गरीब हो या अमीर कोई भी क्यों ना हो कठिनाई में उसे मां और भगवान की ही याद आती है। लेकिन इसे बदलती सोच कहें या स्वार्थ की भावना सर्दी गर्मी बरसात में सीने से लगाकर बच्चों को पालने और खुद भूखी र हकर उनका पेट पालने वाली मां को या तो काफी लोग भूलते जा रहे हैँ या दिखावे के लिए काफी बातें करते हैं लेकिन उनकी परेशानी पर वैसा ध्यान नहीं देते जैसा मां बच्चों पर देती है। समाज में सबसे निचले स्तर से आगे बढ़कर अनपढ़ होने के बावजूद उक्त शब्द लिखवाने की प्रेरणा मां की ममता को याद करके ही मिलती है। मैंने देखा कि बच्चा मां के लिए सबसे सुंदर बुद्धिमान होता है लेकिन वो ही बालक आगे बढ़कर जब मां की कठिनाईयों का समय से समाधान ना कर पाने की बात के समय यह भूल जाता है कि पैदा होने के बाद उसकी स्थिति उसके बूढे मां से भी ज्यादा बुंरी थी। आज जिस मां को बच्चे नजरअंदाज करने की कोशिश करते हैं या उनसे दुर्व्यवहार करते हैं वो यह भूल जाते हैं कि उनकी जरा सी बीमारी में मां रातभर जागकर और डॉक्टरों के यहां पैसा खर्च कर सही करने का आग्रह करती है उसी मां के साथ वर्तमान में जो व्यवहार बच्चे कर रहे हैँ उसे किसी भी रुप में सही नहीं कहा जा सकता। मेरा मानना है कि परिवार की कठिनाई को उसे प्राथमिकता से दूर कर मां बाप की पीड़ा को समझना होगा। यह ध्यान कर कि आज वो जिस स्थिति में है वो मां बाप की वजह है। मां ने नौ माह कोख में रखकर जीवन दिया जिसका कर्ज बच्चे कभी नहीं उतारते। जब भी कोई परेशानी आती है तो मां शब्द ही मुंह से निकलता है। भले ही हम नजरअंदाज करें लेकिन जैसे हम मां की भावनाओं में समाए हैं हमारी भावनाओं मेें वो पूर्ण स्थान रखती है। बड़े होकर कोई धनवान बनता है तो कोई बदमाश मैने देखा कि माता पिता के लिए बच्चे सबकुछ करने को तैयार होते हैं और कई ऐसे भी होते हैं जो धनवान होने के बावजूद मां बाप को तिरस्कार की भावना से देखते हैं। मुझे आज भी याद है कि जब बचपन में ना सर पर छत थी और ना खाने को रोटी एक बार की बात है दूध पीने की जिद हो गई लेकिन इतने पैसे नहीं थे कि उसकी व्यवस्था हो जाए तो मां ने आटे का घोल बनाकर दूध बताकर पिला दिया सिर्फ इसलिए कि बच्चा भावनाओं को ना मारे और आटे के घोल व दूध में बच्चे फर्क नहीं कर पाते ऐसी मां के प्रति जो व्यवहार व खबरें मिलती है उनहे देखकर बड़ा दुख होता है। मेरा ऐसे मां बाप को भूलकर उनका तिरस्कार या परेशान करने वाले बच्चों को देश के यशस्वी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी से प्रेरणा लेनी चाहिए पिछले कई दशक से राजनीति में शीर्ष पर होने के बाद भी वह अपनी मां के प्रति आदरभाव बनाए रखते हैं। ऐसा नहीं है कि बड़ा आदमी ही ऐसा करता है। आर्थिक रुप से कमजोर व्यक्ति भी मां की सुविधा का ध्यान रखते थे। मैं किसी को प्रेरणा देने की स्थिति में नहीं हूं लेकिन बचपन से अब तक जो देखा उससे कह सकता हूं मां बाप के चरणों में सारी दुनिया की खुशियां समाई रहती है। इसके उदाहरण के रुप में हम भगवान गणेश को देख सकते हैं। जब देवी देवताओं ने प्रस्ताव रखा कि सबसे पहले पूजा किसकी हो तो जो तीनों लोकों की परिक्रमा सबसे पहले करेगा वो सबसे पहले पूजा जाएगा। तो भगवान गणेशजी ने अपने माता पिता की परिक्रमा तीन बार कर डाली। इस पर उन्होंने कहा कि मेरे लिए तो मां बाप ही तीनों लोक के समान है और उन्हें प्रथम पूजनीय माना गया। इससे अंदाजा लगाया गया कि मां बाप का हमारे जीवन में क्या महत्व है। विश्व मातृ दिवस का औचित्य तभी है जब हम सुख में भी मां का सुमिरन करे तो दुख काहे को होय को आत्मसात कर मां की सेवा करने का संकल्प पूरा करे तो इस मातृ दिवस का असली मकसद पूरा होता है। दिखावे के लिए एक दिन मां बाप को पूजना मातृ दिवस का प्रतीक नहीं है।
(प्रस्तुतिः- रवि कुमार बिश्नोई संपादक दैनिक केसर खुशबू टाइम्स मेरठ)
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