बागपत, 31 दिसंबर। किसान मसीहा पूर्व प्रधानमंत्री स्व. चौधरी चरण सिंह की भले ही जन्मभूमि हापुड़ और कर्मभूमि बागपत रही हो, मगर उनका देश का सबसे बड़ा स्मारक राजस्थान के सीकर में बनेगा। इस स्मारक को कांग्रेस, भाजपा के नेताओं के साथ ही सेवानिवृत्त आईएएस, सेवानिवृत्त आईपीएस समेत अन्य लोग मिलकर बनाएंगे। इसके लिए इन सभी के अलावा अन्य लोगों ने एक करोड़ रुपये से ज्यादा जुटा लिए हैं और स्मारक का कार्य जल्द शुरू होगा।
राजस्थान के किसान नेता कुंभाराम आर्य की पुण्यतिथि पर 26 अक्तूबर को सीकर में कांग्रेस के पूर्व प्रदेशाध्यक्ष व पूर्व मंत्री चौधरी नारायण सिंह ने बैठक बुलवाई थी। इस बैठक में भारत रत्न चौधरी चरण सिंह स्मृति संस्थान के नाम से समिति बनाई गई। इसमें चौधरी नारायण सिंह अध्यक्ष बनाए गए और भाजपा के राज्यसभा सांसद घनश्याम तिवाड़ी को उपाध्यक्ष बनाया गया। इनके अलावा दयाराम महरिया को सचिव, सीए प्रहलाद झूरिया कोषाध्यक्ष बनाए गए। इसमें सेवानिवृत्त आईएएस आरएस जाखड़, सेवानिवृत्त आईपीएस रामदेव खैरखा भी हैं।
वहां निर्णय लिया गया कि जयपुर से बीकानेर और झुंझुनू जाने वाली सड़क के तिराहे पर भारत रत्न चौधरी चरण सिंह की प्रतिमा लगवाई जाए और उनका स्मारक बनवाया जाए। इस प्रस्ताव पर सभी ने मुहर लगाई और इसके लिए कार्य शुरू हो गया।
सचिव दयाराम महरिया ने बताया कि इसके लिए अभी तक एक करोड़ दस लाख रुपये पदाधिकारियों व अन्य नेताओं ने दिए हैं। यहां जल्द ही स्मारक के लिए कार्य शुरू कराया जाएगा।
1300 वर्ग मीटर में बनेगा स्मारक, पंच धातु की प्रतिमा लगेगी
सचिव दयाराम महरिया ने बताया कि यह स्मारक 1300 वर्ग मीटर में बनाया जाएगा। इसमें चौधरी चरण सिंह की पंच धातु की 42 फुट की प्रतिमा लगाई जाएगी। स्मारकर में चौधरी चरण सिंह से जुड़ी जानकारी दर्ज कराई जाएंगी। इसके अलावा वहां लाइटिंग, फव्वारे, ग्रीन एरिया आदि भी रहेगा।
-चरण सिंह के साथी रहे चौधरी नारायण सिंह
कांग्रेस के पूर्व प्रदेशाध्यक्ष व पूर्व मंत्री चौधरी नारायण सिंह की उम्र 93 वर्ष हो चुकी है। उन्होंने बताया कि वह चौधरी चरण सिंह से कई बार मिले हैं। वह केवल उत्तर प्रदेश नहीं, बल्कि पूरे देश के किसानों व मजदूरों के मसीहा थे। उनके स्मारक जगह-जगह बनने चाहिएं।
-बागपत में भी बनना चाहिए स्मारक
रालोद के राष्ट्रीय महासचिव सुखवीर सिंह गठीना कहते हैं कि राजस्थान की तरह यहां भी चौधरी चरण सिंह का स्मारक बनना चाहिए। इसके लिए स्थानीय नेताओं को पहल करनी चाहिए। इस मांग के लिए नेताओं व अधिकारियों को पत्र दिया जाएगा।

