मदुरै (तमिलनाडु),22 जनवरी। मद्रास हाई कोर्ट की मदुरै बेंच ने हाल ही में कहा कि लिव-इन रिलेशनशिप में रहने वाली महिलाओं को उनकी सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए, गंधर्व विवाह की पुरानी अवधारणा के तहत पत्नी का दर्जा दिया जाना चाहिए।
इस मुद्दे के महत्व को देखते हुए, न्यायमूर्ति एस. श्रीमाथी ने कहा कि आधुनिक सामाजिक ढांचे के तहत कमजोर महिलाओं की सुरक्षा करना अदालतों की जिम्मेदारी है, क्योंकि लिव-इन रिलेशनशिप में विवाहित महिलाओं को मिलने वाली कानूनी सुरक्षा का अभाव होता है। पीठ ने यह टिप्पणी तमिलनाडु के तिरुचिरापल्ली जिले के मनप्पराई महिला पुलिस स्टेशन द्वारा गिरफ्तार एक व्यक्ति की अग्रिम जमानत याचिका खारिज करते हुए कीं। मदुरै पीठ ने कहा कि लिव-इन रिलेशनशिप में, महिलाओं को गंधर्व विवाह/प्रेम विवाह के तहत ‘पत्नी’ का दर्जा देकर संरक्षित किया जाना चाहिए, ताकि लिव-इन रिलेशनशिप में रहने वाली महिलाओं को, भले ही वह संबंध अस्थिर हो, पत्नी के रूप में अधिकार प्रदान किए जा सकें।
तमिलनाडु के मनप्पराई महिला पुलिस स्टेशन ने एक महिला के साथ लिव-इन रिलेशनशिप में रह रहे एक व्यक्ति को गिरफ्तार किया। अभियोजन पक्ष के अनुसार, आरोपी ने शादी का वादा करके कई बार महिला से शारीरिक संबंध बनाए, लेकिन बाद में उसने कथित तौर पर अपना वादा तोड़ दिया। आरोपी ने अग्रिम जमानत के लिए अपील की। अर्जी खारिज करते हुए, अदालत ने आरोपी के खिलाफ बीएनएस की धारा 69 के तहत प्रथम दृष्टया मामला दर्ज किया, जो विवाह के धोखे या झूठे वादों पर आधारित यौन संबंधों को आपराधिक अपराध मानता है। न्यायमूर्ति एस श्रीमाथी ने कहा कि आधुनिकता को अपनाने के नाम पर पुरुष अक्सर इस कानूनी अस्पष्टता का फायदा उठाते हैं, लेकिन समय के साथ जब उनका रिश्ता खराब हो जाता है तो वे महिला के चरित्र पर सवाल उठाते हैं।
जज बोले, विवाहितों की तरह सुरक्षा नहीं
जज ने कहा कि कई युवतियां आधुनिक जीवनशैली अपनाने की चाह में ऐसे रिश्तों में बंध जाती हैं, लेकिन बाद में उन्हें निराशा ही हाथ लगती है क्योंकि कानून लिव-इन रिलेशनशिप में रहने वाली महिलाओं को विवाहित महिलाओं की तरह सुरक्षा प्रदान नहीं करता।

