नई दिल्ली, 11 जून (ता)। पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में करारी हार झेलने के बाद तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) बड़ी टूट का सामना कर रही है। न सिर्फ करीब 60 विधायक ममता बनर्जी से अलग हो गए, बल्कि 20 से ज्यादा सांसदों ने भी बगावत दिखा दी है। इस टूट से परेशान ममता बनर्जी को सोनिया गांधी ने कांग्रेस में विलय का ऑफर दिया था, जिसे वह मानने को तैयार हो गई हैं। सूत्रों के मुताबिक ममता बनर्जी तो टीएमसी का कांग्रेस में विलय करने के लिए तैयार हैं, लेकिन उनके भतीजे अभिषेक बनर्जी ने राहुल गांधी के साथ बैठक में मल्लिकार्जुन खडग़े वाला पद मांग लिया है। उन्होंने कहा है कि ममता बनर्जी को कांग्रेस राज्यसभा भेजे और वहां नेता विपक्ष का पद भी दे। अभी राज्यसभा में नेता विपक्ष का पद कांग्रेस प्रमुख मल्लिकार्जुन खडग़े के पास है।
बता दें कि लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी और तृणमूल कांग्रेस के राष्ट्रीय महासचिव अभिषेक बनर्जी ने गत दिवस राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में मुलाकात की। यह बैठक विपक्षी गठबंधन इंडिया की ओर से आपसी समन्वय मजबूत करने और एकजुटता बनाए रखने के प्रयासों के बीच हुई। 10 जनपथ पर हुई इस बैठक से एक दिन पहले, तृणमूल कांग्रेस प्रमुख ममता बनर्जी ने पूर्व कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी से उनके आवास पर मुलाकात की थी। इस बैठक में सोनिया गांधी ने ममता बनर्जी को विलय करने पर राष्ट्रीय उपाध्यक्ष बनाने का प्रस्ताव दिया था, जबकि अभिषेक बनर्जी को कांग्रेस महासचिव का ऑफर दिया गया है। हालांकि, इस ऑफर पर विचार करने के लिए ममता बनर्जी ने कुछ दिनों का समय मांगा है।
ममता बनर्जी की पार्टी तृणमूल कांग्रेस में लगातार जारी टूट के बीच काकोली घोष के नेतृत्व वाले टीएमसी बागी गुट ने 19 लोकसभा सांसदों के नाम की लिस्ट जारी कर दी। इसमें ममता की करीबी मानी जाने वाली जादवपुर से सांसद सायोनी घोष, यूसुफ पठान और शत्रुघ्न सिन्हा का भी नाम शामिल है। आठ जून को काकोली घोष ने दावा किया था कि उन्होंने 20 लोकसाभा सांसदों के समर्थन वाला पत्र स्पीकर ओम बिड़ला को भेजा है। वहीं, गत दिवस राज्यसभा सांसद सुष्मिता देव ने भी पार्टी और पद से इस्तीफा दे दिया। पिछले तीन दिनों में टीएमसी के दो राज्यसभा सांसद पार्टी छोड़ चुके हैं। इससे पहले आठ जून को सुखेंदु शेखर ने राज्यसभा से इस्तीफा दे दिया था, पार्टी भी छोड़ दी थी। इसके बाद टीएमसी के लोकसभा में 28 में से 20 सांसद और राज्यसभा में 13 में से दो सांसद यानी कुल 22 सांसद टूट चुके हैं। वहीं तीन जून को बंगाल के 80 में से 58 विधायक अलग गुट बना चुके हैं।
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