बड़ौत (बागपत), 16 जनवरी। पूर्व सैनिक हरपाल सिंह को 55 साल बाद पेंशन मिलेगी। 1973 से पहले के रक्षाकर्मियों के लिए आर्ल्ड फोर्सेस ट्रिब्यूनल क्षेत्रीय पीठ, लखनऊ ने पूर्व सैनिक को इनवैलिड पेंशन ( अयोग्यता / चिकित्सीय आधार पर पेंशन) देने के आदेश जारी किए हैं। ट्रिब्यूनल ने यह भी स्पष्ट किया कि आदेश के अनुपालन में देरी होने पर संबंधित विभाग को आठ प्रतिशत वार्षिक ब्याज के साथ भुगतान करना होगा। ट्रिब्यूनल ने आदेश दिया कि पूर्व सैनिक को मूल आवेदन दायर करने की तिथि से पूर्व के तीन वर्षों की अवधि के लिए पेंशन का भुगतान किया जाए। उन्होंने बताया कि उन्हें 2020 से पेंशन मिलेगी।
वादी के अधिवक्ता सेवानिवृत्त विंग कमांडर पुष्पेंद्र कुमार ढाका ने बताया कि हरपाल सिंह की प्रारंभिक भर्ती 13 अक्टूबर 1960 में हुई थी। 10 अप्रैल 1963 को रिक्रूट के रूप में शामिल किया गया। सात मार्च 1970 को लो मेडिकल कैटेगरी में पाए जाने पर सेवा के लिए अयोग्य घोषित करते भी भेजा, लेकिन कोई जवाब नहीं हुए सेना से इनवैलिड आउट कर मिला। इसी बीच केंद्र सरकार व संबंधित विभागों ने दलील दी कि दिया गया। 2023 में उन्होंने ट्रिब्यूनल में अपील की। अधिवक्ता ने बताया कि चिकित्सा कारणों से सेवा से हटाए जाने के बावजूद हरपाल सिंह को डिसएबिलिटी इनवैलिड पेंशन नहीं दी गई। उन्होंने इस संबंध में छह जून 2022 को प्रतिनिधित्व (रिप्रेजेंटेशन) आवेदक ने 10 वर्ष की न्यूनतम पात्र सेवा पूरी नहीं की है, इसलिए वह इनवैलिड पेंशन का हकदार नहीं है। सरकार ने यह भी कहा कि गैर- पेंशनधारी मामलों में निर्धारित अवधि पूरी होने के बाद सेवा रिकार्ड नष्ट कर दिए जाते हैं, इसलिए आवश्यक दस्तावेज उपलब्ध नहीं हैं। उन्होंने पक्ष में सुप्रीम कोर्ट के कई फैसलों का हवाला भी दिया। तीन साल की सुनवाई के बाद ट्रिब्यूनल ने उनके पक्ष में फैसला सुनाया।
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