महानगरों के समान अपने यहां भी पुलिस प्रशासन और राजमार्ग से संबंधित अफसर यातायात व्यवस्थाएं करने में लगे हैं। लेकिन आजकल मुख्य बाजारों बाहरी क्षेत्रों आबादी वाली जगहों पर कट बंद करने से आम आदमी को परेशानी व अफसरों को धरना प्रदर्शन का सामना करना पड़ रहा है जिससे इनका जो समय समस्याओं के समाधान में लगना चाहिए था वो इसका विरोध झेलने में लग रहा है। मैं किसी भी विकास और सौंदर्यीकरण का विरोधी नहीं हू लेकिन महानगरों की व्यवस्थाएं यहां लागू करने से पहले यातायात की सभी सुविधाएं भी उपलब्ध कराई जाए जिससे यात्रा सुगम हो सके। सड़कों में गडढे बेतरतीब यातायात से आम आदमी परेशान है। अब यह कट बंद करने से वाकई में परेशानी होती है क्योंकि शहरी क्षेत्रों में कटों को लेकर यह कार्रवाई नहीं की जानी चाहिए। पहले अधिकारी फुटपाथों को अतिक्रमण मुक्त कराए और फिर सड़कों के अतिक्रमण को हटवाया जाए और जैसा दिल्ली जैसे महानगरों में है कि सड़क पार करने के लिए पुल बने हैं वो यहां भी बनवाएं जाएं जिससे नागरिकों को राहत मिले और लंबी दूरी से मुड़कर आने में ईंधन और समय की बचत की जा सके और वाहन चालक इससे पीड़ित हो रहे हैं इस संभावना को समाप्त करने के लिए सरकार पुलिस प्रशासन साफ सुथरी गडढा मुक्त सड़कें अतिक्रमण विहीन मार्ग और छोटे पुल बनवाएं तभी इन कटों को बंद कराना अच्छा है। आम आदमी और प्रशासन के सामने अन्य समस्याओं को पहले निपटाया जाए और इस प्रकार के निर्णय ठीक नहीं कहे जा सकते।
(प्रस्तुतिः- रवि कुमार बिश्नोई संपादक दैनिक केसर खुशबू टाइम्स मेरठ)
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