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    Home»देश»कदम से कदम बढ़ाए जा, तुम मुझे खून दो मैं तुम्हे आजादी दूंगा के प्रणेता सुभाष चंद्र बोस के पराक्रम दिवस पर उन्हें कोटि कोटि प्रणाम
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    कदम से कदम बढ़ाए जा, तुम मुझे खून दो मैं तुम्हे आजादी दूंगा के प्रणेता सुभाष चंद्र बोस के पराक्रम दिवस पर उन्हें कोटि कोटि प्रणाम

    adminBy adminJanuary 23, 2026No Comments4 Views
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    देश ने आज युवाओं में देशभक्ति की प्रेरणा और जोश भरने में सक्षम सुभाष चंद्र बोस के प्रेरणास्त्रोत संस्मरणों को याद कर हर नागरिक जहां देशभक्ति की बात होती है एक झंडे के नीचे आकर खड़ा हो जाता है। नेताजी की १२९वीं जयंती देशभर में पराक्रम दिवस के रूप में मनाई जा रही है। नेताजी के तराने कदम से कदम बढ़ाए जा खुशी के गीत गाए जा जिंदगी है कौम की तू कौम पर लुटाए जा। यह गीत हम सम्मान के साथ गाते हैं। नेताजी के संघर्ष को याद कर देश के प्रति समर्पण की भावना आज भी हम सब में परिपूर्ण है। नेताजी की लोकप्रियता मद्रास रेजीडेंसी मलाया और सिंगापुर में रहने वाले तमिल समुदाय में भी चरम पर रही। गुरू रविंद्रनाथ टैगोर ने सुभाषचंद्र बोस को देशनायक करार देते हुए कहा था कि कठिन समय में देश को ऐसे वीर नेता की आवश्यकता होती है जो चुनौतियों से ऊपर उठकर काम करे। नेताजी उन दुर्लभ विभूतियों में से थे जिनमें बौद्धिक गहराई निडर कर्म का अदभुत मेल था। वह अपने लक्ष्य की प्राप्ति के लिए सबकुछ बलिदान करने के लिए तैयार रहते थे। उन्होंने जीवन के सारे सुख त्यागने के साथ एक सम्मानित सेवा को भी त्याग कर राष्ट्रहित में अपना काम करना शुरु किया। उसी का परिणाम है कि आज हम सब उनके पराक्रम दिवस पर तुम मुझे खून दो मैं तुम्हे आजादी दूंगा के नारे को गुंजायमान कर रहे हैं। इतिहासकारों का मानना है कि १९३७ में नेताजी सुभाषचंद्र बोस नोबेल पुरस्कार के लिए नामित हुए थे। आजाद ङ्क्षहद फौज के संस्थापक नेताजी सुभाषचंद्र बोस ने महिला सैनिकों के साथ रानी झांसी रेजीमेंट के साथ ४० मील की पैदल यात्रा की थी जो उनके नेतृत्व और दृष्टिकोण को दर्शाती है। स्वतंत्रता संग्राम और ऐतिहासिक जनपद मेरठ के घंटाघर को नेताजी सुभाषचंद्र बोस के नाम से ही जाना जाता है। उनका जीवन त्याग और राष्ट्रभक्ति का प्रतीक रहा। उन्होंने कुछ वैचारिक मतभेद होने पर कांग्रेस का राष्ट्रीय अध्यक्ष पद त्यागकर अपनी स्वतंत्रता की लड़ाई लड़ी। आज उनकी जयंती पर देशवासियों के साथ हम भी उनके साहस का सम्मान और देश की आजादी के लिए उनके समर्पण को प्रणाम करते है। कुछ स्थानों पर बारिश के चलते नेताजी सुभाषचंद्र बोस की जयंती पर मनाए जाने वाले पराक्रम दिवस व प्रभात फेरियों में व्यवधान से तो इनकार नहीं किया जा सकता लेकिन लोगों ने देशभक्ति की भावना से यह दिवस मनाया। हमें विश्वास है कि नेताजी सुभाषचंद्र बोस ने आजादी और समर्पण की जो लौ जलाई थी वो देश के यशस्वी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी के मार्गदर्शन में उसी प्रकार जलती रहेगी और युवाओं सहित नागरिकों में उनकी वीरता हमें आगे बढ़ने का संदेश देती रहेगी।
    (प्रस्तुतिः- रवि कुमार बिश्नोई संपादक दैनिक केसर खुशबू टाइम्स मेरठ)

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