देश में खिलाड़ियों और खेल में रुचि रखने वालों को सरकार के साथ साथ उद्योगपति भी प्रोत्साहन दे रहे हैं। धीरे धीरे खेलों के क्षेत्रों में अब भारत की गिनती उच्च स्तर पर होने लगी है। मुझे लगता है कि सरकार को और भी सुविधाएं नवोदित खिलाड़ियों को देनी चाहिए। लेकिन पिछले दिनों रेलवे ने एक सर्कुलर जारी कर कहा कि खिलाड़ी ट्रेन में भाला और बड़े उपकरण ले जा सकेंगे मुझे लगता है सही नहीं है क्योंकि ट्रेन में इतनी भीड़ होती है एसी हो या आम डिब्बे सभी में भीड़ होती है और कभी कभी ज्यादा लोग भी होते हैं। ट्रेनों में यात्रियों के बीच विवाद होने की खबरें भी पढ़ने सुनने को मिलती रहती है ऐसे में भाले जैसे उपकरण को ले जाने की अनुमति देना यात्रियों के हित में नहीं लगता। एक खबर के अनुसार खिलाड़ियों को अब रेल में भाला और भारी खेल के सामान ले जाने की इजाजत होगी, भले ही ये उपकरण तय आकार से बड़े हों। हालांकि पोल वॉल्ट के पोल को इस छूट में शामिल नहीं किया गया है।
हाल ही में जारी एक सर्कुलर में रेल मंत्रालय ने रेल में गैर मानक आकार वाले बड़े और नाजुक खेल के सामान को ले जाने के लिए नियम बनाए हैं। यह छूट उन खबरों के बाद दी गई है, जिनमें बताया गया था कि खिलाड़ियों को रेल से यात्रा करते समय गैर मानक आकार के सामान को ले जाने में मुश्किलों का सामना करना पड़ता है। भाले और खेल के अन्य बड़े सामान को निर्धारित माल ढुलाई शुल्क का भुगतान करने पर रेल में उपलब्ध सामान रखने की जगह में प्राथमिकता के आधार पर ले जाया जा सकता है। मंत्रालय ने साफ किया है कि सामान के लिए अधिकतम वजन की सीमा तय करने वाले मौजूदा व्यावसायिक सर्कुलर खेल के सामान पर लागू नहीं होंगे, बशर्ते पार्सल निरीक्षण यह सत्यापित कर ले कि ले जाया जाने वाला सामान असल में खेल का सामान ही है।
खिलाड़ियों के सामान को ट्रेन के माल ले जाने वाले हिस्से में ले जाने की सुविधा दी जा सकती है। क्योंकि खिलाड़ियों पर कोई शक नहीं है लेकिन कोई बदमाश उनकी आड़ में अपने आप को खिलाड़ी बताकर भाले और अन्य सामान ले जाने की कोशिश कर सकता है और वो सबके लिए खतरनाक होगा इस बात से इनकार नहीं किया जा सकता। सरकार ऐसा रास्ता निकाले जिससे यात्री सुरक्षित रहे और खिलाड़ी अपना साधन साथ ले जा सकें। भाला या अन्य सामान ट्रेन में ले जाने से खिलाड़ियों को भी परेशानी होने की संभावना है क्योंकि इतना लंबा भाला और उपकरण जहां भी रखे रहेंगे आवागमन में परेशानी होगी और सीट पर रखने से सोने में परेशानी होगी। रेलवे इस सर्कुलर पर पुन विचार करे क्योंकि यह किसी के भी हित में नहीं कहा जा सकता।
(प्रस्तुतिः- रवि कुमार बिश्नोई संपादक दैनिक केसर खुशबू टाइम्स मेरठ)
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