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    Home»देश»देवी छिन्नमस्ता की आराधना भगवान परशुराम भी करते थे, कांप उठते थे असुर
    देश

    देवी छिन्नमस्ता की आराधना भगवान परशुराम भी करते थे, कांप उठते थे असुर

    adminBy adminMay 13, 2026No Comments3 Views
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    नई दिल्ली, 13 मई (ता)। दस महाविद्याओं में से एक, देवी छिन्नमस्ता तंत्र साधना में विशेष स्थान रखती हैं, जिनसे संबंधित कथा देवीभागवत पुराण में वर्णित है। स्वयं भगवान परशुराम भी श्री छिन्नमस्ता विद्या की उपासना किया करते थे। आइए जानते हैं माता के अलौकिक स्वरूप और उनके प्राकट्य से जुड़ी पौराणिक कथा के बारे में।
    माता का स्वरूप अत्यंत रौद्र होने के साथ-साथ त्याग और करुणा का भी प्रतीक है। माता ने अपने बाएं हाथ में स्वयं का ही कटा हुआ मस्तक धारण किया हुआ है। उनके कटे हुए धड़ से रक्त की तीन तेज धाराएं निकल रही हैं।
    इनमें से एक धारा स्वयं उनके मुख में जा रही है, जबकि अन्य दो धाराएं उनकी दो परिचारिकाओं (सखियों) की प्यास बुझा रही हैं। माता के दाहिने हाथ में खड्ग (तलवार) सुशोभित है और वे एक रति-क्रीड़ारत (मैथुनरत) जोड़े के ऊपर खड़ी हुई हैं।
    मां छिन्नमस्ता की उत्पत्ति के संदर्भ में मुख्य रूप से दो कथाएं प्रचलित हैं, जो इस प्रकार हैं –

    1. पहली कथा: इस तरह मिटाई सखियों की भूख
      पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, एक बार माता पार्वती अपनी दो सखियों के साथ मंदाकिनी नदी में स्नान करने गई थीं। तभी अचानक उनकी सखियों जया और विजया को तीव्र भूख और प्यास सताने लगी। क्षुधा के कारण उनका हाल बेहाल हो गया और चेहरा पीला व काला पड़ने लगा। जब आस-पास भोजन का कोई प्रबंध नहीं दिखा, तो उन्होंने माता पार्वती से तत्काल भोजन की व्यवस्था करने की विनती की।
      अपनी सखियों की यह पीड़ा माता से देखी नहीं गई और उन्होंने अपने ही खड्ग से अपना शीश धड़ से अलग कर लिया। कटा हुआ मस्तक उनके बाएं हाथ में आ गिरा और गर्दन से रक्त की तीन फुहारें फूटीं। दो धाराओं से माता ने अपनी सखियों की क्षुधा शांत की और तीसरी धारा से स्वयं रक्तपान किया। इसी स्वरूप के कारण वे ‘छिन्नमस्ता’ कहलाईं।
    2. दूसरी कथा: मां काली का रौद्र रूप
      एक अन्य कथा के अनुसार, माता काली अपने अनुचरों के साथ रणभूमि में असुरों का संहार कर रही थीं। युद्ध करते-करते माता को थकान और प्यास का अनुभव हुआ। उन्होंने अपने अनुचरों से जल लाने को कहा, परंतु सभी युद्ध में व्यस्त थे।
      प्यास बुझाने के लिए जब माता को कोई मार्ग न दिखा, तो खड्ग से अपना ही शीश काट लिया और अपने ही रक्त से प्यास बुझाने लगीं। इसके पश्चात, माता ने पुनः अपना मस्तक धड़ से जोड़ लिया और बचे हुए असुरों का सर्वनाश कर दिया।
      अस्वीकरण: इस लेख में कहे गए उपाय/लाभ/सलाह और कथन केवल सामान्य सूचना के लिए हैं। ताजा खबर यहां इस लेख फीचर में लिखी गई बातों का समर्थन नहीं करता है। इस लेख में निहित जानकारी विभिन्न माध्यमों/ज्योतिषियों/पंचांग/प्रवचनों/मान्यताओं/धर्मग्रंथों/दंतकथाओं से संग्रहित की गई हैं। पाठकों से अनुरोध है कि लेख को अंतिम सत्य अथवा दावा न मानें एवं अपने विवेक का उपयोग करें। ताजा खबर अंधविश्वास के खिलाफ है।
    Desh Even Lord Parashurama worshipped Goddess Chhinnamasta; the demons would tremble in fear. New Delhi Religion tazza khabar tazza khabar in hindi
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