मेरठ 08 जुलाई (प्र)। सरकार की मंशा के बावजूद मेरठ के मवाना, हस्तिनापुर और मखदूमपुर क्षेत्र में 15 साल से सरकारी या निजी बस सेवा उपलब्ध नहीं है। खादर क्षेत्र में बसों का संचालन परिवहन निगम और आरटीओ के बीच फंसा हुआ है। दोनों विभाग एक-दूसरे को बस सेवा न होने के लिए जिम्मेदार ठहरा रहे हैं 5 जुलाई को हस्तिनापुर मखदूमपुर से रामराज मार्ग पर स्थित एक दर्जन से अधिक गांवों की इस समस्या को उठाया था।
15 साल पहले इन गांवों के लोग और स्कूल-कॉलेज के विद्यार्थी सरकारी व निजी बसों में सफर करते थे। इसके बाद शासन और प्रशासन ने बसें बंद कर दीं। तब से क्षेत्र के लोग पैदल यात्रा करने को मजबूर हैं। यह स्थिति तब है जब यहां के विधायक दिनेश खटीक उप्र सरकार में जल शक्ति राज्यमंत्री हैं जनता लगातार बस संचालन की मांग कर रही है, लेकिन जनप्रतिनिधि और अधिकारी कोई ठोस कदम नहीं उठा रहे हैं।
प्रभावित गांव और गंगा मेला
खादर क्षेत्र के किशोरपुर, मखदूमपुर, वस्तोरा नारंग, लतीफपुर, बामनौली कुन्हेड़ा, रठौरा, तारापुर, फाजलपुर समेत करीब तीन दर्जन गांवों में निजी साधनों के अलावा परिवहन का कोई साधन नहीं है।
परिवहन निगम और आरटीओ की प्रतिक्रिया
मेरठ के क्षेत्रीय प्रबंधक दीपक चौधरी ने कहा कि परिवहन निगम चाहता है कि देहात के हर गांव तक बसें पहुंचे। उन्होंने बताया कि बस संचालन के लिए परमिट देने का अधिकार आरटीओ के पास है। अगर आरटीओ परमिट देते हैं तो परिवहन निगम बसें चलाने को तैयार है, जिससे निगम को राजस्व भी मिलेगा दूसरी ओर, आरटीओ प्रशासन अनीता सिंह ने बताया कि सरकार ने परिवहन निगम को देहात के लिए 25 सीटर बसों के संचालन की व्यवस्था करने का अवसर दिया था। उन्होंने कहा कि जिले में केवल किठौर क्षेत्र में एक निजी बस ट्रांसपोर्टर ने योजना के तहत बस संचालन शुरू किया है और उसे परमिट दिए गए हैं।
आरटीओ प्रशासन अनीता सिंह का कहना है कि अगर हस्तिनापुर-मखदुमपुर- मवाना क्षेत्र के गांवों में बसों के संचालन की जरूरत है. तो परिवहन निगम को रूट प्लान बनाकर देना होगा। इसके बाद आरटीओ मार्गों का सर्वे कराएगी और यात्रियों की संख्या का आधार देखेगी।

