मेरठ 04 जून (प्र)। मेरठ विकास प्राधिकरण की एकीकृत टाउनशिप परियोजना उत्तर प्रदेश की पहली ट्रांजिट ओरिएंटिड डेवलपमेंट टाउनशिप है। यह टाउनशिप चार गांवों की 294 हेक्टेयर भूमि में विकसित की जाएगी। प्रदेश सरकार इस परियोजना के लिए वित्तीय सहायता में कोई कमी नहीं आने दे रही है, वहीं मेडा ने भी इसका लेआउट तैयार करने के लिए एजेंसी के चयन की प्रक्रिया भी शुरू कर दी है। किसानों ने 164 हेक्टेयर भूमि सहमति से दे दी है, लेकिन शेष 130 हेक्टेयर भूमि का अधिग्रहण नहीं हो पा रहा है। इस स्थिति को देखते हुए अधिकारियों ने जिला प्रशासन से चिह्नित भूमि के अधिग्रहण की मांग की है।
जिला प्रशासन ने अधिग्रहण की घोषणा से पहले शासन से सामाजिक समाघात अध्ययन (सोशल इंपेक्ट असिस्मेंट) के लिए एजेंसी का चयन करने की मांग की है। नई नीति के अनुसार, किसी भी बड़े प्रोजेक्ट के लिए भूमि अधिग्रहण से पहले यह अध्ययन कराना अनिवार्य है। प्रशासनिक अधिकारियों का कहना है कि शासन स्तर से जैसे ही एजेंसी नियुक्त की जाएगी उसी के साथ जिला प्रशासन द्वारा उक्च भूमि के अधिग्रहण की घोषणा का प्रकाशन करा दिया जाएगा।
टोओडी (ट्रांजिट ओरिएंटिड डेवलपमेंट) आधारित इस इंटीग्रेटिड टाउनशिप के लिए मेरठ में दो साल से अधिक समय से प्रक्रिया चल रही है। मोहिउद्दीनपुर के पास चार गांवों की 294 हेक्टेयर भूमि चिह्नित कर किसानों की सहमति से भूमि खरीद का कार्य आरंभ किया गया था। इस परियोजना की लागत 2500 करोड़ रुपये से अधिक है. जिसमें प्रदेश सरकार द्वारा अब तक 809 करोड़ रुपये प्राधिकरण को दिए जा चुके हैं। टाउनशिप में 41 हजार से अधिक परिवारों को आवास उपलब्ध कराने की योजना है। मुख्यमंत्री ने 4 अगस्त 2025 को इसका शिलान्यास भी किया है। मेडा दीपावली तक इसके दो ब्लाक को लांच करने की तैयारी भी कर रहा है।
ये है सामाजिक समाघात अध्ययन
किसी भी बड़े बुनियादी ढांचा अथवा आवासीय योजना की स्थापना से पहले यह कानूनी सर्वे किया जाना अनिवार्य है। इस सर्वे में प्रोजेक्ट से प्रभावित होने वाले परिवारों की पहचान की जाती है। प्रोजेक्ट से उनकी आजीविका पर पड़ने वाले असर, प्रभावित परिवारों का विस्थापन और पुनर्वास की आवश्यकता का आकलन, चिह्नित जमीन में मौजूद सार्वजनिक संपत्तियों पर प्रभाव तथा उनके विकल्प का निर्धारण करके प्रस्ताव तैयार किया जाता है। सर्वे के दौरान प्रभावित गांवों में चौपाल लगाकर जनसुनवाई करके किसानों की आपत्तियों और सुझाव दर्ज किए जाते हैं।
जिलाधिकारी डा. वीके सिंह के अनुसार मेडा ने भूमि अधिग्रहण कराने की मांग की है। इसके लिए सामाजिक समाघात अध्ययन कराया जाना अनिवार्य है। इस अध्ययन के लिए शासन से एजेंसी का चयन करने की मांग की गई है। एजेंसी चयन के साथ ही अधिग्रहण की प्रक्रिया शुरू हो जाएगी।

