हम सभी धर्मों और भाषाओं का पूर्ण सम्मान करते हैं। इसीलिए सर्वधर्म सदभाव का प्रतीक कहलाता है हमारा देश। किसी भी जाति और समाज से संबंध धार्मिक स्थल से उसे मानने वालों की भावनाएं जुड़ी रहती है चाहे वो किसी गांव देहात में हो या शहर में विश्व प्रसिद्ध हो या सिद्धपीठ। धर्म और आस्था सबकी उससे जुड़ी रहती है। आज यह खबर पढ़कर कि तेलंगाना के वारंगल जिले में ध्वस्त किया ८०० वर्ष पुराना मंदिर सनातन की भावना को यह खबर आहत करने वाली है। समाचार के अनुसार तेलंगाना के वारंगल जिले में, लगभग 800 साल पुराने माने जाने वाले एक प्राचीन शिव मंदिर को गिराए जाने से लोगों में भारी गुस्सा है। गांव वाले और राजनेता, अधिकारियों पर विकास के नाम पर इस क्षेत्र की ऐतिहासिक विरासत के एक अहम हिस्से को नष्ट करने का आरोप लगा रहे हैं। खानपुर मंडल के अशोक नगर गांव में एक ऐतिहासिक मिट्टी के किले के अंदर स्थित इस मंदिर को, कथित तौर पर एक श्एकीकृत स्कूल परियोजना्य के निर्माण के लिए जमीन समतल करने के काम के दौरान गिरा दिया गया। विपक्षी भारत राष्ट्र समिति और भारतीय जनता पार्टी ने तेलंगाना के वारंगल जि़ले में एक प्राचीन मंदिर को गिराए जाने की निंदा की है।
भाजपा के कार्यकारी अध्यक्ष के.टी. रामा राव ने इस घटना को बेहद शर्मनाक बताया और मंदिर को तुरंत फिर से बनवाने की मांग की। रामा राव ने पोस्ट किया, श्इस राज्य में ऐसे बेवकूफों का राज चल रहा है जिन्हें तेलंगाना के इतिहास, संस्कृति या अस्तित्व की जरा भी समझ नहीं है। यह बेहद शर्मनाक है कि राज्य की कांग्रेस सरकार ने वारंगल जि़ले के खानपुर मंडल में अशोकनगर के पास, 800 साल पहले काकतियों द्वारा बनवाए गए एक प्राचीन शिव मंदिर को गिराकर जमीन में मिला दिया।
800 साल पुराने शिव मंदिर का इतिहास
इस बीच, भारत सरकार के संस्कृति मंत्रालय और पुरातत्व विभाग ने कथित तौर पर मंदिर को गिराए जाने के मामले में एक केस दर्ज कर लिया है। वकील रामा राव इमानेनी ने राष्ट्रीय स्मारक प्राधिकरण के समक्ष इस संबंध में शिकायत दर्ज कराई थी। आरोप है कि एक इंटीग्रेटेड स्कूल के निर्माण के लिए बुलडोजर का इस्तेमाल करके इस मंदिर को गिरा दिया गया। कहा जाता है कि इस मंदिर में फरवरी 1231 ई. का एक दुर्लभ तेलुगु शिलालेख मौजूद था। सात पंक्तियों वाले इस तेलुगू शिलालेख को 1965 में विरासत विभाग द्वारा प्रलेखित किया गया था। कहा जाता है कि यह मंदिर परिसर ऐतिहासिक कोटा कट्टा मिट्टी के किले वाले क्षेत्र का हिस्सा था, जो प्राचीन तालाबों और किलेबंदियों से घिरा हुआ था।
वहीं सरकार ने इस मामले में सफाई दी है। उन्होंने कहा कि 6 मई को राजस्व विभाग, पुरातत्व विभाग, खानापुर तहसीलदार, तेलंगाना स्टेट एजुकेशन एंड वेलफेयर इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट कारपोरेश्न (टीजीईडब्ल्यूआईडीसी) और निर्माण एजेंसी के अधिकारियों की संयुक्त जांच की गई। जांच में पाया गया कि 30 एकड़ भूमि घनी झाड़ियों और पेड़ों से ढकी हुई थी। प्रस्तावित यंग इंडिया इंटीग्रेटेड रेजिडेंशियल स्कूल कॉम्प्लेक्स के लिए सफाई और समतलीकरण के दौरान वहां एक पुरानी और जर्जर संरचना के अवशेष मिले। अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि किसी भी प्रकार का विध्वंस या तोड़फोड़ निर्माण एजेंसी द्वारा नहीं किया गया।
देश में इस समय सनातन को बनाए रखने वाली सरकार है। इससे यह उम्मीद की जाती है कि वह पूजा स्थलों की रक्षा करे। इस बात को ध्यान रखते हुए केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह को इस घटना का संज्ञान लेते हुए दोषियों के खिलाफ कार्रवाई करने के साथ मंदिर का पुन जीर्णोद्धार कराने के लिए तेलंगाना सरकार को निर्देश दिया जाए। यह काम जल्दी हो जिससे सनातन धर्मी और बहुसंख्यकों की भावनाएं आहत ना हो इसके लिए एक उच्च स्तरीय निगरानी समिति बनाई जाए। जो इस काम को धार्मिक दृष्टिकोण से आस्था के साथ अंजाम दे सके।
(प्रस्तुतिः- रवि कुमार बिश्नोई संपादक दैनिक केसर खुशबू टाइम्स मेरठ)
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