए क्योंकि कई मामले सुनने को मिलते हैं और कार्रवाई की बात कही जाती हे लेकिन कर्मचारी यूनियन का दबाव, दोषियों की मजबूत पकड़ और उनके आकाओं के प्रभाव के चलते ऐसे लोगों के बच जाने से इस प्रकार की घटनाओं को बढ़ावा मिल रहा है। मैं सरकारी कर्मियों का विरोधी नहीं हूं लेकिन आम आदमी १६ घंटे मेहनत कर दो वक्त की रोटी नहीं जुटा पा रहा ऐसे में मोटी तनख्वाह और सुविधा लेने वाले अफसरों की बैंक बैलेंस जुटाने की भूख पीएम मोदी के भ्रष्टाचार समाप्त करने के लाख प्रयासों के बाद भी बढ़ती जा रही है जिसे रोका जाना जरुरी है लेकिन जो नजर आ रहा है ज्यादातर मामलों में खानापूर्ति के बाद फाइलें बंद कर दी जाती हैं। इस भ्रष्टाचार से उत्पन्न होने वाले ऐसे मामलों को तभी रोका जा सकता है जब दोषियों को समय से पूर्व सेवानिवृति देकर उन पर मुकदमे चलाकर जेल भेजा जाए और सरकारी नुकसान की भरपाई इनकी निजी संपत्ति से हो तभी कुछ हो सकता है। वरना तो खबरें पढ़कर चर्चा करते रहेंगे, होने वाला कुछ नहीं है।
    (प्रस्तुतिः- रवि कुमार बिश्नोई संपादक दैनिक केसर खुशबू टाइम्स मेरठ)

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