जालोर 01 जुलाई। राजस्थान के जालोर जिले में एक पंचायत का तुगलकी फरमान चर्चा में है. यहां समाज के पंचों ने लिव-इन रिलेशनशिप में रह रहे एक युवक और युवती को लेकर कठोर सामाजिक फैसला सुनाते हुए दोनों परिवारों पर 21 लाख रुपए का जुर्माना लगाया है. इसके साथ ही दोनों परिवारों को समाज से बाहर कर हुक्का-पानी बंद करने और धार्मिक स्थल सहित सामाजिक कार्यक्रमों में शामिल होने पर प्रतिबंध लगा दिया गया है.
युवक-युवती के इस फैसले से समाज के कुछ पंच नाराज हो गए. आरोप है कि फरवरी 2026 में धर्मस्थल पर समाज की एक बैठक बुलाई गई, जिसमें दोनों परिवारों को बुलाकर उन्हें दोनों को अलग करने का दबाव बनाया गया. पंचायत की ओर से परिवार को युवती को वापस उसके माता-पिता के घर भेजने और युवक से संबंध खत्म करने के लिए दो महीने का समय दिया गया.
पीड़ित परिवार के मुताबिक समय पूरा होने के बाद 20 अप्रैल 2026 को दोबारा पंचायत की बैठक की गई. यह बैठक एक पंच के घर हुई, जिसमें करीब 61 लोग शामिल हुए. आरोप है कि बैठक में मौजूद 11 पंचों ने युवक-युवती के परिवारों के खिलाफ फैसला सुनाते हुए 21 लाख रुपए का जुर्माना लगा दिया.
परिवार का कहना है कि पंचायत के फैसले के बाद उन्हें समाज से अलग कर दिया गया. उनका हुक्का-पानी बंद कर दिया गया और समाज के लोगों ने उनसे बातचीत करना भी बंद कर दिया. इसके अलावा धार्मिक स्थलों और सामाजिक कार्यक्रमों में शामिल होने पर भी रोक लगा दी गई.
पीड़ित परिवार ने आरोप लगाया कि 6 जून को रिश्तेदारी में हुई मौत के बाद आयोजित 12वें कार्यक्रम में जब वे शामिल होने पहुंचे तो उन्हें वहां से बाहर निकाल दिया गया. इस घटना के बाद परिवार ने पुलिस से शिकायत की.
परिवार ने 1 जून को सायला थाने में शिकायत दर्ज कराई थी. हालांकि, करीब दो महीने तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं होने का आरोप लगाते हुए 29 जून को पीड़ित पक्ष जालोर पुलिस अधीक्षक कार्यालय पहुंचा और न्याय की गुहार लगाई.
शिकायत में 11 लोगों को नामजद किया गया है. इनमें लतीफ खां, नैने खां, मटार खां, जुसे खां समेत अन्य पंचों के नाम शामिल हैं. पीड़ित परिवार ने आरोप लगाया है कि पंचायत ने सामाजिक दबाव बनाकर उनके अधिकारों का उल्लंघन किया.
वहीं, पुलिस अधिकारियों का कहना है कि मामले की जांच शुरू कर दी गई है. जालोर एसपी ने जांच की जिम्मेदारी महीपाल सिंह को सौंपी है.

