लखनऊ, 20 जुलाई (ता)। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने गत दिवस उत्तर प्रदेश राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (एसडीएमए) मुख्यालय के नवीन भवन का लोकार्पण किया. यह भवन 200 करोड़ से अधिक की लागत से बनाया गया है। मुख्यमंत्री ने प्राधिकरण की वेबसाइट का भी शुभारंभ किया और यहां लगाई गई प्रदर्शनी व भवन का अवलोकन कर कार्यों के बारे में भी विस्तृत जानकारी ली। मुख्यमंत्री ने कहा कि हमारा संकल्प है कि हर आपदा से निपटने के लिए उत्तर प्रदेश को ऐसा राज्य बनाना है, जहां प्रत्येक नागरिक यह विश्वास लेकर जीवन जी सके कि संकट की घड़ी में सरकार के साथ वह भी तैयार है। यह नागरिक व राष्ट्रीय कर्तव्य का हिस्सा होना चाहिए। सीएम ने उम्मीद जताई कि यह केंद्र हर नागरिक के मन में नए विश्वास का जागरण करेगा।
सीएम ने कहा कि प्रायः आपदा व जनधन की व्यापक हानि के बाद हम लोग सक्रिय होते हैं और संवेदना व्यक्त करते हैं, लेकिन आपदा के प्रति पहले से सतर्कता, तैयारी व जागरूकता जनधन की हानि को न्यूनतम स्तर पर ला सकती है। दैनिक जीवन, स्कूली पाठ्यक्रम व परिवार में संवाद के जरिए इसके बचाव के बारे में बताने की आवश्यकता है। सीएम ने बचपन का जिक्र करते हुए कहा कि उस समय स्कूल व परिवारों में चर्चा होती थी कि आग, भूकंप, बाढ़ के दौरान क्या सावधानी बरतनी चाहिए, क्योंकि इन घटनाओं में असामान्य आचरण नुकसान पहुंचाता है। जागरूकता के जरिए इसे दिनचर्या का हिस्सा बनाया जाए तो जनधन की हानि को नियंत्रित किया जा सकता है।
मुख्यमंत्री ने घटनाओं को नजरअंदाज करने की प्रवृत्ति को खतरनाक बताया. उन्होंने प्रशिक्षण पर जोर देते हुए कहा कि 45 हजार होमगार्ड की भर्ती प्रक्रिया को पूरा किया जा रहा है। जिन आपदा मित्रों को प्रशिक्षण दिया गया है, उन्हें इस भर्ती में प्राथमिकता देंगे. होमगार्ड को भी आपदा मित्र का प्रशिक्षण अनिवार्य रूप से दिया जाएगा। यह फर्स्ट रिस्पांडर हैं. सरकार इन्हें अच्छी सुविधा, मानदेय, पांच लाख रुपये की कैशलेस स्वास्थ्य सुविधा, घटना-दुर्घटना होने पर परिजनों को लगभग 35-40 लाख रुपये तथा मुख्यमंत्री राहत कोष से पांच लाख रुपये अतिरिक्त सहायता उपलब्ध कराती है। सीएम ने उम्मीद जताई कि सुविधाएं बोझ नहीं बननी चाहिए, बल्कि अपनी सेवा का बेहतर उपयोग समाज के लिए करना चाहिए।
सीएम ने कहा कि सामान्य व्यक्ति को भी जागरूकता के जरिए आपदा में राहत उपलब्ध करा सकें। जब आपदा न रहे, तब भी खुद की ट्रेनिंग के साथ ही स्कूलों-कॉलेजों के छात्रों व शिक्षकों और अवकाश के दिनों में जनपद स्तर पर प्रधानाचार्यों का सम्मेलन कर आपदा की सावधानियों से अवगत कराएंगे तो यह देश की बड़ी सेवा होगी।
सीएम ने कहा कि बिजनौर में दो वर्ष में 80 लैपर्ड रेस्क्यू किए गए हैं। यह गन्ने के खेत में अधिक पाए जा रहे हैं. लोगों ने उसे शुगर लैपर्ड नाम दिया है। जागरूक न होने पर लोग उसकी चपेट में आ जाएंगे।. सीएम ने टाइगर व लैपर्ड के स्वभाव का अंतर बताते हुए कहा कि उसके खतरे वाले क्षेत्र को चिह्नित करके लोगों को अवगत कराएंगे तो बड़ी जनहानि रोकी जा सकती है। यूपी में 4000 से अधिक लोग मानव-वन्य जीव द्वंद्व और 5000 लोग अन्य प्राकृतिक आपदा की चपेट में आए हैं।
मुख्यमंत्री ने कहा कि आकाशीय बिजली की घटना में भी जान बचाई जा सकती है। इसके लिए उन्होंने तकनीक पर जोर दिया। कहा कि इसका उपयोग करके डेढ़-दो घंटे पहले भी बता सकते हैं कि किस एरिया में आकाशीय बिजली गिरने वाली है। उन्होंने कहा कि 40 साल पहले तकनीक नहीं थी, फिर भी कहा जाता था कि बादल नजदीक हों और लग रहा हो कि आपस में घने व विशेष रंग के हैं तो सावधानी बरतने की आवश्यकता है। ऐसे में खुले स्थान या पेड़ के नीचे खड़ा नहीं होना है और न ही लोहे या किसी धातु की वस्तु को लेकर चलना है, बल्कि पक्के भवन के नीचे शरण लेनी है।
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