
मेरठ 15 मई (प्र)। हस्तिनापुर (सुरक्षित) विधानसभा सीट से जुड़े मिथक और तमिलनाडु में दो साल पहले गठित हुई पार्टी की प्रचंड जीत से उत्साहित नगीना के सांसद व आजाद समाज पार्टी (आसपा) के अध्यक्ष चंद्रशेखर यहां से विधानसभा चुनाव लड़ने की तैयारी में जुटे हैं। उनकी दावेदारी को लेकर हस्तिनापुर में दीवारों पर नारे लिखे गए हैं। वह कई बार हस्तिनापुर क्षेत्र में सभा भी कर चुके हैं।
चंद्रशेखर के गतिविधियों से भाजपा के दावेदारों की धड़कनें बढ़ी हुई हैं। यहां से 2017 और 2022 में दिनेश खटीक भाजपा से विधायक चुने गए। वह वर्तमान में प्रदेश के जलशक्ति राज्यमंत्री हैं। एक मिथक है कि जिस भी पार्टी का उम्मीदवार इस सीट से चुनाव जीतता है, उसकी ही प्रदेश में सरकार बनती है। दशकों से यह मिथक कायम भी है। वहीं, जब से तमिलनाडु में अभिनेता जोसेफ विजय की टीवीके ने जीत दर्ज की है, चंद्रशेखर ने खुद को उनसे जोड़ना शुरू कर दिया है।
चंद्रशेखर कहते हैं कि विजय ने दो साल पहले पार्टी बनाई और छह महीने के संघर्ष में सभी पुरानी पार्टियों को परास्त करते हुए सरकार बना ली। विजय सत्ता ही नहीं व्यवस्था परिवर्तन का आंदोलन चला रहे थे। मेरा भी लक्ष्य व्यवस्था परिवर्तन का है। सहारनपुर में आजाद समाज पार्टी के 17 से 19 मई तक प्रस्तावित चिंतन शिविर के बाद वह पदयात्रा व रात्रि विश्राम शुरू करेंगे हस्तिनापुर से चुनाव लड़ने की तैयारी के सवाल पर कहते हैं कि 2024 में नगीना सीट से लोकसभा चुनाव लड़े और जीते। हालांकि पहले वह विधानसभा चुनाव लड़ना चाहते थे। अब समय प्रदेश में व्यवस्था परिवर्तन का है, इसलिए वह विधानसभा चुनाव में उतरेंगे। उनकी पार्टी अगर हस्तिनापुर से चुनाव लड़ने को कहेगी तो वह शत-प्रतिशत लड़ेंगे। गठबंधन के सवाल पर कहना है कि उनकी तो प्रदेश की सभी सीटों पर चुनाव लड़ने की तैयारी है।
भाजपा जैसी पार्टी ने बंगाल में अकेले चुनाव के बजाय एनडीए के साथ लड़ा, ऐसे में उनकी पार्टी गठबंधन करेगी या अकेले लड़ेगी यह पार्टी तय करेगी। हस्तिनापुर से ही चंद्रशेखर चुनाव क्यों लड़ेंगे? इस सवाल पर उनकी पार्टी के नेताओं का कहना है कि हस्तिनापुर से जो विधायक बनता है, उसकी पार्टी की सरकार बनती है। अगर यह मिथक इस बार भी सच साबित हुआ तो वह विधायक के साथ सरकार भी बनाएंगे। ऐसा नहीं हुआ तो मिथक टूटेगा और अंधविश्वास सामने आएगा।

