नई दिल्ली/कैलिफोर्निया, 29 अगस्त (ता)। जंगली जानवर सिर्फ सड़कों, इमारतों और शहरों जैसे बुनियादी ढांचे से ही प्रभावित नहीं होते, बल्कि इंसानों की उपस्थिति मात्र से भी उनके व्यवहार और रहने के ठिकाने में बदलाव आता है। कैलिफोर्निया विश्वविद्यालय स्मिथसोनियन इंस्टीट्यूट और येल विश्वविद्यालय के वैज्ञानिकों द्वारा किए गए नए अध्ययन में यह दावा किया गया है।
इस रिसर्च की सबसे खास बात इसका अनोखा तरीका है। वैज्ञानिकों ने 37 विभिन्न प्रजातियों के 4581 जानवरों और पक्षियों के जीपीएस डाटा का मिलान इंसानों के मोबाइल लोकेशन डाटा से किया। कोविड महामारी के दौरान 2019 और 2020 के लॉकडाउन ने वैज्ञानिकों को अवसर दिया। इससे वे यह समझ पाए कि जब इंसानी आवाजाही अचानक रुकी, तो जानवरों ने अपनी गतिविधियों को कैसे बदला। यह पहला मौका है जब वन्यजीव अध्ययन के लिए मोबाइल लोकेशन डाटा का इतने बड़े पैमाने पर उपयोग किया गया। इस सहयोग में 600 साझेदार शामिल थे और इंसानी गतिविधियों का जंगली जानवरों पर असर समझने के लिए लगभग 13000 जानवरों के 1 अरब लोकेशन रिकॉर्ड इकट्ठा किए गए।
शोध के अनुसार, लगभग 57% प्रजातियां इंसानों के बनाए बुनियादी ढांचे और इंसानी मौजूदगी, दोनों से संयुक्त रूप से प्रभावित हुईं। स्तनधारियों की 67% और पक्षियों की 68% प्रजातियों ने इंसानी आहट मिलते ही अपने इलाके बदल लिए।हालांकि, हर जानवर ने इस पर एक जैसा बर्ताव नहीं किया। शोध के अनुसार इंसानों की मौजूदगी ही जानवरों के चलने-फिरने और रहने की जगह को बदल दे रही है।
Trending
- केदारनाथ धाम में अन्नकूट पर्व श्रद्धा व उल्लास से मनाया
- ऑटो-टैक्सी चालकों का प्रतिनिधिमंडल मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस से मिला, मिली राहत
- निशांत रेजीडेंसी होटल के संचालक गिरफ्तार, दोनों युवकों को भी भेजा जेल
- शिक्षक दिवस पर पांच सितम्बर को सोशल मीडिया एसोसिएशन एसएमए करेगी शिक्षकों का सम्मान
- वन्यजीव इंसानों की आहट से ही रास्ता बदल रहे
- सीजीएसटी अफसर रिश्वत लेने के आरोप में गिरफ्तार
- रक्षाबंधन के अवसर पर 60 प्लस की महिलाओं को मुफ्त सफर
- एसएसपी ने की पैदल गश्त, बच्चों ने बांधी राखी व्यापारियों व भाजपाइयों ने किया स्वागत

