मेरठ 04 जून (प्र)। नगर निगम के तमाम दावों और लाखों के खर्च के बावजूद नाले कचरे से अटे हैं। उनके पुल-पुलियों के नीचे जलनिकासी जाम हैं। सबसे डरावनी तस्वीर सुभाष नगर और आबूनाले की है। डेढ़ साल पहले शुरू हुआ सुभाषनगर नाले का निर्माण आज भी अधूरा है। यह वही नाला है। जिसकी वजह से पिछले साल जिमखाना-बुढ़ाना रोड घुटनों तक पानी में डूब गई थी और खुद डीएम व नगर आयुक्त को पानी में उतरना पड़ा था। शासन की कड़ी फटकार के बाद भी काम लटका है। यदि मानसून की पहली बरसात से पहले इसे पूरा नहीं किया तो जिमखाना-बुढ़ाना गेट की दुकानों और मकानों में पानी भरना तय है। दयानंद नर्सिंग होम के सामने आनाले के कवर्ड एरिया के नीचे कूड़ा जलनिकासी रोक रहा है। मवाना रोड पुल और रक्षापुरम एसटीपी के पुल के नीचे कसेरूखेड़ा नाले की जलनिकासी कचरा जमा होने से बाधित है। ये तो कुछ उदाहरण हैं। सूरजकुंड वाहन डिपो क्षेत्र के 37 वार्डों में नाला सफाई की यही हकीकत है। 25 जून तक मानसून आ सकता है।
बुधवार को पड़ताल में सूरजकुंड वाहन डिपो क्षेत्र के 37 वाड़ों में नाला सफाई की स्थिति आधी-अधूरी मिली। इस क्षेत्र मैं आबूनाला-2 ओडियन नाला, कसेरूखेड़ा नाला, मकाचीन नाला सेंट लुक्स और पांडव नगर वाला नाला सहित आठ बड़े नाले हैं। आबूनाला दो कंकरखेड़ा से बेगमपुल तक कैंट क्षेत्र में पड़ता है। इसके बाद करीब नौ किमी. लंबा यह नाला नगर निगम क्षेत्र में है। बेगमपुल के बाद दयानंद नर्सिंग होम के सामने कवर्ड एरिया में सफाई नहीं हुई। आगे आदर्श नगर मुहल्ले के सामने नाले में कचरा जमा है। कचहरी पुल मेघदूत पुलिया, विक्टोरिया पुल, फूलबाग कालोनी की पुलिया, शास्त्रीनगर डी ब्लाक की पुलिया के नीचे कचरा और गाद जमी है। बीच- बीच में नाले की सफाई हुई है। बरसात में पुल-पुलिया के नीचे जमा कचरा नाला उफनने और जलभराव का कारण बन सकता है। आबूनाले से सेंट लुक्स अस्पताल तक नाला जुड़ा है। इसके ओवरफ्लो होने से साकेत, गोल मार्केट और मनोरंजन पार्क में जलभराव होता है।
सूरजकुंड वाहन डिपो के क्षेत्र में ओडियन नाला कमेला पुल के आगे एल ब्लाक शास्त्रीनगर तक कचरे से अटा है। पांडव नगर नाला डेरी फार्म से शुरू होता है। तीन किमी. लंबे नाले में पांडव नगर-यादगागार वाले हिस्से में सफाई नदारद है। इस नाले के ओवरफ्लो होने से जेलचुंगी के पास स्थित लाल क्वार्टर, सर्वाेदय नगर में जलभराव होता है। मोहनपुरी नाला सूरजकुंड पुल के नीचे कचरे से चौक है। इससे नाला ओवरफ्लो होकर बच्चा पार्क में जलभराव की स्थिति बन सकती है।
अकेले सूरजकुंड वाहन डिपो क्षेत्र में दो महीनों में नाला सफाई पर करीब 15 लाख रुपये का डीजल फूंक दिया गया लेकिन पुल-पुलियों के पास से सिल्ट और कूड़ा गायब नहीं हुआ। वाहन डिपो प्रभारी नीरज कुमार ने बताया कि एक अप्रैल से नालों की सफाई शुरू की गई थी। बड़े आठ नालों की सफाई एक बार की जा चुकी है। कुल छोटे-बड़े 118 नाले हैं। छह पोकलेन, एक जेसीबी, 10 ट्रैक्टर और दो डंपर इस काम में लगे हैं। दावा औसतन छह घंटे रोजाना नाला सफाई का है।
