मेरठ, 29 जून (प्र)। गत दिवस वर्ल्ड ऑफ स्पोर्ट्स की पल्लवपुरम में हुई जनरल बॉडी मीटिंग में नई राष्ट्रीय कार्यकारिणी का गठन किया गया। साथ ही 12 राज्यों के लिए राज्य कॉर्डिनेटरों की नियुक्ति की घोषणा की गई। बैठक में संगठन के सदस्य, विभिन्न राज्यों और जिलों के प्रतिनिधि तथा खेल जगत से जुड़े लोग मौजूद रहे। संगठन ने आने वाले समय में खेल प्रतिभाओं को मंच देने, ट्रेनिंग शिविर आयोजित करने और राष्ट्रीय स्तर पर गतिविधियां बढ़ाने की रणनीति तय की।
मीटिंग में सागर कश्यप को संस्थापक एवं निदेशक, सोम शर्मा को कार्यकारी अध्यक्ष, कपिल त्यागी को चेयरमैन, अनीता सिंह को वाइस चेयरमैन, लक्ष्मीकांत शर्मा को जनरल सेक्रेटरी और राधा चौधरी को ज्वाइंट सेक्रेटरी बनाया गया। वहीं आकाश कश्यप को कोषाध्यक्ष, आशीष पंवार और बबीता राणा को उपाध्यक्ष, जीसान और मीनू यादव को मुख्य कार्यकारी अधिकारी, मीनू यादव को इवेंट कॉर्डिनेटर, राजकुमार घोष को मैनेजिंग कॉर्डिनेटर तथा बबीता सोम को रिलेशन कॉर्डिनेटर की जिम्मेदारी सौंपी गई।
बैठक में राष्ट्रीय महासचिव लक्ष्मीकांत शर्मा ने कहा कि वे पिछले 30 वर्षों से खेलों से जुड़े हैं। उन्होंने हिंदी माध्यम से पढ़ाई की, बाद में सीबीएसई और विभिन्न खेल संगठनों के साथ काम किया। उन्होंने बताया कि संगठन की कोर कमेटी ने उन्हें महासचिव की जिम्मेदारी सौंपी है और वे पूरी टीम के साथ संस्था को राष्ट्रीय स्तर तक ले जाने का प्रयास करेंगे। उन्होंने कहा कि वर्ल्ड ऑफ स्पोर्ट्स की स्थापना पांच वर्ष पहले संस्थापक सागर ने की थी। अब संगठन का विस्तार पूरे देश में किया जा रहा है। इसी उद्देश्य से क्रिकेट, एथलेटिक्स, बॉक्सिंग, फुटबॉल, वेटलिफ्टिंग सहित विभिन्न खेलों से जुड़े लोगों को बैठक में बुलाया गया और नई जिम्मेदारियां सौंपी गईं।
लक्ष्मीकांत शर्मा ने कहा कि सरकार खेलो इंडिया जैसे अभियान चला रही है, जबकि उनका संगठन उन बच्चों तक पहुंचना चाहता है जिन्हें प्रतिभा होने के बावजूद मंच नहीं मिल पाता। उनका कहना था कि देश की असली प्रतिभाएं गलियों और गांवों में छिपी हैं, लेकिन आर्थिक तंगी, संसाधनों की कमी और सही मार्गदर्शन न मिलने से वे आगे नहीं बढ़ पातीं। उन्होंने कहा कि यदि किसी खिलाड़ी को फंडिंग, ट्रेनिंग , प्रतियोगिताओं में भाग लेने या अन्य किसी सहायता की जरूरत होगी तो संगठन की पूरी टीम उसके साथ खड़ी होगी। संस्था से ऐसे लोग जुड़े हैं जो आर्थिक रूप से कमजोर खिलाड़ियों की मदद करने के लिए तैयार हैं।
महासचिव ने कहा कि कई बार प्रतिभाशाली खिलाड़ी सिर्फ इसलिए पीछे रह जाते हैं क्योंकि उनके पास संसाधन नहीं होते, जबकि सिफारिश वाले खिलाड़ी आगे निकल जाते हैं। कई राष्ट्रीय और राज्य स्तर के खिलाड़ी आर्थिक परेशानियों के कारण खेल छोड़ने को मजबूर हो जाते हैं। संगठन का प्रयास ऐसे खिलाड़ियों को पहचानकर उन्हें सही मंच और सहयोग देना है। खेलों में स्टेरॉयड के बढ़ते इस्तेमाल पर लक्ष्मीकांत शर्मा ने कहा कि इसकी सबसे बड़ी जिम्मेदारी कोच और अभिभावकों की है। उन्होंने कहा कि माता-पिता को अपने बच्चों के लिए योग्य और प्रमाणित कोच का चयन करना चाहिए। आज कई ऐसे लोग भी अकादमी चला रहे हैं जिनके पास पर्याप्त अनुभव या योग्यता नहीं है। उन्होंने कहा कि जब तक अभिभावक और खिलाड़ी जागरूक नहीं होंगे, तब तक ऐसी समस्याएं खत्म नहीं होंगी।
बैठक में राष्ट्रीय खेल महोत्सव, विभिन्न प्रतियोगिताओं, ग्रासरूट प्रशिक्षण शिविर, कोचिंग वर्कशॉप, स्कूल-कॉलेज जागरूकता अभियान, महिला सशक्तिकरण और युवा नेतृत्व कार्यक्रम आयोजित करने की रूपरेखा भी प्रस्तुत की गई। प्रशिक्षण के मानक तय करने के लिए विशेषज्ञ पैनल बनाया जाएगा, जबकि स्पॉन्सरशिप और संसाधन जुटाने की योजना को भी अंतिम रूप दिया जाएगा। संगठन ने बताया कि जल्द ही राज्य स्तर पर बैठकें आयोजित कर कार्यक्रमों का विस्तृत कैलेंडर जारी किया जाएगा। प्रशिक्षण शिविरों और क्षेत्रीय प्रतियोगिताओं की तिथियां, स्थान और भागीदारी की प्रक्रिया भी शीघ्र घोषित की जाएगी।
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