कांचड़ापाड़ा 11 जून। कोलकाता के सुरेंद्रनाथ कॉलेज के बाद अब कांचड़ापाड़ा का एक इंग्लिश मीडियम स्कूल भी जांच के दायरे में आ गया है. स्कूल कैंपस के अंदर एक अच्छी तरह से सजा हुआ बेड मिला, साथ ही कंडोम के पैकेट और 1.5 करोड़ रुपये से ज़्यादा कैश मिला.
प्राइवेट इंग्लिश मीडियम स्कूल की जांच कर रही पुलिस को 1.5 करोड़ रुपये से ज्यादा कैश मिला. स्कूल के अंदर एक अच्छी तरह से सजा हुआ बेड और अलमारी के साथ कंडोम के पैकेट मिले. कैश गिनने वाली मशीनें बुधवार रात से गुरुवार सुबह 6 बजे तक चली ताकि रकम का हिसाब लगाया जा सके. पुलिस ने बाद में कन्फर्म किया कि कुल बरामद रकम 1.77 करोड़ रुपये थी. स्कूल के अकाउंट्स डिपार्टमेंट के तीन कर्मचारियों को हिरासत में लिया गया है.
बीजपुर के विधायक संदीप दास ने इस घटना पर बहुत गुस्सा दिखाया. बीजपुर के पूर्व विधायक सुबोध अधिकारी और कांचड़ापाड़ा म्युनिसिपल के पूर्व चेयरमैन कमल अधिकारी के परिवार के सदस्य स्कूल की मैनेजिंग कमिटी में हैं. इलाके में कई दिनों से अफवाहें फैल रही थी कि स्कूल के अंदर भारी मात्रा में कैश छिपा हुआ है.
बीजपुर से नए चुने गए बीजेपी विधायक संदीप दास बुधवार रात पुलिस के साथ स्कूल पहुंचे. अधिकारियों ने अलग-अलग कमरों की तलाशी ली और स्कूल के ऑफिस के अंदर बड़ी रकम मिली. ऑफिस के पास उन्हें एक अच्छी तरह से सजा हुआ, एसी वाला बेडरूम मिला. उस कमरे में एक अलमारी खोलने पर उन्हें एक शीशा और कंडोम के पैकेट मिले. स्कूल के प्रिंसिपल, विकास चंद्र पाल, इस घटना की वजह से खुद को अजीब स्थिति में पा गए.
विधायक संदीप दास ने कहा, ‘पुलिस को स्कूल के अकाउंट्स डिपार्टमेंट के एक कमरे की तलाशी के दौरान कैश से भरे पैकेट मिले. बैरकपुर के सांसद पार्थ भौमिक और कांचड़ापाड़ा म्युनिसिपल के चेयरमैन कमल अधिकारी ने यह पैसा स्कूल में छिपाया था. 2022 में सेंट्रल इन्वेस्टिगेटिव एजेंसी, एनफोर्समेंट डायरेक्टरेट (ED) के अधिकारियों ने बीजपुर के पूर्व विधायक सुबोध अधिकारी के घर पर छापा मारा था, हो सकता है कि उन्होंने भी उस समय स्कूल को फंड दिया हो.
जगह पर एक वेल फर्निश्ड बेड और कई दूसरी आपत्तिजनक चीजें भी मिलीं. हमने पुलिस से यह जांच करने को कहा है कि स्कूल में असल में कौन आता था.’ स्कूल प्रिंसिपल विकास चंद्र पाल ने कहा, ‘अकाउंट्स डिपार्टमेंट से मिले पैसे असल में स्टूडेंट एडमिशन फीस के हैं. आमतौर पर डिपार्टमेंट यह फीस बैंक में जमा करता है. मार्च और अप्रैल में फंड जमा हो गए थे, लेकिन कई वजहों से वे इस साल समय पर जमा नहीं हो पाए.’
स्कूल में एक अलमारी के अंदर अच्छे से बना हुआ बिस्तर और कंडोम के पैकेट मिलने के बारे में बिकाश बाबू ने सफाई दी. उन्होंने कहा, ‘वह कमरा असल में बीमारों का कमरा है. अगर कोई स्टूडेंट बीमार पड़ता है, तो उसे शुरू में आराम करने के लिए वहीं रखा जाता है. मैं जांच करूंगा कि कॉन्ट्रासेप्टिव वहां कैसे पहुंचे.’

