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    Home»देश»IVF पर कलकत्ता हाई कोर्ट का बड़ा फैसला, पति की उम्र नहीं बनेगी मातृत्व में बाधा
    देश

    IVF पर कलकत्ता हाई कोर्ट का बड़ा फैसला, पति की उम्र नहीं बनेगी मातृत्व में बाधा

    adminBy adminJuly 1, 2026No Comments1 Views
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    कोलकाता 01 जुलाई। कलकत्ता हाई कोर्ट ने मातृत्व अधिकार को लेकर एक बेहद महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है। कोर्ट ने कहा कि यदि कोई महिला उम्र और स्वास्थ्य के लिहाज से पात्र है, तो उसे आईवीएफ उपचार से सिर्फ इसलिए वंचित नहीं किया जा सकता क्योंकि उसके पति की उम्र कानून में तय सीमा से अधिक है।

    जस्टिस कृष्णा राव की पीठ ने कहा, IVF से बच्चे के जन्म की प्रक्रिया में पति की भूमिका सिर्फ सहयोगी की होती है। महिला ही भ्रूण को गर्भ में धारण करती है और बच्चे को जन्म देती है। इसलिए पति की उम्र अधिक होने से किसी महिला के मातृत्व का अधिकार नहीं छीना जा सकता।’
    दरअसल, यह पूरा मामला साल 2014 से संतान के लिए प्रयास कर रहे एक दंपती से जुड़ा हुआ है। यह दंपती एआरटी बैंक से शुक्राणु और अंडाणु लेकर आईवीएफ कराना चाह रहे थे। लेकिन अस्पताल ने यह कहकर इलाज से इनकार कर दिया कि पति की उम्र 57 वर्ष है।

    चूंकि एआरटी (ART) कानून के तहत पुरुष की उम्र 55 वर्ष से अधिक नहीं होनी चाहिए। लेकिन कोर्ट ने कहा कि एआरटी कानून किसी पात्र विवाहित महिला को अकेले उपचार लेने से नहीं रोकता। कानून का उद्देश्य तकनीक का दुरुपयोग रोकना है, न कि पात्र महिला को मातृत्व के अधिकार से वंचित करना।

    जस्टिस कृष्णा राव ने 24 जून के आदेश में कहा, ‘महिला गर्भ धारण करने में शारीरिक रूप से सक्षम है और आयु सीमा के भीतर है। इसके साथ ही कोर्ट ने अब अस्पताल को कानून के अनुरूप 49 वर्षीय महिला का उपचार करने और इस दंपती को आईवीएफ सुविधा उपलब्ध कराने का निर्देश दिया है।

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