मेरठ 17 जुलाई (प्र)। जनपद का चर्चित ललिता हत्याकांड में सीओ ब्रह्मपुरी सौम्या अस्थाना की भूमिका पर पहले दिन से ही सवाल उठ रहे थे। इसी को दृष्टिगत रखते हुए एसएसपी ने सीओ ब्रह्मपुरी सौम्या अस्थाना को ब्रह्मपुरी से हटाकर किठौर सर्किल में तैनात कर दिया है। अभी तक किठौर सर्किल देख रहे रामप्रकाश अब ब्रह्मपुरी की जिम्मेदारी संभालेंगे।
ललिता के परिजन सौम्य की जांच से कतई संतुष्ट नहीं थे उन पर आरोप था कि सौम्या उन्हें धमकाती है। जिन आरोपियों को पहले दिन से ही जांच के दायरे में होना चाहिए था, उनको बचाया जा रहा था। जांच के 50 वें दिन भी पीएसी का जवान पुलिस विवेचना में आरोपी नहीं बनाया गया था। जैसे ही दलितों ने कलक्ट्रेट के गेट पर प्रदर्शन किया और फिर बवाल हो गया। इसके बाद ही सीओ सौम्या की जांच का रुख बदल गया। क्योंकि ललिता के परिजन सीओ की जांच से कतई संतुष्ट नहीं थी, तभी तो पुलिस की भूमिका पर सवाल खड़े किये जा रहे थे। पहले दिन से ही ललिता के परिजन कह रहे थे कि मुख्य आरोपी के भाई अंकित की भूमिका हत्याकांड में है। अंकित पीएसी मुरादाबाद में तैनात था। उसे क्यों पुलिस बचा रही थी, ये भी बड़ा सवाल है। प्रदर्शन के बाद ही पुलिस की विवेचना आखिर क्यों बदल गई, जिसमें सीओ ने पीएसी जवान अंकित को हत्या की साजिश में शामिल होना मान लिया। ललिता गौतम 15 मई को सुबह अपने आरजी कॉलेज में बीए की परीक्षा देने के लिए घर से निकली थी इसके बाद घर वापस नहीं पहुंची। 16 मई को ललिता के परिजनों उसके गायब होने की टीपी नगर थाने में तहरीर दी थी। पुलिस की जांच पड़ताल में सामने आया था कि 15 मई को ही ललिता गौतम की हत्या कर दी गई थी, जबकि ललिता का शव 17 मई को रोहटा थाना क्षेत्र के उकसिया गांव के जंगल में मिला था पुलिस विवेचना के अनुसार ललिता ने हत्या की घटना से चार दिन पहले 11 मई को अपनी हत्या की आशंका व्यक्त कर दी थी। एक पत्र 11 मई को ललिता ने लिखा था। इसमें अपने साथ अनहोनी की संभावना व्यक्त की थी। महत्वपूर्ण बात ये है कि 11 मई को ही पीएसी जवान अंकित चौधरी अवकाश लेकर घर आया था, जो 15 मई तक छुट्टी पर रहा था। ललिता हत्याकांड की विवेचना सीओ ब्रह्मपुरी सौम्या अस्थाना कर रही थी।
सौम्या को पहले दिन से ही पता था कि अंकित चौधरी पीएसी में तैनात है तथा वो 11 मई से 15 मई तक छुट्टी पर अपने घर आया था। इसी बीच हत्या की घटना को मुख्य आरोपी ने अंजाम दे दिया। ललिता के परिजनों ने सीओ ब्रह्मपुरी सौम्या को पहले ही बताया था कि पीएसी जवान की हत्याकांड में पूरी भूमिका है, वो पुलिस को झूठ बोलकर गुमराह कर रहा है, लेकिन इसके बाद भी सीओ ब्रह्मपुरी ने विवेचना के दौरान चूक की या फिर पीएसी जवान को बचाने का प्रयास किया? ये बड़ा सवाल है।
हत्याकांड के 50 दिन तक पीएसी जवान को पुलिस ने आरोपी नहीं बनाया। जब दलितों का आक्रोश फूटा और कलक्ट्रेट पर बवाल हो गया, उसके बाद ही पुलिस ने पीएसी के जवान अंकित की भूमिका की जांच की। क्योंकि सीओ ब्रह्मपुरी सौम्या की भूमिका को लेकर ललिता के परिजनों ने सवाल खड़े करने शुरू कर दिये थे। पुलिस की इसमें खासी किरकिरी हो रही थी। इसके बाद ही पीएसी के जवान को सस्पेंड किया गया और फिर उसकी गिरफ्तारी भी हो गई। इस पूरे प्रकरण में सीओ सौम्या की कार्यप्रणाली को लेकर सवाल उठ रहे थे। इसी वजह से एसएसपी अविनाश पांडेय ने सीओ ब्रह्मपुरी सौम्या अस्थाना को ब्रह्मपुरी से हटाकर किठौर सीओ सर्किल में तैनात कर दिया है। उनकी जगह रामप्रकाश अब ब्रह्मपुरी की जिम्मेदारी संभालेंगे।

