नयी दिल्ली, 01 जुलाई (ता)। सेना प्रमुख के पद से आज सेवानिवृत्त हुए जनरल उपेंद्र द्विवेदी ने कहा कि भविष्य में युद्ध अधिक एकीकृत, संयुक्त एवं समन्वित सैन्य अभियान पर केंद्रित होंगे इसलिए सशस्त्र बलों की दिशा स्पष्ट होनी चाहिए। साथ मिलकर देखना, साथ मिलकर निर्णय लेना और साथ मिलकर कार्रवाई करना।
वरिष्ठ सैन्य अधिकारी जनरल द्विवेदी 40 साल से अधिक की सेवा के बाद गत दिवस सेनाध्यक्ष के पद से सेवानिवृत्त हुए। उन्हें ‘साउथ ब्लॉक’ के लॉन में आयोजित एक औपचारिक विदाई समारोह में ‘गार्ड ऑफ ऑनर’ दिया किया।
इस कार्यक्रम से इतर जनरल द्विवेदी ने मीडियाकर्मियों से कहा कि आज, जब मैं सेनाध्यक्ष के तौर पर अपना कार्यकाल पूरा कर रहा हूं तो मुझे अत्यंत कृतज्ञता, गर्व और संतुष्टि महसूस हो रही है। जनरल द्विवेदी ने जून 2024 में 30वें सेना प्रमुख का पद संभाला था। उन्होंने कहा कि सैनिक स्कूल से लेकर अब तक का सफर बहुत शानदार रहा है। चार दशक से अधिक समय तक भारतीय सेना की सेवा करना मेरे जीवन का सबसे बड़ा सौभाग्य रहा है।’’
पूर्व सेना प्रमुख ने कहा कि भारतीय सेना को अपनी ताकत ‘‘किसी एक व्यक्ति से नहीं बल्कि अपने सैनिकों, कमांडरों, पूर्व सैनिकों, परिवारों और देश के नागरिकों के अटूट भरोसे से मिलती है।
उन्होंने कहा कि मैं अपनी सेना के वीर नायकों के प्रति आभार व्यक्त करता हूं। विदाई समारोह से पहले जनरल द्विवेदी ने राष्ट्रीय समर स्मारक का दौरा किया और देश के बहादुर सैनिकों को श्रद्धांजलि देते हुए वहां पुष्पांजलि अर्पित की। सेना ने ‘एक्स’ पर एक पोस्ट में इस दौरे की तस्वीरें साझा करते हुए कहा कि सेना प्रमुख के पद से कार्यमुक्त होने के दिन जनरल उपेंद्र द्विवेदी ने राष्ट्रीय समर स्मारक पर पुष्पांजलि अर्पित की। उन्होंने उन बहादुर सैनिकों के अदम्य साहस, अटूट वीरता और सर्वाेच्च बलिदान को नमन किया, जिन्होंने देश की सेवा में अपने प्राण न्योछावर कर दिए।
जनरल द्विवेदी ने पत्रकारों को बताया कि पिछले दो साल में भारतीय सेना ने सभी मोर्चों पर अपनी अभियानगत तैयारी को लगातार बेहतर बनाए रखा है। उन्होंने कहा कि उत्तरी सीमा पर ‘ऑपरेशन स्नो लेपर्ड’ के तहत ‘‘हमारी तैनाती मजबूत और सतर्क है’’। उन्होंने कहा कि पश्चिमी सीमा पर भी सेना ने पूरी गंभीरता और तैयारी के साथ अपना कर्तव्य निभाया है। ‘ऑपरेशन सिंदूर’ इसका एक ज्वलंत उदाहरण है। पूर्व सेना प्रमुख ने इस बात पर ज़ोर दिया कि जिम्मेदारी के साथ राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए काम करके, सशस्त्र बलों ने एक ‘‘न्यू नॉर्मल’’ स्थापित किया है।
पहलगाम में हुए आतंकी हमले के जवाब में मई 2025 में चलाए गए ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के दौरान तीनों सेनाओं ने आपसी तालमेल और एकजुटता के साथ काम किया। उन्होंने कहा कि सेना के तीनों अंगों के बीच तालमेल और मजबूत हुआ है। थल सेना, नौसेना और वायु सेना ने साझा सोच और एकजुटता के साथ मिलकर काम किया।
उन्होंने कहा कि भविष्य में युद्ध अधिक संयुक्त, एकीकृत और समन्वित सैन्य अभियान पर केंद्रित होंगे। इसलिए हमारी दिशा साफ है दृ साथ मिलकर देखना, साथ मिलकर फैसले लेना और साथ मिलकर कार्रवाई करना। मध्य प्रदेश के रीवा स्थित सैनिक स्कूल के पूर्व छात्र, जनरल द्विवेदी 1984 में जम्मू कश्मीर राइफल्स में शामिल हुए थे।
सैन्य अधिकारी के पास उत्तरी, पूर्वी और पश्चिमी ‘थिएटर’ में अलग-अलग अभियानगत माहौल में कमान एवं स्टाफ दोनों तरह की जिम्मेदारियां संभालने का अनुभव है। उन्होंने कहा कि हमारे बहादुर सैनिक देश की रक्षा के लिए पर्वतीय इलाकों, रेगिस्तानों, ग्लेशियरों, जंगलों और मुश्किल सीमावर्ती इलाकों में डटे रहते हैं। निर्वतमान सेना प्रमुख ने कहा कि किसी भी कमांडर के लिए ‘‘उसके सैनिक ही उसकी ताकत होते हैं जिनकी निष्ठा, बहादुरी और अनुशासन ही भारतीय सेना की पहचान है’’। उन्होंने कहा कि सेना के बहादुर सैनिकों ने आतंकवाद-विरोधी अभियानों में अहम भूमिका निभाई है। जनरल द्विवेदी ने कहा कि संयुक्त राष्ट्र की टुकड़ियों में तैनाती से लेकर मानवीय सहायता और आपदा राहत अभियानों में हिस्सा लेने तक, भारतीय सैनिकों ने देश का मान बढ़ाया है, चाहे वह कांगो के घने जंगल हों या भूकंप से प्रभावित वेनेजुएला। जनरल द्विवेदी के स्थान पर लेफ्टिनेंट जनरल धीरज सेठ ने अगले सेनाध्यक्ष का पद संभाल लिया है। जनरल द्विवेदी ने कहा कि आज मैं जनरल धीरज सेठ को जिम्मेदारी सौंप रहा हूं। वह एक अनुभवी सैनिक और कुशल नेतृत्वकर्ता हैं। मुझे पूरा भरोसा है कि उनके नेतृत्व में भारतीय सेना अपनी शानदार परंपराओं, पेशेवर रुख और संकल्प के साथ नयी ऊंचाइयां हासिल करेगी।
उन्होंने यह भी कहा कि सेना में आधुनिकीकरण की प्रक्रिया लगातार जारी है और पिछले दो साल में सुरक्षा बल के पुनर्गठन, प्रौद्योगिकी को अपनाने, संयुक्त रूप से काम करने, प्रणाली में सुधार और मानव संसाधन प्रबंधन पर तेजी से काम हुआ है। सेना ने ‘एक्स’ पर एक अलग पोस्ट में कहा कि चार दशकों से अधिक का उनका (जनरल द्विवेदी का) शानदार करियर निस्वार्थ सेवा, प्रेरणादायक नेतृत्व और देश के प्रति अटूट समर्पण की विरासत को दर्शाता है जिसने भारतीय सेना और बदलाव की दिशा में उसकी निरंतर यात्रा पर एक अमिट छाप छोड़ी है।
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