नई दिल्ली 14 मई। केंद्र सरकार ने चीनी के निर्यात (एक्सपोर्ट) पर प्रतिबंध लगा दिया है। ये रोक देश में चीनी यानी शुगर की उपलब्धता बनाए रखने और कीमतों को काबू में रखने के लिए लगाई गई है। 13 मई से लगाई गई यह रोक 30 सितंबर 2026 तक या अगले आदेश तक लागू रहेगी। वाणिज्य और उद्योग मंत्रालय ने इस संबंध में नोटिफिकेशन जारी कर दिया है।
डायरेक्टोरेट जनरल ऑफ फॉरेन ट्रेड (DGFT) की ओर से जारी नोटिफिकेशन के मुताबिक, रॉ शुगर, व्हाइट शुगर और रिफाइंड शुगर की एक्सपोर्ट पॉलिसी में बदलाव किया गया है। पहले ये ‘रिस्ट्रिक्टेड’ (प्रतिबंधित) कैटेगरी में थे, जिन्हें अब ‘प्रोहिबिटेड’ (निषेध) कैटेगरी में डाल दिया गया है। इसका मतलब है कि अब बिना सरकारी इजाजत के चीनी का निर्यात नहीं किया जा सकेगा।
इन व्यवस्थाओं के तहत निर्यातकों को निर्धारित मात्रा में चीनी को इन गंतव्यों पर काफी कम या शून्य सीमा शुल्क पर भेजने की अनुमति मिलती है। विदेश व्यापार महानिदेशालय का यह आदेश अग्रिम प्राधिकरण योजना, सरकार-से-सरकार निर्यात और उन खेपों पर लागू नहीं होगा जो पहले से भौतिक निर्यात प्रक्रिया में हैं। चीनी विपणन वर्ष 2025-26 (अक्टूबर से सितंबर) के लिए खाद्य मंत्रालय ने शुरुआत में 15 लाख टन निर्यात की अनुमति दी थी।
फिर 5,00,000 टन का अतिरिक्त कोटा खोला गया जिसमें से केवल 87,587 टन को मंजूरी दी गई। इस प्रकार कुल मिलाकर लगभग 16 लाख टन चीनी निर्यात की अनुमति दी गई। खाद्य मंत्रालय और चीनी मिलों को उम्मीद थी कि समूचे 2025-26 विपणन वर्ष में 7.5-8 लाख टन का निर्यात होगा। भारतीय चीनी एवं जैव-ऊर्जा विनिर्माता संघ’ (इस्मा) के अनुसार, भारत का चीनी उत्पादन 2025-26 विपणन सत्र में अप्रैल तक 7.32 प्रतिशत बढ़कर 2.752 करोड़ टन हो गया।
इसकी मुख्य वजह महाराष्ट्र और कर्नाटक में अधिक उत्पादन रहा। इस्मा ने अनुमान लगाया है कि एथनॉल में रूपांतरण के बाद 2025-26 सत्र में कुल उत्पादन 2.93 करोड़ टन रहेगा, जो 2024-25 के 2.612 करोड़ टन से अधिक है। किसी वस्तु के निर्यात पर अंकुश से कीमतों में बढ़ोतरी को रोका जा सकता है।
खासकर महंगाई और पश्चिम एशिया संघर्ष से उत्पन्न अनिश्चितता के बीच इस कदम के कई मायने हैं। भारत ने अक्टूबर 2022 में चीनी के निर्यात पर प्रतिबंध लगाया था और बाद में इसे समय-समय पर बढ़ाया जाता रहा है। दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा चीनी उत्पादक देश सरकार द्वारा मिलों को आनुपातिक रूप से कोटा वितरित करके निर्यात को नियंत्रण में रखता है।

