
मेरठ, २२ जुलाई (प्र)। चौधरी चरण सिंह विश्वविद्यालय के 38वें दीक्षांत समारोह में राज्यपाल एवं कुलाधिपति आनंदीबेन पटेल पहुंचीं। उन्होंने 199 मेधावी विद्यार्थियों को स्वर्ण पदक दिए और उनके बेहतर भविष्य के लिए शुभकामनाएं दीं।समारोह में 92,332 विद्यार्थियों को उपाधियां और 199 मेधावियों को स्वर्ण पदक प्रदान किए गए। इनमें 49,156 छात्राएं (53.24श्) और 43,176 छात्र (46.76श्) शामिल हैं।
राज्यपाल आनंदीबेन पटेल ने युवाओं से नौकरी खोजने के बजाय रोजगार देने वाला बनने का आह्वान किया। उन्होंने कौशल, नवाचार और अनुसंधान पर जोर दिया। उन्होंने कहा- मैंने लगभग 15 यूनिवर्सिटी के हॉस्टलों को देखा है। वहां बाहर शराब की बोतलें पड़ीं मिलीं। हॉस्टल में बाहर से जो खाना आ रहा है। उसमें ड्रग्स आ रहा है। मैंने हॉस्टल प्रबंधन और कुलपति को फोटो तक दिखाए हैं। हम तो 4 पीढ़ी से चाय नहीं पी रहे और आप ड्रग्स के आदी हो गए। छोड़िए इसे। नशा करना कभी भी समस्या का समाधान नहीं हो सकता है। नशा धीरे-धीरे व्यक्ति के सपनों, प्रतिभा, स्वास्थ और परिवार की आशाओं को नष्ट कर देता है।
उन्होंने कहा कि किसी भी देश का भविष्य उसकी सीमाओं में नहीं बल्कि कक्षाओं में लिखा जाता है। किसी भी देश की वास्तविक शक्ति उसके शस्त्रागारों में नहीं है। उसके विवि की प्रयोगशाला में जन्म लेती है।
किसी राष्ट्र की सबसे पड़ी संपदा उसके खनिज भंडार में नहीं है। बल्कि उसकी युवा प्रतिभा, उसकी जिज्ञासा, उसकी ज्ञान पिपासा में होती है। हमारी प्रतिभा हमारे घरों में बैठी है। हमारी क्लासों में बैठी है। हम रिसर्च में सबसे पीछे हैं। रिसर्च ही नहीं होता है। हम आगे नहीं बढ़ पा रहे हैं। राज्यपाल ने कहा कि युवा नशे की गिरफ्त में है। उनके परिवार के सपने टूट रहे।
राज्यपाल ने कहा कि आज के युवा को नहीं पता है। उसे क्या करना है। कोई एक झंडा लेकर निकल पड़ता है, दूसरा उसे पकड़ लेता है। इसलिए हमें पता होना चाहिए कि जो हम कर रहे हैं वह देश हित में है या अहित में है। इसलिए बच्चों को उन महापुरुषों के बारे में जरूर बताएं, जिनके नाम से विश्वविद्यालय का नाम रखा गया है।
आज यहां 75 प्रतिशत बेटियों और 25 प्रतिशत छात्रों को मेडल मिले हैं। जरा सोचिए, हम बेटों के पीछे भागते हैं। 3 बेटियां पैदा हो गईं तो परिवार में हाहाकार मच गया। इतनी होनहार बेटियां हैं। आप भरोसा तो कीजिए। आपके परिवार का नाम उज्जवल करेंगी। बेटा हो या बेटी हो। सामान रूप से उनके चरित्र का निर्माण होना चाहिए। डी.लिट की डिग्री ऐसे लोगों को मिलनी चाहिए, जो पढ़े लिखे तो नहीं हैं, लेकिन उन्हें कला में महारत हासिल है। आज गांव में महिलाएं लोगों को आत्मनिर्भर बना रही हैं। ऐसी महिलाओं और पुरुषों को डी.लिट की डिग्री मिलनी चाहिए।
