सरकार द्वारा शहरों के विकास जरूरतमंदों को आवास उपलब्ध कराने आदि के लिए किए जा रहे प्रयासों को लागू कराने और इन कार्यों से संबंध विभागों में पारदर्शिता और ईमानदारी लाने के लिए प्रयासरत विधानपरिषद की समीक्षा समिति द्वारा गत दिवस विकास भवन में मेडा नगर निगम के अधिकारियों संग बैठक में दिए गए निर्देशों का पालन अगर अधिकारी ईमानदारी से करे तो कहा जा सकता है कि समिति के सभापति कुंवर महाराज सिंह और बैठक में मौजूद अन्य सदस्यों पूर्व मंत्री अशोक कटारिया, विजय बहादुर पाठक, डॉ जयपाल सिंह, धर्मेंद्र भारद्वाज, अश्विनी त्यागी, शाहनवाज खान, पवन सिंह चौहान की मंशा के तहत कार्य करें तो फिर देश में रामराज की स्थापना और पीएम मोदी व यूपी के सीएम योगी आदित्यनाथ की भावनाओं की व्यवस्था बनते देर नहीं लगेगी। बताते चलें कि लगभग पांच घंटे तक चली बैठक में जहां दूषित पानी और अवैध निर्माणों पर काबू ना पाने के लिए अफसरों को फटकार लगाई गई वहीं विकास कार्यों में भ्रष्टाचार पर नाराजगी जताते हुए सदस्य अशोक कटारिया ने तय समय में कार्यों को पूरा करने की बात कही तो अवैध कॉलोनियेां और व्यावसायिक निर्माणों पर जुर्माना लगाने की बात भी कही गई। आज इससे संबंध खबरों को पढ़कर लगा कि अगर समिति समीक्षा से पूर्व थोड़ी जानकारी अपने सूत्रों से कर अथवा पत्रकारों से वार्ता कर लिया करें तो अवैध निर्माण कच्ची कॉलोनियों का विकास और सरकारी जमीन घेरकर बेचने वालों की कार्यप्रणाली वो समझ सकते हैं। इसके अलावा मेडा आवास विकास व नगर निगम के अधिकारियों द्वारा मुख्यमंत्री पोर्टल पर जो सरकारी जमीन घेरे जाने कच्ची कॉलोनिया काटे जाने और रिहायशी भूमि पर कॉमर्शियल निर्माण तथा रजवाहे घेरकर किए गए होटलों के निर्माण की शिकायतें होती रही है उनका किस प्रकार से ऐसा करने वालों से मिलीभगत कर फर्जी निस्तारण और अवैध निर्माणकर्ताओं को बचाने के जो अथक प्रयास इन विभागों के अधिकारियों द्वारा किए जा रहे हैं उनका खुलासा आसानी से हो सकता था।
मेरा मानना है कि विधानपरिषद की समिति के सदस्य पिछले दो साल में प्राधिकरण आवास विकास व नगर निगम के अधिकारियों ने जो निस्तारण किए हैं उससे पता चल सकता है कि यह किस प्रकार सरकारी निर्माण नीति के विरूद्ध जाकर अवैध निर्माण और कच्ची कॉलोनियों व सरकारी जमीन घेरने वालों को बचाने में लगे हैं। सभापति कुंवर महाराज सिंह और सदस्य अशोक कटारिया, विजय बहादुर पाठक, डॉ जयपाल सिंह, धर्मेंद्र भारद्वाज, अश्विनी त्यागी, शाहनवाज खान, पवन चौहान से आग्रह है कि अगर वो बैठक में लिए गए निर्णय लागू करवाना चाहते हैं तो शास्त्रीनगर सेंट्रल मार्केट में आवास विकास के अधिकारियों की मिलीभगत से आवासीय भूमि पर बने जैना ज्वैलर्स, गढ़ रोड पर सरकार की निर्माण नीति के विपरीत बनाए गए हल्दीराम शोरूम, रूड़की रोड पर पल्लवपुरम फैस वन में तरूण गुप्ता द्वारा रिहायशी प्लॉट पर बनाई गई दुकानें तथा परतापुर बाईपास पर रजवाहे की जमीन दाबकर अवैध रूप से खोले गए होटल वर फारर की जांच करा लें तो इन विभागों के अधिकारियों की कार्यप्रणाली पूरी तौर पर साफ हो सकती है और यह सरकारी राजस्व की चोरी और सरकार की निर्माण नीति की कैसे धज्जियां उड़ा रहे हैं इसका पता चल सकता है। दोषियों पर अगर कार्रवाई की गई तो वो इस समिति की बहुत बड़ी कार्रवाई सरकार और समाजहित में हो सकती है। मेरा मानना है कि सरकारी नीतियों का उल्लंघन करने वालों को भूमाफिया चिन्हित कर कार्रवाई की जाए तो सबकुछ ठीक हो सकता है।
(प्रस्तुतिः- रवि कुमार बिश्नोई संपादक दैनिक केसर खुशबू टाइम्स मेरठ)
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