मेरठ, 21 जुलाई (प्र)। सरदार वल्लभभाई पटेल कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय के दीक्षांत समारोह में उप्र की राज्यपाल आनंदीबेन पटेल ने कृषि, महिला सशक्तिकरण, तकनीक, किसानों की आय और प्रशासनिक जवाबदेही जैसे अनेक महत्वपूर्ण विषयों पर विस्तार से अपने विचार रखे। उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश को कृषि के क्षेत्र में नई पहचान दिलाने के लिए वैज्ञानिकों, अधिकारियों, विश्वविद्यालयों और किसानों को मिलकर काम करना होगा। राज्यपाल ने कहा कि कृषि शिक्षा में छात्राओं की बढ़ती भागीदारी सुखद संकेत है। उन्होंने गुजरात विधानसभा के अध्यक्ष शंकरभाई चौधरी तथा सरदार वल्लभभाई पटेल के प्रपौत्र अतुल धीरजलाल पटेल की भी सराहना की। उन्होंने कहा कि महिला सशक्तिकरण केवल योजनाएं बनाने से नहीं होगा, बल्कि उन्हें धरातल तक पहुंचाना होगा। उन्होंने प्रदेश सरकार द्वारा छात्राओं को स्कूटी वितरण योजना का उल्लेख करते हुए कहा कि सरकार ने इसके लिए बजट का प्रावधान किया था, लेकिन नियम समय पर नहीं बनने के कारण पात्र छात्राओं को लाभ नहीं मिल सका। उन्होंने कहा कि इस संबंध में उन्होंने मुख्यमंत्री कार्यालय से बात की। बाद में व्यवस्था की दिशा में काम शुरू हुआ। राज्यपाल सुधार ने कहा कि सरकार की मंशा और अधिकारियों की कार्यशैली में समानता होनी चाहिए। यदि योजनाओं का सही क्रियान्वयन नहीं होगा तो बजट भी व्यर्थ चला जाएगा और लाभार्थी वंचित रह जाएंगे। उन्होंने नाबार्ड की योजनाओं का उल्लेख करते हुए कहा कि किसानों को छोटी-छोटी आर्थिक सहायता भी बड़ा बदलाव ला सकती है। उन्होंने कार्यक्रम में मौजूद मंत्रियों से आग्रह किया कि ऐसी योजनाओं का लाभ अधिक से अधिक किसानों तक पहुंचाने के लिए विशेष प्रयास किए जाएं। उन्होंने कहा कि ऑपरेशन सिंदूर में भी तकनीकी संस्थानों की महत्वपूर्ण भूमिका रही है। रोजगारपरक छोटे-छोटे पाठ्यक्रम शुरू किए जाने चाहिए। कृषि विविधीकरण पर राज्यपाल ने कहा कि उत्तर प्रदेश में केवल गन्ना और गेहूं तक सीमित रहने के बजाय अन्य फसलों पर भी ध्यान देना होगा। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री लगातार मोटे अनाज (मिलेट्स) को बढ़ावा देने की बात कर रहे हैं, इसलिए कृषि उत्पादन को समय की आवश्यकता के अनुसार बदलना होगा। उन्होंने युवाओं से संकल्प लेने का आह्वान किया कि वे गन्ने और आलू के साथ-साथ नई फसलों, आधुनिक तकनीक और नवाचार को अपनाकर उत्तर प्रदेश की कृषि की तस्वीर बदलेंगे। उन्होंने स्वयं सहायता समूहों का उदाहरण देते हुए कहा कि देश में अनेक कम पढ़ी-लिखी महिलाएं भी परिश्रम और सरकारी योजनाओं के सहारे करोड़ों रुपये का कारोबार कर रही हैं।
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