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    Home»देश»‘ससुर की संपत्ति से भरण पोषण की हकदार है विधवा’: सुप्रीम कोर्ट
    देश

    ‘ससुर की संपत्ति से भरण पोषण की हकदार है विधवा’: सुप्रीम कोर्ट

    adminBy adminJanuary 14, 2026No Comments6 Views
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    नई दिल्ली 14 जनवरी। सुप्रीम कोर्ट ने एक महत्वपूर्ण फैसले में कहा कि ससुर की मौत होने के बाद, यदि बहू भी विधवा हो जाती है, तो वह वह हिंदू कानून के तहत उनकी (ससुर) संपत्ति से भरण-पोषण का दावा करने की हकदार है। शीर्ष अदालत ने कहा कि यह मायने नहीं रखता है कि बेटे (पति) की मौत पिता (ससुर) से पहले हुई हो या बाद में।

    जस्टिस पंकज मिथल और जस्टिस एस.वी.एन. भट्टी की पीठ ने हाईकोर्ट के फैसले के खिलाफ अपील का निपटारा करते हुए फैसला दिया। दरअसल, दिसंबर 2021 में एक व्यक्ति (ससुर) की मौत हो गई। उनकी मौत के बाद मार्च 2023 में उनके एक बेटे की मौत हो गई। महिला ने हिंदू दत्तक ग्रहण और भरण-पोषण अधिनियम के तहत ससुर की संपत्ति से मांग की। हालांकि परिवार अदालत ने विधवा बहू की याचिका को इस आधार पर खारिज कर दिया था कि वह अपने ससुर की मृत्यु के समय विधवा नहीं थीं। हालांकि, हाईकोर्ट ने इस मामले में विधवा बहू के हक में फैसला दिया और परिवार अदालत को महिला (विधवा बहू) आश्रित के रूप में योग्य मानते हुए योग्यता के आधार पर भरण-पोषण की राशि तय करने का निर्देश दिया।

    जस्टिस पंकज मित्तल और एस.वी.एन. भट्टी की बेंच ने कहा कि हिंदू दत्तक और भरण-पोषण अधिनियम, 1956 की धारा 22 के तहत किसी भी मृतक की संपत्ति से उसके आश्रितों का भरण-पोषण करना होगा। इसमें मृतक के वारिसों की यह जिम्मेदारी बनती है कि वे मरने वाले की संपत्ति से उसके आश्रितों का ख्याल रखें। इस धारा के तहत विधवा बहू भी आती है।

    शीर्ष कोर्ट ने यह भी साफ किया कि अगर किसी बेटे की मौत हो जाती है, तो उसके पिता (यानी ससुर) की यह नैतिक और कानूनी जिम्मेदारी है कि वह अपनी विधवा बहू का भरण-पोषण करे। यह तभी लागू होगा जब बहू अपनी कमाई से अपना गुजारा नहीं कर पा रही हो। एक्ट में ऐसा कोई नियम नहीं है जो ससुर की इस जिम्मेदारी को खत्म कर दे, चाहे बहू उसके मरने से पहले विधवा हुई हो या बाद में।

    सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि अगर हम इस कानून की छोटी या तकनीकी बातों में उलझकर विधवा बहू को गुजारा भत्ता देने से मना कर देंगे, तो वह बहुत मुश्किल में पड़ जाएगी और समाज में अकेली रह जाएगी। शीर्ष अदालत ने मनुस्मृति का भी हवाला दिया। इसमें कहा गया है कि किसी भी मां, पिता, पत्नी या बेटे को अकेला नहीं छोड़ा जाना चाहिए। ऐसा करने वाले को जुर्माना भरना चाहिए।

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