नई दिल्ली 10 जुलाई। डायबिटीज मरीजों के लिए राहत की खबर है डेनमार्क की दवा कंपनी नोवो नॉर्डिस्क ने भारत में पहली बेसल इंसुलिन अविक्ली (इंसुलिन आइकोडेक ) लॉन्च की है। उसका दावा है कि इसे हफ्ते में एक बार ही लगाना होगा। यह टाइप-1 व टाइप-2 के वयस्क मरीजों के लिए है इससे रोज इंसुलिन इंजेक्शन लगाने से मुक्ति मिल सकेगी।
कंपनी का दावा है कि अविक्ली ऐसा बेसल (लंबे समय तक असर करने वाला) इंसुलिन है, जिसे क्लिनिकल इस्तेमाल के लिए मंजूरी मिली है। इससे साल भर में लगने वाले इंजेक्शनों की संख्या 365 से घटकर सिर्फ 52 रह जाएगी।
कंपनी ने 700 यूनिट का पैक ₹2611 में लॉन्च किया है। यानी इसकी कीमत ₹3.73 प्रति यूनिट पड़ेगी, जो मौजूदा दैनिक बेसल इंसुलिन की तुलना में 30 से 40 प्रतिशत तक सस्ती बताई गई है।
यदि किसी मरीज को रोज 10 यूनिट इंसुलिन की जरूरत होती है, तो उसे सप्ताह में 70 यूनिट इंसुलिन लगेगी, जिसकी लागत करीब ₹261 प्रति सप्ताह होगी।
भारत में 10.1 करोड़ से ज्यादा लोग डायबिटीज से पीड़ित हैं। 13.6 करोड़ लोग प्री-डायबिटीज की स्थिति में हैं। देश में 9 लाख से अधिक लोग टाइप-1 डायबिटीज से प्रभावित हैं, जिनके इलाज का मुख्य आधार इंसुलिन है। वहीं टाइप-2 डायबिटीज के लगभग 10 प्रतिशत मरीजों को भी इंसुलिन थेरेपी की जरूरत पड़ती है।
प्रो. निश्चल ने कहा कि इस तरह की नई इंसुलिन की शुरुआत के दौरान सही डोज तय करने में कुछ समय लग सकता है। इस दौरान हाइपोग्लाइसीमिया ( ब्लड शुगर बहुत कम होने) का खतरा भी रह सकता है। एम्स दिल्ली के प्रोफेसर नवल विक्रम ने कहा कि हफ्ते में एक बार लगने वाली बेसल इंसुलिन पर कई देशों में अध्ययन हुए हैं और उनमें इसके अच्छे परिणाम देखने को मिले हैं।
डॉक्टर की सलाह जरूर लें
एम्स के प्रोफेसर ने कहा है कि हर ब्रांड की इंसुलिन की प्रभावशीलता और उसके क्लीनिकल परिणाम अलग-अलग हो सकते हैं। इसलिए किसी भी नई साप्ताहिक इंसुलिन पर जाने का फैसला मरीज को अपने डॉक्टर की सलाह पर ही करना चाहिए। रोज लगने वाली इंसुलिन से साप्ताहिक इंसुलिन पर शिफ्ट करते समय डोज का सही निर्धारण और समय-समय पर उसका एडजस्टमेंट करना पड़ता है।

