भुवनेश्वर 28 मई। जिस मां ने अपने बेटों को जन्म दिया, उन्हें पाल-पोसकर बड़ा किया, उसी मां के अंतिम समय में बेटे ही साथ छोड़ देंगे, यह शायद किसी ने नहीं सोचा होगा। ओडिशा के बालेश्वर जिले से इंसानियत को शर्मसार कर देने वाली एक ऐसी ही घटना सामने आई है, जहां दो बेटों की जिद और संपत्ति के विवाद के बीच एक वृद्ध मां का शव करीब 10 घंटे तक घर में पड़ा रहा।
आखिरकार पुलिसकर्मियों ने बेटे का फर्ज निभाते हुए न सिर्फ अर्थी को कंधा दिया, बल्कि पूरे सम्मान के साथ अंतिम संस्कार भी कराया। यह मार्मिक घटना बस्ता थाना क्षेत्र के संतोषपुर पंचायत अंतर्गत लोकनाथपुर गांव की है। गांव के बंशीधर दास और उनकी पत्नी तुलसी दास के तीन बेटे थे। बताया जाता है कि बड़ा बेटा लंबे समय से लापता है।बाकी दो बेटों ने आपसी सहमति से माता-पिता की जिम्मेदारी तक बांट ली थी।
मंझले बेटे ने पिता को अपने पास रखा, जबकि छोटे बेटे राकेश ने मां तुलसी की देखभाल की जिम्मेदारी ली थी।कुछ समय पहले बंशीधर दास की मौत हो गई थी।इसके बाद तुलसी छोटे बेटे के साथ रह रही थीं।मंगलवार को वृद्धा ने भी अंतिम सांस ली। मां की मौत के बाद परिवार में शोक की जगह विवाद शुरू हो गया।
परिवार वैष्णव परंपरा से जुड़ा होने के कारण मंझले बेटे और गांव के कुछ लोगों का कहना था कि वृद्धा का अंतिम संस्कार घर के परिसर में ही किया जाए। वहीं छोटा बेटा राकेश इस बात पर अड़ गया कि उसकी मां की अंतिम इच्छा नदी किनारे अंतिम संस्कार कराने की थी।
बस इसी बात को लेकर दोनों भाइयों के बीच तीखी बहस शुरू हो गई। देखते ही देखते मामला इतना बढ़ गया कि किसी ने भी मां के शव को हाथ लगाने तक की पहल नहीं की। घर के भीतर वृद्धा का पार्थिव शरीर पड़ा रहा और परिवार के लोग आपसी जिद में उलझे रहे।
गांव वालों ने भी दोनों भाइयों को समझाने की कोशिश की, लेकिन कोई नतीजा नहीं निकला। करीब 10 घंटे तक शव घर में ही पड़ा रहा। गांव में यह घटना चर्चा का विषय बन गई।
लोग बेटों के व्यवहार को लेकर नाराजगी जताने लगे। इसी बीच मामले की सूचना अमरदारोड पुलिस चौकी को दी गई।
पुलिस अधिकारियों ने दोनों भाइयों को काफी समझाने का प्रयास किया, लेकिन दोनों अपनी-अपनी जिद पर अड़े रहे। जब कोई रास्ता नहीं निकला तो चार पुलिसकर्मियों ने खुद आगे बढ़कर वृद्धा की अर्थी को कंधा दिया।
पुलिस टीम शव को लेकर सुवर्णरेखा नदी के ओड़ियापड़ा बालू घाट पहुंची, जहां पूरे धार्मिक रीति-रिवाज के साथ अंतिम संस्कार किया गया। पुलिसकर्मियों ने समाधि के लिए मिट्टी भी खोदी और अंतिम संस्कार की सभी जिम्मेदारियां निभाईं।

