लखनऊ 24 जनवरी। उत्तर प्रदेश के स्थापना दिवस (UP Diwas 2026) के पावन अवसर पर प्रदेश की योगी सरकार उन अनमोल रत्नों को सम्मानित करने जा रही है, जिन्होंने अपनी प्रतिभा से न केवल उत्तर प्रदेश बल्कि पूरे विश्व में भारत का मस्तक ऊँचा किया है। लखनऊ के नवनिर्मित राष्ट्र प्रेरणा स्थल पर आयोजित होने वाले तीन दिवसीय उत्सव के पहले दिन केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह इन विभूतियों को ‘उत्तर प्रदेश गौरव सम्मान 2025-26’ से अलंकृत करेंगे। ये सम्मान अंतरिक्ष विज्ञान, शिक्षा, साहित्य, महिला सशक्तिकरण और कृषि जैसे अलग-अलग क्षेत्रों में उल्लेखनीय योगदान देने वालों को दिया जाएगा।
शुभांशु शुक्ला: गौरव सम्मान 2025-26 से सम्मानित होने वाली विभूतियों में राजधानी लखनऊ निवासी अंतरिक्षयात्री एवं भारतीय वायुसेना के विंग कमांडर शुभांशु शुक्ला शामिल हैं। शुभांशु शुक्ला ने 26 जून 2025 को नासा के कैनेडी स्पेस सेंटर से स्पेसएक्स के ड्रैगन अंतरिक्ष यान द्वारा प्रक्षेपण के बाद अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन (आईएसएस) पर पहुंचकर इतिहास रचा। वे आईएसएस पर कदम रखने वाले पहले भारतीय अंतरिक्षयात्री बने।
डॉ. हरिओम पंवार: बुलंदशहर के छोटे से गांव बुटना में जन्मे और मेरठ महाविद्यालय में विधि के प्रोफेसर रहे डॉ. हरिओम पंवार आज किसी परिचय के मोहताज नहीं हैं। उन्होंने अपनी कविताओं के जरिए सोते हुए समाज को जगाने का काम किया है।
‘काला धन’, ‘घाटी के दिल की धड़कन’ और ‘बागी हैं हम’ जैसी उनकी रचनाएं युवाओं में राष्ट्रवाद का संचार करती हैं। डॉ. पंवार केवल मंचों के कवि नहीं हैं, बल्कि वे अपनी कविताओं से होने वाली आय को निर्धन बच्चों की शिक्षा और वंचितों के उत्थान में लगाते हैं। उन्हें पूर्व में निराला और रश्मि जैसे प्रतिष्ठित पुरस्कारों से भी नवाजा जा चुका है।
अलख पांडेय: प्रयागराज के अलख पांडेय को शिक्षा के क्षेत्र में क्रांतिकारी योगदान के लिए यूपी गौरव सम्मान दिया जाएगा। ‘फिजिक्स वाला’ के जरिए उन्होंने देश के करोड़ों छात्रों तक सस्ती और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा पहुंचाई। यूट्यूब से शुरू हुआ उनका सफर आज भारत की अग्रणी एडटेक कंपनियों में शामिल है। उनकी पहल ने प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे छात्रों के लिए शिक्षा को अधिक समावेशी बनाया।
रश्मि आर्य: मेरठ की रश्मि आर्य को महिला सशक्तिकरण के क्षेत्र में उनके कार्यों के लिए यूपी गौरव सम्मान मिलेगा। उन्होंने 2007 में श्रीमद् दयानंद आर्य कन्या गुरुकुल की स्थापना कर वैदिक परंपरा और आधुनिक शिक्षा का अनूठा संगम तैयार किया। आज यह गुरुकुल सैकड़ों जरूरतमंद बच्चियों को निःशुल्क शिक्षा देकर उन्हें आत्मनिर्भर बना रहा है। उनका गुरुकुल वैदिक संस्कृति और आधुनिक शिक्षा का सुंदर समन्वय है। यहां संस्कृत, वैदिक शिक्षा, हवन, संगीत के साथ-साथ इंग्लिश स्पीकिंग और कंप्यूटर शिक्षा भी दी जाती है।
डॉ. सुधांशु सिंह: वाराणसी निवासी कृषि वैज्ञानिक डॉ. सुधांशु सिंह को कृषि अनुसंधान में अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान बनाने के लिए सम्मानित किया जाएगा। फ्लड-टॉलरेंट सब-1 चावल पर उनके शोध ने जलभराव से प्रभावित किसानों के लिए नई राह खोली है। वे विश्व बैंक, बीएमजीएफ और यूएसएआईडी जैसी संस्थाओं के साथ जुड़े अंतरराष्ट्रीय प्रोजेक्ट्स का नेतृत्व कर चुके हैं।