राज्यपाल ने कहा कि आपका चरित्र आपका भविष्य का निर्माण बनाती है। नशे से दूर रहें। युवा नशे से ग्रस्त है। वो क्या देश की सेवा करेंगे? मुझे दुख होता है। आपके घर में पिता नशा करता है। आपका फ्रेंड नशा करता है तो उसे बंद कराइए। घर में अभियान चलाइए। बोलिए कि जब तक आप लोग नशा नहीं छोडते तब तक मैं खाना नहीं खाऊंगा।
जो माता-पिता बरसात में खेत में काम करता है। मेहनत करता है। वह सोचता है कि उसका बेटा हॉस्टल में पढ़ रहा है, लेकिन उन्हें नहीं पता कि उनका बेटा नशे की गिरफ्त में आ चुका है। नशा करना कभी भी समस्या का समाधान नहीं हो सकता है। नशा धीरे-धीरे व्यक्ति के सपनों, प्रतिभा, स्वास्थ और परिवार की आशाओं को नष्ट कर देता है।
राज्यपाल ने कहा कि आजकल मैं ट्रेन से सफर कर रही हूं। ताकि रेलवे ट्रैक के किनारे साफ-सफाई की व्यवस्था आदि देख सकूं। मैं ट्रेन से कानपुर गई। मैंने देखा कि रेलवे ट्रैक पर पानी भरा हुआ था। गंदगी थी। मैंने वीडियो-फोटो लिए। फिर मैंने रेलवे के अफसरों को दिखाकर पूछा कि ये क्या है? फिर अफसरों ने साफ-सफाई की। फिर मैंने नगर निगम के अफसरों से कहा कि ये पानी कहां से आ रहा है। अगली बार आऊंगी तो मुझे बताइएगा। देश की पहली हाइड्रोजन ट्रेन बनी है। उसे आप जैसे ही युवाओं ने बनाई है। उसका डिजाइन बनाया। ऐसे ही हमें बनाना है। आगे बढ़ना है। विश्वविद्यालयों में स्पेस से जुड़े सिलेबस होने चाहिए। गगनयान के जरिए मानव आसमान में जा रहा है। 3 लोगों को अंतरिक्ष में भेजने की योजना है।आसमान से बिजली कैसे गिरती है। मानव को उससे कैसे बचाना है? समुद्र में लहरें कैसे आती हैं? जिससे कि जहाज डूब जाता है। इस पर इसरो काम कर रहा है। इसमें भी आप जैसी युवा शक्ति है। डीआरडीओ ने लड़ाकू विमान बना दिए। ऐसे 225 विमान बन रहे हैं। आप जैसे युवा ही बना रहे हैं।
राज्यपाल ने बताया कि केंद्र सरकार ने 15 हजार माध्यमिक विद्यालयों में चलचित्र निर्माण, दृश्य प्रभाव, खेल निर्माण और चित्रकथा से जुड़े आधुनिक प्रशिक्षण केंद्र विकसित करने का लक्ष्य रखा है। उन्होंने विश्वविद्यालयों और शिक्षण संस्थानों से ऐसे कार्यक्रमों में सक्रिय भागीदारी करने का आह्वान किया।
उन्होंने कहा कि वर्ष 2030 तक इस क्षेत्र में लगभग 20 लाख पेशेवरों के लिए रोजगार के अवसर सृजित करने का लक्ष्य है। ऐसे में विद्यार्थियों को भविष्य की जरूरतों के अनुसार नए कौशल सीखने होंगे।
आनंदीबेन पटेल ने बताया कि शिक्षा को रोजगार और उद्योग से जोड़ने के उद्देश्य से श्शिक्षा से रोजगार और उद्यम्य विषय पर उच्चस्तरीय समिति का गठन किया गया है। इसका उद्देश्य विद्यार्थियों को पढ़ाई के साथ रोजगार और उद्यमिता के बेहतर अवसर उपलब्ध कराना है। उन्होंने चिकित्सा शिक्षा, शोध और स्वास्थ्य सेवाओं को सशक्त बनाने के लिए निजी क्षेत्र के सहयोग से आठ क्षेत्रीय चिकित्सा केंद्र स्थापित किए जाने की योजना का भी उल्लेख किया।

