लखनऊ 04 जुलाई। आम उपभोक्ता तक पहुंचने वाली बिजली की औसत आपूर्ति लागत 7.96 रुपये प्रति यूनिट है। यही बिजली गरीबी रेखा से नीचे जीवनयापन करने वाले (बीपीएल) लाइफलाइन उपभोक्ताओं को मात्र तीन रुपये प्रति यूनिट में उपलब्ध कराने के लिए राज्य सरकार ने 3.75 रुपये प्रति यूनिट का अनुदान (सब्सिडी) दिया है। अन्य घरेलू उपभोक्ताओं की बिजली दरें भी सातवें वर्ष यथावत रखने के लिए सरकार ने 85 पैसे से 1.85 रुपये प्रति यूनिट तक सब्सिडी दी है। चुनावी वर्ष में किसानों को सिंचाई के लिए मुफ्त बिजली उपलब्ध कराने के लिए भी सरकारी खजाने से 12,845 करोड़ रुपये की भारी-भरकम सब्सिडी दी गई है।
विद्युत नियामक आयोग ने कोयले आदि की बढ़ती कीमत के मद्देनजर चालू वित्तीय वर्ष के टैरिफ आर्डर में बिजली आपूर्ति की औसत लागत 7.96 रुपये प्रति यूनिट का अनुमान लगाया है। वैसे तो वाणिज्यिक व उद्योगों आदि की बिजली दर बढ़ाकर क्रास सब्सिडी के जरिये नियामक आयोग गरीबों, किसानों और कम खपत वाले घरेलू उपभोक्ताओं की बिजली दरें अपेक्षाकृत कम रखता है, लेकिन ऐसे में भी घरेलू उपभोक्ताओं की बिजली 6.75 से 7.35 रुपये प्रति यूनिट पहुंच रही थी। इस पर सरकार ने 7555 करोड़ रुपये की सब्सिडी देकर घरेलू उपभोक्ताओं की बिजली तीन रुपये से साढ़े छह रुपये प्रति यूनिट तक बनाए रखी है।
प्रदेश के 3 करोड़ 94 लाख 20 हजार 464 बिजली उपभोक्ताओं में 3.41 करोड़ सिर्फ घरेलू उपभोक्ता ही हैं। कुल घरेलू उपभोक्ताओं में से 1,78,91,784 शहरी व ग्रामीण क्षेत्र के लाइफ लाइन उपभोक्ता (एक किलोवाट भार और प्रति माह 100 यूनिट से कम खर्च वाले कनेक्शन) ही हैं। सरकार ने इन्हें 6.75 रुपये प्रति यूनिट वाली बिजली मात्र तीन रुपये प्रति यूनिट में उपलब्ध कराने के लिए प्रति यूनिट 3.75 रुपये (55.55% ) सब्सिडी दी है। इसके लिए सरकारी खजाने से कुल 2833 करोड़ पावर कारपोरेशन को दिए गए हैं। अन्य घरेलू उपभोक्ताओं को भी प्रतिमाह 150 यूनिट तक बिजली खर्च पर 1.85 रु. प्रति यूनिट सब्सिडी दी गई है, वहीं 151 से 300 यूनिट खर्च करने पर 1.35 रुपये और 300 यूनिट से ज्यादा बिजली खर्च पर 85 पैसे प्रति यूनिट सब्सिडी सरकार ने दी है।
यही कारण है कि शहरी क्षेत्र के घरेलू उपभोक्ताओं को 7.35 रुपये प्रति यूनिट के बजाय अधिकतम 6.50 रुपये जबकि गांव के उपभोक्ताओं को 5.50 रुपये प्रति यूनिट ही बिजली का बिल देना होगा।
सिंचाई के लिए निजी नलकूप की बिजली मुफ्त देने के लिए भी सरकार ने 835 रुपये प्रति बीएचपी प्रतिमाह के हिसाब से 12,845 करोड़ रुपये की सब्सिडी दी है। सिंचाई के लिए मुफ्त बिजली की घोषणा हो चुकी है। सरकारी खजाने से अनुदान दिए जाने से 16,82,860 किसानों को ट्यूबवेल के बिजली खर्च का बिल नहीं देना पड़ेगा। सात वर्षों से प्रदेश में बिजली की दरें भले यथावत हैं, लेकिन उपभोक्ताओं तक आपूर्ति का खर्चा बढ़ता जा रहा है। ऐसे में कुछ माह में ही होने वाले विधानसभा चुनाव के मद्देनजर राज्य सरकार ने यदि भारी-भरकम 20,400 करोड़ रुपये सब्सिडी बिजली कंपनियों को न दी होती तो घरेलू उपभोक्ताओं को ही 7.35 रुपये प्रति यूनिट तक बिजली का बिल देना पड़ता।

