मेरठ, 27 जून (प्र)। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के आदेश को यहां अधिकारी मनाने को तैयार नहीं। सीएम के आदेश के बावजूद यहां बड़ी संख्या में प्राइवेट अस्पतालों के बेसमेंट में बेरोकटोक कार्य चल रहा है। खास बात है कि अधिकांश प्राइवेट अस्पतालों में अग्निशमन के पुख्ता इंतजाम नहीं हैं। ऐसे में मरीजों की जान को खतरा बना है, लेकिन अधिकारी हैं कि इनपर कोई कार्रवाई करने को तैयार नहीं हैं।
लखनऊ में गत दिनों एक कोचिंग सेंटर में भीषण आग लगने से 18 छात्रों की मौत हुई। इस दर्दनाक हादसे के बाद मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने प्रदेशभर में बेसमेंट में कोचिंग सेंटर, प्राइवेट अस्पताल और अन्य व्यवासयिक गतिविधियां बंद कराने के आदेश दिए। इस आदेश के बाद डीएम डॉ. वीके सिंह ने एक टीम बनाई और जांच कराई, लेकिन यह जांच केवल कोचिंग सेंटरों तक सीमित रही। जो कोचिंग सेंटर बेसमेंट में संचालित पाए गए, उन्हें बंद करा दिया गया, लेकिन बेसमेंट में चल रहे प्राइवेट अस्पतालों, पैथोलॉजी लैब और डायग्नोस्टिक सेंटरों के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं की गई। जिले में करीब 330 प्राइवेट अस्पताल पंजीकृत हैं। इनमें बड़ी संख्या में अस्पतालों के बेसमेंट में पैथोलॉजी लैब, डायग्नोस्टिक सेंटर और अन्य चिकित्सीय कार्य हो रहे हैं। सीएम के आदेश बाद भी यहां चिकित्सीय गतिविधियां चल रही हैं। स्वास्थ्य विभाग के जिम्मेदार अधिकारी इनपर कार्रवाई करने को तैयार नहीं है। सीएमओ डा. राम प्रसाद ने सीएम के आदेश की जानकारी मिलते ही प्राइवेट अस्पतालों को बेसमेंट में मरीजों को भर्ती न करने के आदेश जारी किए, लेकिन सीएम के आदेश तो बेसमेंट में किसी भी तरह की व्यवसायिक गतिविधियां न चलने देने के आदेश दिए थे। इस आदेश पर अभी तक अमल नहीं किया गया। यहां बड़ी संख्या में प्राइवेट अस्पतालों के बेसमेंट में बेरोकटोक चिकित्सीय गतिविधियां चल रही हैं। ज्यादातर नर्सिंग होमों में अग्निशमन के पुख्ता इंतजाम नहीं हैं। ऐसे में मरीजों की जान को खतरा बना है, लगता है कि अधिकारी किसी बड़े हादसे के बाद कार्रवाई करेंगे।
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