लखनऊ. प्रदेश में फ्लू को लेकर स्वास्थ्य विभाग अलर्ट है। बुखार के मरीजों के लिए अलग से काउंटर बनाने, भर्ती के लिए वार्ड तैयार रखने और दवाओं के पुख्ता इंतजाम रखने के निर्देश दिए गए हैं। प्रदेश में अब तक इंफ्लुएंजा ए (एच1एन1) यानी स्वाइन फ्लू के 551 मरीज मिले हैं।
प्रदेश में मौसमी फ्लू और स्वाइन फ्लू के मरीज 57 जिलों में मिले हैं। इसकी चपेट में ज्यादातर एनसीआर क्षेत्र के जिले हैं। अब तक मिले कुल मरीजों में 50 फीसदी तीन जिलों में हैं। इसमें गौतमबुद्ध नगर में 189, मेरठ में 54, गाजियाबाद में 32 केस हैं। इसी तरह मुजफ्फरनगर में 11 और बुलंदशहर में 10 केस मिले हैं। लखनऊ में 113 केस सामने आए हैं। हालांकि यहां अधिक केस होने की मूल वजह विभिन्न जिलों से रेफर होकर मरीजों का आना बताया जा रहा है।
शनिवार सुबह उप मुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक ने अपर मुख्य सचिव सहित सभी विभागीय अधिकारियों, चिकित्सा संस्थानों एवं अस्पतालों के अधीक्षकों व सीएमओ के साथ बैठक की। पूरी स्थिति की समीक्षा की। निर्देश दिया कि सभी मरीजों को निशुल्क उपचार एंव जांच की व्यवस्था दी जाए। बुखार के मरीजों के लिए अलग से काउंटर बनाया जाए। उन्होंने कहा कि अस्पतालों में ओसेल्टामिविर (टैमीफ्लू), ऑक्सीजन, नेबुलाइजर, ऑक्सीजन मास्क और ब्रोंकोडायलेटर्स सहित अन्य चीजों का पर्याप्त स्टॉक रखा जाए। यदि मरीजों की संख्या बढ़ती है तो डॉक्टर और अन्य कर्मियों का ड्यूटी का समय बढ़ा दिया जाए। चिकित्सा संस्थानों एवं मेडिकल कॉलेजों के प्रधानाचार्यों को निर्देश दिया कि आरटीपीसीआर जांच के लिए पर्याप्त किट की व्यवस्था रखी जाए। निजी मेडिकल कॉलेजों को भी व्यवस्था रखने का निर्देश दिया जाए।
बुखार वाले मरीजों के लिए अलग से चलेगी ओपीडी
फ्लू के मरीजों को राहत देने के लिए की गई तैयारी की समीक्षा करते हुए उप मुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक ने निर्देश दिया कि बुखार वाले मरीजों के लिए पंजीयन, उपचार के लिए ओपीडी और भर्ती करने के लिए अलग से वार्ड बनाया जाए।
बैठक में अपर मुख्य सचिव अमित कुमार घोष ने बताया कि इंफ्लुएंजा ए (एच1एन1) मरीजों को चार श्रेणी में बांट कर इलाज की व्यवस्था बनाई गई है। इसमें गंभीर मरीजों को ए, अन्य को बी1, बी2 और सी वर्ग में बांट कर उपचार किया जा रहा है। ऐसे में उप मुख्यमंत्री ने हर जिले के अधीक्षक से अब तक की गई तैयारी की जानकारी ली।