सुभाष नगर नाले की जलनिकासी सुचारु नहीं हुई तो उफनेंगे छोटे नाले
सुभाष नगर का नाला इंदिरा चौक से शुरू होकर हाशिमपुरा, लक्ष्मीनगर होते हुए मोहनपुरी के बड़े नाले में गिरता है। करीब 500 मीटर नाले में मशीन नहीं पहुंच सकती। इस हिस्से की तलीझाड सफाई करके पक्का बनाने का काम डेढ़ साल पहले अनुज एसोसिएट्स ने शुरू किया था। 275 मीटर नाला पहले पक्का किया जाना था, बाद में 100 मीटर और बढ़ा दिया गया। मौके की स्थिति से ये है कि इंदिरा चौक नलकूप पुलिया के पास नाला पूरी तरह से बंद है। बगल की दीवार तोड़कर वैकल्पिक तौर पर सुभाष नगर बाजार वाले नाले से जलनिकासी की जा रही है। यह व्यवस्था सामान्य दिनों में तो पर्याप्त है, लेकिन बरसात में काम नहीं चलेगा। अभी तक सुभाष नगर और हाशिमपुरा के बीच करीब 250 मीटर नाला पक्का हुआ है। लक्ष्मीनगर तक यह काम पूरा नहीं है। बरसात से आसपास के मुहल्ले जिमखाना, बुढाना गेट, पूर्वा अहिरान की जलनिकासी बाधित हो सकती है। काम में देरी को लेकर मुख्य अभियंता निर्माण प्रमोद कुमार सिंह का कहना है कि ठेकेदार ने 15 दिन में नाले का काम पूरा करने की बात कही है।
चौपाटी के पीछे 300 मीटर कसेरूखेड़ा के नाले की सफाई का नहीं निकला हल
कसेरूखेड़ा नाले में मवाना रोड पुल से लेकर बीएनजी स्कूल किला रोड तक मेडा की चौपाटी के पीछे करीब 700 मीटर नाले की सफाई की जगह बन गई है। करीब 300 मीटर हिस्से में बिजली के खंभे होने से मशीन जाने में समस्या है। नगर आयुक्त और मेडा उपाध्यक्ष दो बार निरीक्षण कर चुके, लेकिन समस्या जस की तस है। दूसरी समस्या बीएनजी स्कूल किला रोड पर नया पुल बनाने का काम शुरू होने से खड़ी हो सकती है। यदि 25 जून तक पुल को तोड़कर नए पुल के कल्वर्ट पूरे नहीं किए तो डायवर्जन लाइन से जलनिकासी में परेशानी हो सकती है। सूरजकुंड वाहन डिपो क्षेत्र में सबसे अधिक जलभराव वाला क्षेत्र है। हर साल बरसात में जलनिकासी के लिए मशीनें लगानी पड़ती हैं। इसके बावजूद जलनिकासी की बाधाएं दूर करने को अधिकारी गंभीर नहीं हैं। तली झाड़ सफाई भी नदारद है।
नगर आयुक्त सौरभ गंगवार का कहना है कि कसेरूखेड़ा नाले की दीवार के पीछे 300 मीटर की सफाई के लिए मेडा उपाध्यक्ष से बात हुई है। एक-दो दिन में निरीक्षण करके एनजी स्कूल के पास चल रहे निर्माण की स्थिति देखकर जरूरी कदम उठाए जाएंगे। कमालपुर में निर्माणाधीन एसटीपी जोड़ने के काम के दौरान आबूनाले को संकरा कर दिया गया, जिससे जल प्रवाह बाधित हो रहा है। नमामि गंगे इकाई के अधिकारियों को इसे सुधारने के लिए 24 घंटे का समय दिया है। सुभाष नगर नाले के निर्माण की धीमी गति पर कड़ी नाराजगी जताई गई। काम पूरा करने के लिए 15 दिन का समय दिया गया है। आबूनाले के पुल-पुलिया के नीचे की स्थिति देखी जाएगी।

