नई दिल्ली, 11 जुलाई (ता)। सुप्रीम कोर्ट में गत दिवस तब अजीबोगरीब हालात पैदा हो गए, जब एक याचिकाकर्ता ने आक्रामक तरीके से अपनी बात रखते हुए माननीय जजों को ही आदेश देना शुरू कर दिया और कागजात पीठ की ओर उछाल कर फेंक दिए। याचिकाकर्ता ने सीजेआई सूर्यकांत को अपशब्द भी कहे। पुलिस ने याचिकाकर्ता को हिरासत में ले लिया। अपने मामले की खुद पैरवी कर रहे याचिकाकर्ता ने अपनी अर्जी में जज को गालियां भी दी। पिटीशनर की इस हरकत से कोर्ट भडक़ गया और उसे कोर्ट रूम से निकालने का आदेश दे दिया। यह घटना जस्टिस केवी विश्वनाथन और जस्टिस आलोक अराधे की बेंच के सामने हुई। रिपोर्ट के अनुसार, गत दिवस कोर्ट रूम में हुई इस हरकत से खफा दो जजों की पीठ ने उस पिटीशनर को सुप्रीम कोर्ट से जबरदस्ती निकालने का आदेश दिया। दरअसल, याचिकाकर्ता ने अपनी अर्जी में इलाहाबाद हाई कोर्ट के एक फैसले को चुनौती दी थी। जब उसके मामले की सुनवाई होने लगी तो उसने पीठ को आदेश देना शुरू कर दिया। यह देखकर कोर्ट दंग रह गया।
कोर्ट रूम का माहौल तब और ड्रामैटिक हो गया जब पिटीशनर बहुत आक्रामक होकर अपनी बातें रखने लगा। जैसे ही सुनवाई शुरू हुई, केस करने वाले ने अपनी बात शुरू करते हुए कहा कि मिस्टर ज्यूडिशियल सर्वेंट। मैं आपको एसीपी लखनऊ के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने का ऑर्डर देने का ऑर्डर देता हूं। उसके इस बर्ताव से कोर्ट हैरान रह गया। इसके बाद जस्टिस विश्वनाथन ने पूछा कि आप मुझे ऑर्डर दे रहे हैं? आप हमें ऑर्डर दे रहे हैं? इसके जवाब में केस करने वाले शख्स ने कहा कि मेरी तरफ से बस इतना ही। सब कुछ रिकॉर्ड में है। इसके बाद उस शख्स ने पीठ की तरफ केस फाइल हवा में उछाल दिया और खुली कोर्ट में सीजेआई को गालियां देनी शुरू कर दी और पेपर फेंकते हुए कहा कि इसे सीजेआई को दे देना। इतना देखते ही सिक्योरिटी स्टाफ तुरंत हरकत में आया और उसे कोर्ट रूम से बाहर निकाल दिया।
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