लखनऊ 18 मई। हाई कोर्ट के आदेश पर रविवार को कचहरी रोड से अवैध कब्जे हटाए गए, जिसमें अधिकतर वकीलों के चैंबर व दुकानें थीं। पुलिस और पीएसी बल की मौजूदगी में नगर निगम के बुलडोजर ने सुबह करीब नौ बजे से अवैध कब्जे हटाना शुरू किया तो वकीलों के भारी विरोध का सामना करना पड़ा। नारेबाजी और पथराव के बीच पुलिस को लाठीचार्ज कर वकीलों को खदेड़ना पड़ा। कार्रवाई के दौरान एक वकील ने आत्महत्या का प्रयास किया तो कुछ जमीन पर लेट गए। कुछ वकीलों ने लाठीचार्ज में चोटिल होने का भी आरोप लगाया है। अधिकारियों का कहना है कि पथराव में एक सिपाही के घायल होने पर बल प्रयोग कर भीड़ को तितर-बितर किया गया। इस दौरान 100 के करीब चैंबर ध्वस्त किए गए। विरोध के चलते कार्रवाई दोपहर डेढ़ बजे रोकनी पड़ी। शाम को फिर टीम जुटी, लेकिन सूर्यास्त होने पर कार्रवाई स्थगित कर दी गई। नगर निगम को 25 मई को हाई कोर्ट में शपथ पत्र देना है, उससे पहले शेष अवैध कब्जे भी हटाए जाएंगे। लाठीचार्ज के विरोध में अधिवक्ता तीन दिन कार्य नहीं करेंगे।
कई वकीलों ने आरोप लगाया कि लाल निशान लगाने के बावजूद एक मजार को नहीं तोड़ा गया। इसी तरह कुछ वकीलों ने बार एसोसिएशन के दबाव में दो कब्जों को नहीं तोड़ने का आरोप लगाया, जिससे वकील आक्रोशित हो गए। भीड़ में शामिल कुछ लोगों ने पुलिस पर पथराव किया, जिसमें एक सिपाही घायल हो गया। सेंट्रल बार एसोसिएशन के महामंत्री अवनीश दीक्षित उर्फ हनी वकीलों के साथ सड़क पर धरने पर बैठ गए। उन्होंने कहा कि कई वकीलों ने पहले ही अपने चैंबर खाली कर दिए थे। फिर भी प्रशासन भारी पुलिस बल और पीएसी लेकर पहुंचा। डीसीपी पश्चिम कमलेश दीक्षित ने वकीलों को समझाने का प्रयास किया, लेकिन कोई सहमति नहीं बन सकी। अपर नगर आयुक्त पंकज श्रीवास्तव ने बताया कि मजार के बगल में बनी दुकान पर लाल निशान लगाया गया था, जिसे तोड़ा गया है।
यह है हाई कोर्ट का आदेश
न्यायमूर्ति राजेश सिंह चौहान और न्यायमूर्ति राजीव भारती की पीठ ने अधिवक्ता अनुराधा सिंह, अधिवक्ता देवाशी श्रीवास्तव और देवाशी की माता अरुणिमा श्रीवास्तव की तरफ से 11 मार्च को दाखिल याचिका पर सुनवाई के दौरान कचहरी रोड से अवैध कब्जों को हटाने का आदेश दिया था, लेकिन नगर निगम ने यह कहकर कोई कार्रवाई नहीं की थी कि पर्याप्त पुलिस बल के विना अवैध कब्जों हटाना संभव नहीं है। इसके बाद हुई दो सुनवाई के दौरान कोर्ट की नाराजगी देखने को मिली और अगली सुनवाई में कोर्ट ने जिला प्रशासन को पर्याप्त पुलिस बल उपलब्ध कराने के साथ ही 25 मई को कार्रवाई से जुड़ी रिपोर्ट भी तलब की थी।

