वाराणसी 02 जून। सोशल मीडिया के जरिए देश के विभिन्न राज्यों में दो लाख लोगों को आईपीएल का झांसा देकर ठगी करने वाले अंतरराज्यीय गिरोह के सरगना समेत 13 आरोपियों को क्राइम ब्रांच और कैंट पुलिस ने रविवार की देर रात टकटकपुर स्थित फ्लैट से गिरफ्तार किया। आरोपियों के कब्जे से 17 मोबाइल, 10 लैपटॉप, क्रिप्टो करेंसी, डिजिटल वॉलेट में एक करोड़ रुपये बरामद किए गए। मुंबई के मलिक फर्म के जरिए लगभग 700 करोड़ रुपये आईपीएल के बहाने हड़पा गया। गिरफ्तार इन आरोपियों को निवेश का सिर्फ छह प्रतिशत कमीशन दिया जाता था।
अपर पुलिस आयुक्त अपराध आलोक प्रियदर्शी ने पत्रकारों को बताया कि गिरफ्तार आरोपियों में स्थानीय स्तर पर गिरोह का सरगना मुंबई के पालघर नालासुपारा ईस्ट के यशवंत विहार टाउनशिप निवासी रितेश दिवाकर शुक्ला, जो कि कपसेठी के दिलावरपुर का मूल निवासी है। चोलापुर के करमा निवासी रवि यादव, सुल्तानपुर के दौड़ापुर खेड़ी निवासी अर्पित तिवारी, फूलपुर के सिंधोरा बाजार के खड़खड़ा निवासी अमन सिंह, जौनपुर के जमालापुर निवासी विकास पटेल, बिहार के गया गुरारु थाना क्षेत्र के बाजूबीघा निवासी जियाउलहक, राजस्थान के जयपुर मानसरोवर निवासी सचिन सिंह उर्फ शैलेंद्र, गौरव चौहान और देवेश चौहान, फतेहपुर राधानगर थाना क्षेत्र के जयराम नगर निवासी अनिकेत कुमार, जौनपुर के सुजानगंज रामसहाय बिलबार निवासी अमित तिवारी, इटावा के बड़पूरा थाना क्षेत्र के रमिकावर निवासी सौरभ चौहान, बहराइच के कोतवाली थाना क्षेत्र के हलिया बुलबुल निवासी राहुल मौर्या है। इसमें अधिकतर आरोपियों का ठिकाना मुंबई के आचले स्थित यशवंत विहार टाउनशिप में था।
स्थानीय स्तर पर गिरोह का सरगना रितेश दिवाकर शुक्ला और उसका दाहिना अंग चोलापुर निवासी रवि यादव है। यह अपने साथियों के साथ मिलकर फेसबुक, इंस्टाग्राम, यूट्यूब पर मलिक फर्म के जरिए बेटिंग एप में निवेश कराने के लिए फर्जी विज्ञापन बनाकर वायरल करते थे। मुंबई, दिल्ली, पुणे, गुजरात, यूपी,बिहार, झारखं, एमपी समेत अन्य कई राज्यों में इनका नेटवर्क था। छह प्रतिशत कमीशन पर काम करते थे। औसतन पौने दो करोड़ रुपये महीने इनकी कमाई थी।
अपर पुलिस आयुक्त, अपराध आलोक प्रियदर्शी ने बताया कि मुखबिर से आइपीएल में सट्टेबाजी किए जाने की सूचना मिली थी। जांच में सामने आया कि गिरोह फेसबुक पर फर्जी आइडी बनाता और इस पर प्रसिद्ध यू-ट्यूबर और इंटरनेट मीडिया इन्फ्लुएंसर के फर्जी विज्ञापन दिखाते थे।
एआइ के जरिये बनाए गए इन फर्जी विज्ञापनों में यू-ट्यूबर या इंटरनेट मीडिया इन्फ्लुएंसर सट्टा लगाकर खूब पैसा कमाने की बात करते नजर आते थे। इन विज्ञापनों को दिखाकर लोगों को फंसाया जाता और अधिक मुनाफे का लालच देकर आनलाइन सट्टे में रुपये लगवाया जाता था।

