मेरठ 15 मई (प्र)। योगी सरकार की माफिया सूची में शामिल पश्चिमी यूपी के गैंगस्टर उधम सिंह की तलाश में यूपी, उत्तराखंड और दिल्ली में पुलिस की पांच टीमें दबिश दे रही हैं। फर्जी ढंग से जमानत पाने के मामले में बुधवार रात को एसएसपी अविनाश पांडेय ने इस गैंगस्टर पर 25 हजार रुपये का इनाम घोषित कर दिया। एक तरफ पुलिस गैंगस्टर की घेराबंदी में जुटी है, दूसरी ओर उसका सीओ के साथ एक पुराना वीडियो भी वायरल हो रहा है। इसमें वह तत्कालीन सीओ के साथ टशन दिखाकर वीडियो बनवाता नजर आ रहा है।
चार साल आठ महीने बाद 26 मार्च को उन्नाव जेल से जमानत पर रिहा हुए डी-50 गैंग के सरगना उधम सिंह पर फर्जी दस्तावेजों के आधार पर जमानत कराने का आरोप है। बीती नौ अप्रैल 2026 को उसके खिलाफ सरूरपुर थाने में फर्जी आधार कार्ड और दस्तावेजों के आधार पर जमानत कराने के मामले में अनवर ने प्राथमिकी दर्ज कराई।
अनवर का आरोप है कि शेखर नामक व्यक्ति ने बिना किसी दलाली के ऋण पास कराने का भरोसा दिलाकर उसके आधार कार्ड, पैन कार्ड ले लिए थे। शेखर ने उसे सरधना कचहरी ले जाकर कुछ दस्तावेजों पर हस्ताक्षर भी कराए। इसके बाद ऋण पास कराए बिना उसे धमकाकर भगा दिया गया। बाद में पता चला कि ऋण पास कराने के नाम पर लिए गए दस्तावेज और हस्ताक्षर उधम सिंह को जमानत दिलाने में इस्तेमाल किए थे।
प्राथमिकी दर्ज करने के बाद पुलिस ने इसकी रिपोर्ट न्यायालय को भेजी। इसके बाद न्यायालय ने गैंगस्टर की जमानत रद्द कर दी। न्यायालय ने ऊधम के खिलाफ गैर जमानती वारंट जारी कर दिया। अब इनाम घोषित करने के बाद न केवल पुलिस बल्कि एसटीएफ भी उसकी गिरफ्तारी के प्रयास में जुटी है।
सोशल मीडिया पर वायरल हुआ वीडियो 22 जुलाई 2021 का बताया जा रहा है। तत्कालीन सीओ सरधना आरपी शाही सरूरपुर पुलिस के साथ उधम सिंह के गांव करनावल स्थित उसके घर पहुंचे थे। पुलिस टीम ने पूछताछ के लिए गैंगस्टर से थाने चलने की बात कही थी। यहां गैंगस्टर टशन दिखाता हुआ कहता दिख रहा है कि सीओ साहब के साथ भी (वीडियो) बनाना है। उनके साथ जा रहा हूं।
पुलिस और उधम सिंह के परिवार के लोग वीडियो में दिख रहे हैं और हंस भी रहे हैं। एक महिला यह कहती सुनी जा सकती है कि हम भी तो (वीडियो में) आएं। इस वीडियो में सीओ का एक गैंगस्टर के सामने पुलिस वाला रौब दिखाई नहीं दे रहा है।
उधम सिंह पर 50 से अधिक हत्या, रंगदारी, लूट और डकैती की प्राथमिकी दर्ज हैं। गैंगस्टर योगेश भदौड़ा से गैंगवार को लेकर भी वह चर्चाओं में रहा है। उसने 2011 में गाजियाबाद अदालत में आत्मसमर्पण किया था। वह दस साल तक जेल में बंद रहा और जेल से ही अपना गैंग चलाता रहा। खौफ के कारण गवाह उसके खिलाफ गवाही नहीं देते। इसके चलते वह कई प्राथमिकी दर्ज में बरी भी हुआ।
साल 2021 में उसे जमानत मिली और वह जेल से बाहर आया। रिहाई के बाद 19 जुलाई 2021 को उसने सरकारी बैंक स्टाफ को धमकाया। उसने 30 लोगों को जबरन लोन देने को कहा। इन्कार पर जान से मारने की धमकी दी। पुलिस ने उसे गिरफ्तार कर लिया था। उधम सिंह पर राष्ट्रीय सुरक्षा कानून (रासुका) के अंतर्गत कार्रवाई भी की गई थी।

